mary kom the famous boxer from india

मैरी कॉम द फेमस बॉक्सर ऑफ़ इण्डिया

मैरी कॉम का जन्म 1 मार्च, 1983 को भारत के मणिपुर के कन्गथेई में एक आर्थिक रुप से कमजोर और बेहद गरीब परिवार में हुआ था. जन्म के बाद उनका नाम मांगते चुंगनेजंग मैरी कॉम रखा गया. उनके पिता का नाम मांगते तोंपा कोम था, जो एक गरीब कृषक थे, वह जैसे तैसे करके अपने परिवार का गुजर-बसर करते थे. मैरी कॉम की माता का नाम मांगते अक्हम कोम है, मैरी कॉम अपने माता-पिता की सबसे बड़ी संतान के रुप में जन्मी थी, साथ ही उनके चार अन्य भाई-बहन भी थे. बड़ी होने के कारण वह अपने परिवार का पालन-पोषण करने में माता-पिता के साथ खेतों में काम भी करवाती थीं, और भाई-बहनों का बड़ा ध्यान रखती थी.

अपने घर की मालीय हालत खराब होने का प्रभाव मैरी कॉम ने अपनी शिक्षा पर नहीं पड़ने दिया और मन लगाकर पढाई की. अपनी शुरुआती शिक्षा लोकटक क्रिस्चयन मॉडल हाई स्कूल से करने के बाद उन्होंने 8वीं तक की पढ़ाई मोइरंग के सैंट जेवियर कैथोलिक स्कूल से की और फिर इम्फाल के एनआईओएस से उन्होंने अपनी स्कूल शिक्षा पूरी की, इसके बाद वह राजधानी इम्फाल के चुराचांदपुर कॉलेज से ग्रेजुएशन करने इम्फाल चली गयी. 

सन 2001 में मैरी कॉम जब पंजाब में नेशनल गेम्स खेलने के लिए जा रही थी, तो उनकी मुलाकात ओन्लर से हुई थी. उस समय ओन्लर दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई कर रहे थे. शुरुआत में ये दोनों बहुत अच्छे दोस्त बने, और लगभग चार साल तक दोस्त के रूप में एक दूसरे को समझने के बाद ये दोस्ती प्यार में बदल गयी. जिसके बाद सन 2005 में दोनों ने एक-दूसरे से शादी कर ली. शादी के बाद सन 2007 में मैरी कॉम ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. इसके बाद सन  2013 में मैरी कॉम ने एक और बेटे को जन्म दिया.
  
बचपन से ही खेल-कूद में रुचि लेने वाली मैरी कॉम शुरु से ही एथलीट बनना चाहती थी. अपने स्कूल के समय से ही वह फुटबॉल जैसे गेम्स में हिस्सा लेती रही थी. या बड़ी दिलचस्प बात यह है कि विश्व स्तरीय मुक्केबाज मैरी कॉम ने उन दिनों कभी बॉक्सिंग प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था. सन 1998 में जब मणिपुर के बॉक्सर डिंग्को सिंह ने एशियन गेम्स में गोल्ड मैडल जीता, तो मैरी कॉम उनसे बड़ी प्रभावित हुईं और उन्होंने अपना स्पोर्ट्स करियर बॉक्सिंग में बनाने का निर्णय लिया.  

हालाँकि एक महिला होने के कारण उनके लिए बॉक्सिंग इसमें करियर बनाना इतना आसान नहीं था, लेकिन शुरु से ही अपने लक्ष्य के लिए दृढ़ रहने वाली मैरी कॉम की मेहनत और ईमानदारी ने उनके इस दुर्लभ लक्ष्य को संभव कर दिखाया. जिसके दम पर वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों की सूची में शामिल हुई. 

पिता और परिवार वालो की उनके बॉक्सिंग में करियर बनाने के लिए असहमति भी उनके करियर का एक अवरोध थी. क्योंकि उस समय, लोग बॉक्सिंग के खेल को पुरुषों का खेल समझते थे. ऐसे में इस फील्ड में करियर बनाना मैरी कॉम के लिए एक बड़ी चुनौती थी. साथ ही परिवार की आर्थित स्थिति भी सही नहीं थी तो मैरी कॉम के लिए बॉक्सिंग में प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेना भी काफी मुश्किल था, लेकिन मजबूत इरादों वाली मैरी कॉम ने अपनी हिम्मत और साहस से इन सभी मुश्किलों को आसान कर लिया.

बॉक्सिंग में अपने करियर बनाने का निश्चय कर चुकी मैरी कॉम ने अपने घर वालों को बिना बताए ही ट्रेनिंग लेना शुरु कर दिया था. सन 1999 में एक बार मैरी कॉम ने खुमान लंपक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में लड़कियों को लड़कों के साथ बॉक्सिंग करते हुए देखा, जिसे देख कर वे काफी प्रेरित हुई और उन्होंने अपने लक्ष्य को किसी भी हाल में पाने का निश्चय किया. इसके बाद मैरी कॉम ने अपने सपने को पूरा करने के लिए मणिपुर राज्य के इम्फाल में बॉक्सिंग कोच एम नरजीत सिंह से बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेना शुरु कर दिया.

बॉक्सिंग में मैरीकॉम के करियर की असली शुरुआत सन 2000 में हुई, जब उन्होंने मणिपुर में वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप और पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय चैम्पियनशिप जीती. इस जीत के साथ उन्होंने बॉक्सर का पहला पुरुस्कार भी मिला एवं उनके परिवार को भी उनके मुक्केबाज होने का पता चला.

इंटरनेशनल लेवल पर अपने करियर का आगाज मैरी कॉम ने 18 साल की उम्र में सन 2001 में किया, जब   उन्होंने अमेरिका में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियन शिप में 48 किलो भार वर्ग में सिल्वर मैडल जीतकर देश का मान बढ़ाया.

सन 2002 में मैरी कॉम ने तुर्की में द्धितीय AIBA महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में 45 किलो भार वर्ग में गोल्ड मैडल जीता. इसी साल मैरी कॉम हंगरी में आयोजित विच कप में भी 45 किलो भार वर्ग में गोल्ड मैडल जीतकर सफलता की सीढ़ी चढ़ना शुरू किया. 

सन 2003 में भारत में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप के 46 किलो भार वर्ग में मैरी कॉम ने गोल्ड मैडल हासिल कर बॉक्सिंग में भारत का गौरव बढ़ाया. 

2004 में उन्होंने नॉर्वे में आयोजित महिला मुक्केबाजी के विश्वकप में गोल्ड मैडल जीतकर भारत का दबदबा दुनिया में कायम किया. 

सन 2005 में भी मैरी कॉम का दमदार प्रदर्शन जारी रहा, उन्होंने ताइवान में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में 46 किलो वेट केटेगरी में गोल्ड मैडल जीतकर एक बार फिर भारत का पूरे विश्व में मान बढ़ाया. इसके साथ ही मैरीकॉम ने साल 2005 में ही रशिया में AIBA महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में गोल्ड मैडल जीतकर महिलाओं के लिए प्रेरणादायक काम किया. 

सन 2006 में मैरी कॉम ने भारत में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप और डेनमार्क में हुई वीनस वीमेन बॉक्स कप में स्वर्ण पदक जीतकर फिर से अपने बॉक्सिंग टेलेंट का लोहा मनवाया. 

सन 2007 में मैरी कॉम प्रेंग्नेंसी के कारण एक साल तक बॉक्सिंग से दूर रहीं, लेकिन फिर 2008 में उन्होंने बेहतरीन वापसी करते हुए भारत में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता. साथ ही इसी साल उन्होंने चीन में आयोजित AIBA महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में 46 किलो वेट केटेगरी में गोल्ड मैडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया. 

अनबीटन मैरी कॉम के रूप में खुद को स्थापित करने वाली मैरी कॉम ने साल 2009 में भी वियतनाम में आयोजित एशियन इंडोर गेम्स में स्वर्ण पदक जीता.

2010 में मैरी कॉम ने कजाखस्तान में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मैडल जीता. इसके साथ ही मैरी कॉम ने इसी साल AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में लगातार पांचवी बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा. इसके साथ ही इसी साल मैरी कॉम ने एशियन गेम्स में 51 किलो वेट केटेगरी में ब्रॉन्ज मैडल भी जीता. साथ ही मैरी कॉम को राजधानी दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में विजेन्द्र सिंह के साथ स्टेडियम में क्वींस बैटन पकड़कर चलने का गौरव हासिल हुआ. हालांकि इन गेम्स में वह अपनी प्रतिभा का जौहर नहीं दिखा सकी, क्योंकि इन गेम्स के आयोजन में महिलाओं की मुक्केबाजी प्रतियोगिता को शामिल नहीं किया गया था.

चीन में आयोजित एशियन वीमेन कप 2011 में भी मैरी कॉम 48 किलो वेट कैटेगिरी में गोल्ड मैडल जीने में सफल रही.

वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीत चुकी मैरीकॉम ने सन 2012 में मोंगोलिया में हुई एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में 51 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया. इसी के साथ ही वे लंदन में आयोजित सन 2012 के लन्दन ओलंपिक में क्वालिफाइड करने के बाद 51 किलो वेट केटेगरी में ओलम्पिक ब्रॉन्ज मैडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनी. साथ ही ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतने वाली वे तीसरी भारतीय महिला बनी.

सन 2014 में भी महान मुक्केबाज मैरी कॉम की जीत का जलवा बरकरार रहा. उन्होंने साउथ कोरिया में आयोजित एशियन गेम्स में वीमेन फ्लाईवेट 48-52 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मैडल जीतकर इतिहास रचा.

सन 2018 में मैरी कॉम ने नई दिल्ली में आयोजित 10वीं AIBA महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में ब्रेक के बाद हिस्सा लिया और छठी बार वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास में नाम दर्ज किया.

अपने अद्भुत खेल और मेडलों के दम पर महानता हासिल करने वाली बॉक्सर मैरी कॉम को अनेको पुरूस्कार अवार्ड और सम्मान मिले है, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है.

सन 2003 में मैरी कॉम को उनकी शानदार मुक्केबाजी के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
2006 में मैरी कॉम को बॉक्सिंग के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत के राष्ट्रीय सम्मान पद्म श्री अवॉर्ड से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया. 

सन 2007 में मैरीकॉम को खेल जगत में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए खेल के सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी किया गया था. इसी साल मैरी कॉम को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्धारा पीपल ऑफ़ द ईयर अवार्ड दिया गया. 


सन 2008 में मैरीकॉम को सी एन एन आई बी एन और रिलायंस इंडस्ट्रीज के द्धारा रियल हॉर्स अवॉर्ड से पुरस्कृत किया गया. 2008 में ही AIBA द्धारा उन्हें मैग्निफिसेंट मैरी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. इसी साल उन्हें पेप्सी एम टी वी यूथ आइकॉन से भी सम्मानित किया गया था.
सन 2007 में खेल जगत में मिलने वाला भारत के सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए नॉमिनेट होने वाली मैरी कॉम को दो साल बाद सन 2009 में फिर से यह मौका मिला और इस बार वह न केवल नॉमिनेट हुई बल्कि उन्होंने भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गाँधी खेल रत्न पुरूस्कार प्राप्त किया. यही सम्मान बाद में भारत सरकार द्वारा मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया गया. 

सन 2010 में मैरी कॉम को सहारा स्पोर्ट्स अवॉर्ड द्धारा स्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर का अवॉर्ड दिया गया.

2013 में मैरी कॉम को देश के तीसरे सबसे बड़े राष्ट्रीय सम्मान पद्म भूषण से भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था.

सन 2018 में मैरी कॉम को मध्यप्रदेश सरकार द्धारा वीरांगना सम्मान से सम्मानित किया गया.

मैरी कॉम का जीवन न केवल महिलाओं के लिए बल्कि हर एक भारतवासी के लिए प्रेरणादायक जीवन प्रसंग है. इसी को एक पुस्तक के माध्यम से उनकी आत्मकथा अनब्रेकेबल के रूप में सन 2013 में प्रकाशित किया गया, जिसे खुद बॉक्सर मैरी कॉम ने डीनो सरटो के साथ लिखा है.

न केवल किताब बल्कि मैरी कॉम के महान जीवन पर एक फिल्म भी बनी है, जो मैरी कॉम नाम से सन 2014 में रिलीज हुई थी. यह फिल्म ओमंग कुमार के निर्देशन पर बनी थी और बॉलीवुड और हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम का शानदार किरदार निभाया था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट रही थी, मैरीकॉम पर बनी इस फिल्म को काफी बड़े स्तर पर सराहा गया था. 

कई बार वर्ल्ड बॉक्सर चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम कर चुकीं प्रसिद्ध भारतीय महिला मुक्केबाज मैरी कॉम को 26 अप्रैल 2016 को भारतीय लोकतंत्र के उच्च सदन राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामांकित किया गया. इसके साथ ही मार्च 2017 में भारत सरकार ने मैरीकॉम को युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा बॉक्सिंग के नेशनल ऑब्जर्वर के रुप में भी मनोनीत किया था.

मुक्केबाजी के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली एवं भारत को पूरी दुनिया के सामने गौरान्वित करने वाली महिला मुक्केबाज मैरी कॉम सभी के लिए प्रेरणा का एक दिव्य स्त्रोत्र है. जिस प्रकार मैरी कॉम ने अपने जीवन में तमाम संघर्षों का सामना करते हुए, बॉक्सिंग में अपना करियर बनाने की असंभव सी दिखने वाली चाह को सच कर दिखाया है, और लोगों की इस धारणा को गलत साबित कर दिया कि मुक्केबाजी, सिर्फ पुरुषों के लिए है, उन्होंने दिखाया कि महिलाएं भी इसमें किसी तरह से पीछे नहीं है. उनका जीवन सिखाता है कि मन में चाह हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है. 

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