biography of maharshi patanjali

महर्षि पतंजलि का जीवन परिचय

महर्षि पतंजलि भारत में एक प्रसिद्ध ऋषि थे, जिन्हें कई महत्वपूर्ण संस्कृत रचनाओं का लेखक माना जाता है. इनमें से सबसे बड़े हैं योग सूत्र, एक शास्त्रीय योग पाठ. पतंजलि के योग सूत्र, योग के सिद्धांत और व्यवहार पर 195 संस्कृत सूत्र (कामोद्दीपक) का एक अद्भुत संग्रह है. योग छह प्रमुख हिंदू दर्शन सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिका, मीमांसा और वेदांत में से एक हैं. योग सूत्र, योग दर्शन के आधार स्तंभ हैं, इन सूत्रों के पढ़ने की क्रिया को भाष्य कहा जाता है.

महर्षि पतंजलि को गोनार्दिय (गोनर्द के निवासी) और गोनिकपुत्र (गोनिका का पुत्र) के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा, पौराणिक कथाओं और हिंदू परम्पराओं में उन्हें भगवान विष्णु के अवतार शेषनाग या आदिशेष का रूप भी माना जाता है.

इनको योगशास्त्र के जन्मदाता की उपाधि भी दी जाती हैं. पतंजलि एक प्रख्यात चिकित्सक और रसायन शास्त्र के आचार्य भी थे. रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अभ्रक, धातुयोग और लौह्शास्त्र का परिचय कराने का श्रेय भी  पतंजलि को ही जाता है. महान राजा भोज ने महर्षि पतंजलि को तन के साथ हीं मन के चिकित्सक की उपाधि से भी विभूषित किया था. इनको आयुर्वैदिक ग्रन्थ चरक संहिता का भी जनक माना जाता है.

महर्षि पतंजलि का नाम आने पर अक्सर पाणिनी का भी नाम आता है. कुछ विद्वानों के अनुसार, पतंजलि ने काशी में पाणिनि से शिक्षा ली थी और बाद में उनके शिष्य की तरह काफी काम भी किए. पतंजलि ने पाणिनि के अष्टाध्यायी पर अपनी टीका लिखी, जिसे महाभाष्य भी कहा गया.

योगसूत्र या पतंजलि के योग-सूत्र को पांतजलि ने 200 ई. पूर्व में लिखा था. इसे योग पर लिखी पहली सुव्यवस्थित लिखित कृ‍ति माना जाता है. इस पुस्तक में 195 सूत्र हैं जो चार अध्यायों में विभाजित है.

महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग की महत्ता का भी प्रतिपादन किया है. जिसका जीवन को स्वस्थ रखने में विशेष महत्त्व है. इनके नाम इस प्रकार हैं –

यम
नियम
आसन
प्राणायाम
ध्यान
धारणा
प्रत्याहार
समाधि

इनमें से वर्तमान समय में केवल आसन, प्राणायाम औए ध्यान हीं प्रचलन में हैं. इनके प्रयासों के कारण हीं योगशास्त्र किसी एक धर्म का न होकर सभी धर्म और जाति के शास्त्र के रूप में प्रचलित है.

पतंजलि द्वारा रचित ग्रन्थ :

भारतीय दर्शन शास्त्र के धरोहर में पतंजलि के लिखे तीन प्रमुख ग्रंथों का वर्णन मिलता है, जिनके नाम हैं – योगसूत्र , आयुर्वेद पर ग्रन्थ एवं अष्टाध्यायी पर भाष्य. पतंजलि ने पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी पर टिका लिखा जिसे महाभाष्य के नाम से जाना जाता है. महाभाष्य एक व्याकरण का ग्रन्थ है, जिसे वर्तमान समाज का विश्वकोश भी कहा जाता है. महाभाष्य द्वारा व्याकरण की जटिलता के रहस्य को सुलझाने में मदद मिलती है. इस ग्रन्थ के माध्यम से शब्द की व्यापकता पर प्रकाश डाल कर महर्षि पतंजलि ने स्फोटवाद नामक एक नवीन सिद्धांत का भी प्रतिपादन किया.

योगसूत्र का अनुवाद विभिन्न देशी एवं विदेशी भाषाओं किया जा चुका है. भारतीय साहित्य की देन योगशास्त्र आज फिर से अपनी चरम पर है. आज इसका प्रचलन शरीर को स्वस्थ रखने के साथ हीं दिमाग को भी शांत करने के लिए किया जा रहा है.

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