vaman dwadashi parv uska mahatva aur katha

वामन द्वादशी पर्व उसका महत्त्व और कथा

विष्णु भगवान के वामन अवतार के दिन को वामन द्वादशी के रूप में मनाया जाता है. वामन द्वादशी को ही वामन जयंती भी कहा जाता है. 

वामन द्वादशी सन 2027 में रविवार 12 सितम्बर 2027 को मनाई जाएगी.  

वामनावतार क्योंकि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को हुआ था, इसीलिए इस दिन को वामन द्वादशी या वामन जयंती के रूप में लोग बड़ी श्रद्धा भाव से मनाते है.

इस दिन भगवान श्री विष्णु ने वामन, एक बौने ब्राह्मण के रूप में अवतार लेकर असुर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगकर उनका अहंकार समाप्त किया था और उनकी दान के लिए संकल्प शक्ति देखकर, उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया. वामनावतार भगवान विष्णु के दशावतारों में पांचवां अवतार है और यह उनका धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए लिया गया प्रमुख अवतार माना जाता है.

श्री हरि के भक्त इस दिन व्रत उपवास इत्यादि रखकर, भगवान वामन की पूजा-अर्चना करते हैं.

वामन द्वादशी के दिन श्री हरि विष्णु भगवान के वामन रूप की पूजा करने से पाप धुल जाते हैं. साथ ही इस वामन द्वादशी की पूजा से काम या व्यापार में आने वाली सभी बाधाएं भी दूर हो जाती है. 

भगवान वामन को वामन द्वादशी के दिन अर्पित किये गए शहद का विशेष महत्त्व बताया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इसका सेवन प्रतिदिन करेंने से रोगों से मुक्ति मिलती है. साथ ही वामन द्वादशी के दिन परिवार में सुख शांति के लिए वामन देवता के समक्ष कांसे के दीये में घी का बारहमुखी दीपक जलाना भी बहुत शुभ माना जाता है.

चावल और दही सहित चांदी का दान करना भी वामन द्वादशी का विशेष विधान होता है, इसके अलावा तांबा या उससे बनी कोई भी वस्तु भी इस दिन दान की जाती हैं.

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