अमरनाथ धाम के विषय में ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव यहाँ पर अमरनाथ गुफा में साक्षात विराजमान हैं, इस पावन गुफा में बर्फीली बूंदों से बनने वाले हिम शिवलिंग को दैवीय चमत्कार माना जाता है. साथ ही अमरनाथ गुफा में मौजूद कबूतर का एक जोड़ा शिव पार्वती का प्रतीक है, जिसकी कथा बहुत प्रचलित है.
एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से उनके अजर अमर होने और गले में पड़ी नरमुंड की माला माला का रहस्य जानने की जिज्ञासा जाहिर की तो भगवान शिव ने माँ पार्वती के इस सवाल का जवाब देना पहले तो उचित नहीं समझा और बात को टालने की कोशिश की.
किन्तु जब माँ पार्वती जिद करने लगी तो उन्होंने इस रहस्य को उनके सामने उजागर करने का निर्णय लिया. इस रहस्य को बताने के लिए भगवान शिव किसी एकांत स्थान की खोज में चलते हुए, पहलगाम पहुंचे जहाँ उन्होंने अपने वाहन नंदी को सबसे पहले छोड़ा. पहलगाम से ही अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है.
एक गुप्त कथन की तलाश में यहां से कुछ आगे चलने पर शिव जी ने अपने माथे से चंद्रमा को अलग कर दिया. जहाँ पर उन्होंने चन्द्रमा को छोड़ा वह चंदनवाड़ी कहलाया. आगे चलकर जहाँ गंगा जी को छोड़ा वह पंचतरणी और जहाँ गले के सांपों को छोड़ा वह शेषनाग कहलाया.
इसके बाद अपने प्रिय पुत्र गणेश जी को जहां पर शिव जी ने छोड़ा वह गणेश टॉप कहलाया. गणेश टॉप अमरनाथ यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव है.
इस प्रकार अपनी इन पांच प्रिय चीजों को पीछे छोड़ने के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ उस गुफा में प्रवेश किया, और जिससे कि कोई भी तीसरा प्राणी इसमें प्रवेश न कर पाए इसलिए भगवान शिव ने गुफा के चारों ओर अग्नि भी प्रज्ज्वलित कर दी. फिर शिव जी ने अपने जीवन के उस गूढ रहस्यों की कथा माँ पार्वती को बतानी शुरू कर दी.
कहा जाता है कि कथा सुनते-सुनते देवी माँ पार्वती को नींद आ गई, लेकिन उस समय वहां गुफा में दो सफेद कबूतरों का एक जोड़ा मौजूद था, जो यह कथा सुन रहा था, और हुंगारे दे रहा था. जब अमर कथा समाप्त हुई और भगवान शिव का ध्यान माता पार्वती पर गया तो उन्होंने पार्वती जी को सोया हुआ पाया.
शिव जी ने सोचा कि जब पार्वती सोयी हुई है, तो मेरी कथा में हुंगारे कौन दे रहा था. कौन सुन रहा था मेरी कथा, इसी बीच उनकी दृष्टि उन दोनों कबूतरों पर पड़ी. जिन्हे देखकर शिवजी को उन पर क्रोध आ गया, शिव से क्षमा मांगते हुए दोनों कबूतर उनके के पास आकार बोले कि भगवन हमने आपकी अमर कथा सुनी है, यदि आप हमें मार देंगे तो आपकी कथा झूठी हो जाएगी.
इस पर शिव जी ने उस कबूतरों के जोड़े को वर दिया कि वह सदैव उस स्थान पर शिव और पार्वती के पावन प्रतीक के रूप में उपस्थित रहेंगे.
आज भी जब शिव भक्त श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं तो कई भक्तो को उस कबूतर के जोड़े के रूपं में भगवान शिव और माँ पार्वती के दर्शन होते हैं. अमरनाथ यात्रा के कबूतरों के दर्शन करके शिव भक्त श्रद्धालु खुद को बहुत सौभाग्यशाली समझते है और मानते है कि भगवान शिव और माँ पार्वती की विशेष कृपा उन पर है.
पलक सिधवानी का जीवन परिचय
अदिति जेटली जडेजा वाइफ ऑफ अजय जडेजा
रिवाबा जडेजा वाइफ ऑफ सर रविंद्र जडेजा
केवी कुटीर कुमार विश्वास का इको फ्रेंडली घर
शिल्पा शिरोडकर का जीवन परिचय
श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव और उसका महत्त्व
सपना चौधरी वाइफ ऑफ़ प्रवीण कुमार
अनसूया सेनगुप्ता एन एक्ट्रेस एंड प्रोडक्शन डिज़ाइनर
हनुमान भक्त महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार
आयुष बडोनी का जीवन परिचय
पितृ पक्ष में कौवें को खाना खिलाने का वैज्ञानिक महत्त्व
ब्यूटीफुल मेहंदी डिज़ाइनस फॉर करवा चौथ
भुवनेश्वर कुमार का जीवन परिचय
प्रेमानंद जी महाराज श्री राधा जू के परम भक्त
किस्सा सौरव गांगुली और डोना की शादी का