सुप्रिया साहू भारत की मशहूर प्रसाशनिक अधिकारी और पर्यावरणविद है. सुप्रिया साहू को 10 दिसंबर 2025 को नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा 2025 चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. तमिलनाडु की आईएएस अधिकारी सुप्रिया साहू को प्रेरणा और सक्रिय कार्यों की श्रेणी में 2025 का यूएन चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार प्रदान किया गया है. चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान है.
सुप्रिया साहू का जन्म 27 जुलाई 1968 को हुआ था. उन्होंने अपनी स्कूलिंग और ग्रेजुएशन करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश से वनस्पति विज्ञान में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री ली थी. फिर सुप्रिया साहू ने सन 1989 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करके ट्रेनिंग के बाद वह तमिलनाडू कैडर के 1991 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं. तमिलनाडु कैडर आवंटित होने पर सुप्रिया करियर के शुरुआती दौर में नीलगिरि जिले की कलेक्टर रही. मशहूर रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति जिसे अभिनेता अमिताभ बच्चन होस्ट करते है का भी सुप्रिया साहू हिस्सा रह चुकी हैं.
सुप्रिया साहू को भारत में प्लास्टिक और वन्यजीव संरक्षण सहित महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों पर उनके अग्रणी सुधारों के लिए और लंबे समय तक उनके द्वारा किये गए नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया.
प्रेरणादायी कर्म के लिए चैंपियंस ऑफ द अर्थ 2025 पुरस्कार जीतने वाली सुप्रिया साहू अपनी प्रेरणा उन लोगों को बताती है, जो स्थानीय गांव से उनके साथ खड़े रहे और मैंग्रोव वनों को अपना मानकर उनके साथ सफाई का काम करते थे. साथ ही उन बच्चों से भी सुप्रिया को प्रेरणा मिलती है जो अपनी आंखों में चमक लिए उनको अपना आदर्श मानते हैं.
सन 2021 से तमिलनाडु के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्य करने वाली सुप्रिया साहू भारतीय प्रसाशनिक अधिकारी हैं.
सुप्रिया साहू का प्रकृति के प्रति प्रेम उनके बचपन में ही शुरू हो गया था, जब वह अपने परिवार अपने पिता की नौकरी के कारण देश भर में यात्रा करते थे. सुप्रिया साहू को हाथी बेहद पसंद हैं और उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हाथियों से जुड़ी पोस्ट से भरा हुआ है. साहू का कहना है कि हाथी के जीवन से हमें सहनशीलता, पारिवारिक बंधन और नेतृत्व के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं.
संघ लोक सेवक के रूप में अपने 30 साल के करियर के दौरान, साहू ने भारत की समृद्ध जैव विविधता के विषय में गहन रिसर्च शोध करके अपनी रुचि विकसित की है. इस बात से भी सुप्रिया भलीभांति अवगत हैं कि गैरजिम्मेदार मानवीय व्यवहार, प्रकृति को सर्वाधिक गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
वह कहती है कि मैंने जानवरों को प्लास्टिक का कचरा खाते देखा और मुझे एहसास हुआ कि हमारे ग्रह पर जीव का दम घुट रहा है. यह अनुभव मेरे लिए एक परिवर्तनकारी अनुभव साबित हुआ, जो नीलगिरि जिले में जिला कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मैंने अनुभव किया था.
सुप्रिया साहू को तमिलनाडु में उप-राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई, पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने और टिकाऊ शीतलन नवाचारों को बड़े पैमाने पर लागू करने में उनके अभूतपूर्व नेतृत्व जैसे अनेको पर्यावर्णीय सुधारों के लिए यह सम्मान मिला है. साहू की इन बड़ी पहलों ने यह दिखाया है कि कैसे एकीकृत शासन और प्रकृति-आधारित समाधान,निम्न और उच्च-तकनीकी हस्तक्षेपों के मिश्रण के साथ, कमजोर समुदायों की रक्षा कर सकते हैं. साथ ही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी कम करके नियंत्रित किया जा सकता हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने सुप्रिया साहू को 2025 का यूएन चैंपियंस ऑफ द अर्थ घोषित करते हुए कहा कि उनके भागीरथी प्रयासों ने लाखों हरित रोजगार सृजित किए हैं और राज्य को विज्ञान-आधारित, समुदाय-संचालित जलवायु नियंत्रण के लिए एक फ्लेक्सिब्ल मॉडल प्रस्तुत किया है. साहू की सतत शीतलन और पुनर्स्थापन पहलों ने वन क्षेत्र का विस्तार किया और 12 मिलियन लोगों के लिए कार्य में लचीलेपन के साथ जीवन सुधार किया है.
सुप्रिया साहू के द्वारा किये गए प्रमुख कार्य और पहलें निम्नलिखित है -
- सन 2000 में, सुप्रिया साहू ने नीलगिरि में एकल-उपयोग प्लास्टिक को खत्म करने के उद्देश्य से ऑपरेशन ब्लू माउंटेन नामक एक अभियान एक ऐसे समय शुरू किया था जब प्लास्टिक प्रदूषण का मुद्दा कही भी चर्चा से परे था.
- 2020 के आस पास साहू ने तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी की शुरुआत की, जो तटीय लचीलेपन पर केंद्रित एक गैर-लाभकारी संस्था है, और शहरी गर्मी और बढ़ती शीतलन मांग से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं को संचालित करती है.
- सुप्रिया साहू ने कूल रूफ प्रोजेक्ट का भी नेतृत्व किया, जो निष्क्रिय शीतलन पहलों में से एक है और जिसे 200 सार्वजनिक ग्रीन स्कूलों में सफलता पूर्वक लागू करके क्रियान्वयन किया.
- तमिलनाडु में सुप्रिया साहू ने 10 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण और 65 नए आरक्षित वन स्थापित करने के प्रयासों का भी नेतृत्व किया. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उनके नेतृत्व में राज्य में मैंग्रोव क्षेत्र दोगुना हो गया है, आर्द्रभूमि की संख्या 1 से बढ़कर 20 हो गई है और 6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का लुप्तप्राय प्रजाति संरक्षण कोष शुरू हो गया है.
- चेन्नई में भी, सुप्रिया साहू ने शहरी नियोजन के लिए नेचर फर्स्ट दृष्टिकोण को लागू कर दिया है.
तमिलनाडु सरकार के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग में अपर मुख्य सचिव के पद पर कार्य करने से पूर्व सुप्रिया साहू केंद्र सरकार की प्रतिनियुक्ति पर दूरदर्शन की महानिदेशक (DG) के रूप में भी काम कर चुकी हैं. साथ ही वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग में भी अपर मुख्य सचिव रह चुकी हैं.
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