social responsibilities to be followed by business

व्यवसाय द्वारा पालन करने हेतु सामाजिक जिम्मेदारियां

किसी व्यवसाय द्वारा केवल अर्थ वृद्धि और व्यवसाय का नियमपूर्वक क्रियान्वयन ही महत्वपूर्ण नहीं होता अपितु कुछ सामाजिक जिम्मेदारियां भी होती है जिनका व्यवसाय द्वारा सही से निर्वहन होना चाहिए/. ऐसी ही कुछ सामाजिक जिम्मेदारियां जिन्हे वयवसाय द्वारा निभाया जाना चाहिए निम्नलिखित है -

- उत्पादों की वांछित गुणवत्ता की आपूर्ति सही से होगी ग्राहक केवल तभी उत्पाद खरीदना पसंद करते हैं. इसमें जब वे संतोषजनक गुणवत्ता को उचित मूल्य पर उपलब्ध हों पाते है तो उनका विश्वास उत्पाद में बढ़ता है. ग्राहक गुणवत्ता के प्रति बहुत सजग रहता है और वह पैसे के लिए सही मूल्य की अपेक्षा करता है. हालांकि विभिन्न उत्पादों के लिए गुणवत्ता का अर्थ अलग-अलग हो सकता है.

- अनुचित व्यापार प्रथाओं से बच कर चलना भी व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण है, असामाजिक या अनुचित व्यापार प्रथाओं में कालाबाजारी, मिलावट, जमाखोरी, अधिक कीमत वसूलना आदि शामिल हैं. उत्पादों के उपयोग के बारे में विज्ञापनों में अतिशयोक्ति करना भी एक अनुचित व्यापार प्रथा है. कोई भी समाज इन प्रथाओं को स्वीकार नहीं करता है. इन प्रथाओं से एक व्यापारी न केवल अपनी प्रतिष्ठा खो देता है बल्कि यह कानून के तहत दंडनीय भी होता है.

रोजगार सृजन भी व्यवसाय का उद्देश्य होना चाहिए क्योंकि बेरोजगारी हर समाज के लिए एक बड़ी समस्या है. व्यवसायी को रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए और विकासशील देशों की इस बुनियादी समस्या पर काबू पाने में मदद करनी चाहिए  व्यवसाय लोगों को विभिन्न प्रकार के काम करने के लिए रोजगार देता है. लोगों को काम पर लगाकर अच्छा व्यवसायी समाज में आय के प्रवाह में मदद करता है.

समाज सेवा या सामुदायिक सेवा भी व्यापारियों द्वारा ही संचालित किये जाते है, बड़े व्यापारिक घराने सामुदायिक सेवा की विभिन्न परियोजनाएं चलाते हैं जैसे धर्मार्थ डिस्पेंसरी, स्कूल, अस्पताल आदि चलाना बड़ी कंपनियां दान, आदि के रूप में बड़ी मात्रा में धनराशि का योगदान करके गैर सरकारी संगठनों और सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक सेवा कार्यक्रमों में मदद करती हैं.

प्रदूषण से बचाव करना और प्रकृति के हिट को ध्यान में रखते हुए व्यवसाय करना बहुत आवश्यक है, क्योंकि औद्योगीकरण के कारण प्रदूषण जैसी बड़ी प्राकृतिक समस्या उत्पन्न हो गई है. उद्योग अपने अपशिष्ट को झीलों, नदियों आदि में फेंक देते हैं या बहा देते हैं, जिससे जल प्रदूषित होता है. उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाला धुआँ पर्यावरण को प्रदूषित करता है. चूँकि व्यवसायी, बड़े स्तर पर प्रदूषण फैलने का प्रमुख कारण होते है, इसलिए व्यवसायी का ही यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह आगे आकर प्रदूषण की समस्या के समाधान में मदद करें, और अपने व्यवसाय को इस प्रकार नियोजित करे कि इससे प्रकृति का नुक्सान निम्नतम हो.

 

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