smriti singh wife of martyr captain anshuman singh

स्मृति सिंह वाइफ ऑफ शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह

स्मृति सिंह शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह की विधवा पत्नी है जिन्हे अंशुमन सिंह की मां मंजू सिंह के साथ 5 जुलाई 2024 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह को मरणोपरांत दिया गया कीर्ति चक्र सौंपा गया.

स्मृति सिंह की मुलाकात कैप्टन अंशुमन सिंह से कॉलेज के पहले दिन हुई थी, और पहली नजर में ही दोनों को आपस में प्यार हो गया था. इसके एक महीने बाद ही अंशुमन सिंह का सेलेक्शन आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज के लिए हो गया. स्मृति सिंह, अंशुमन से इंजीनियरिंग कॉलेज में मिली थी और अंशुमन का मेडिकल कॉलेज के लिए सेलेकशन हो गया था. कैप्टन अंशुमन सिंह बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान शख्स थे. एक महीन की मुलाकात में बना स्मृति सिंह और कैप्टन अंशुमन सिंह का रिलेशन लगभग 8 सालों के लम्बे अंतराल तक चला जो कि एक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप था.

जिसके बाद दोनों ने निर्णय लिया कि अब हमें शादी कर लेनी चाहिए. तब स्मृति सिंह और कैप्टन अंशुमन सिंह ने 10 फरवरी 2023 को शादी कर ली. दुर्भाग्य से शादी के महज दो महीने बाद ही कैप्टन अंशुमन सिंह की पोस्टिंग सियाचिन ग्लेशियर में हो गई. स्मृति सिंह बताती है कि 18 जुलाई, 2023 को हमारे बीच लंबी बातचीत हुई, जिसमें हमने जीवन के अगले 50 साल के लिए प्लानिंग का डिस्कशन किया. हमने घर लेने और बच्चों की परवरिश को लेकर काफी बातें की. 

भरे हुए गले से स्मृति सिंह आगे बताती है कि 19 जुलाई 2023 की सुबह हमारे पास फोन आया कि अंशुमन अब दुनिया में नहीं रहे. शुरु में 7-8 घंटों तक हमें यकीन ही नहीं हुआ. हमें ऐसा लग ही नहीं रहा था कि ये हो सकता है, लेकिन फिर कुछ देर बाद उनके शहीद होने की पुष्टि हो गई. मैं तब भी खुद को समझाने में लगी थी कि ऐसा नहीं हुआ है. रोते हुए स्मृति सिंह कहती है, मगर अब मेरे हाथ में कार्ति चक्र है, इसका मतलब है कि यह सच है. कैप्टन अंशुमन सिंह हीरो हैं. हम अपनी जिंदगी को मैनेज कर लेंगे, उन्होंने भी बहुत मैनेज किया है. तीन लोगों के परिवार बच सकें इसके लिए कैप्टन अंशुमन सिंह ने देश के लिए शहादत दी है. 

कैप्टन अंशुमन सिंह यूपी में देवरिया के रहने वाले थे और पंजाब रेजिमेंट की 26वीं बटालियन के सेना मेडिकल कोर का हिस्सा थे. ऑपरेशन मेघदूत के तहत कैप्टन अंशुमन सिंह की नियुक्ति सियाचिन में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर हुई थी. 19 जुलाई 2023 को सियाचिन के चंदन ड्रॉपिंग जोन में एक भीषण अग्निदुर्घटना हो गयी जिसमें फंसे लोगों को बाहर निकालने में कैप्टन अंशुमन सिंह ने मदद कर रहे थे. इसी दौरान आग मेडिकल इंवेस्टिगेशन सेंटर तक फैल गई. ये देख कैप्टन अंशुमन ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसमें कूद गए. जलते हुए मेडिकल इंवेस्टिगेशन सेंटर में घुसकर कैप्टन अंशुमन सिंह जीवनरक्षक दवाइयों और मेडिकल उपकरणों को बचाना चाहते थे. 

लेकिन 17 हजार फीट की ऊंचाई पर चल रही तेज हवाओं की वजह से शेल्टर पूरी तरह आग की लपटों से घिर गया. कैप्टन अंशुमन सिंह को आग से बचाने की भरपूर कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया ना जा सका. कैप्टन अंशुमन सिंह सियाचिन में वीरगति को प्राप्त हुए. 

शुक्रवार 5 जुलाई 2024 को भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में ही शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह की पत्नी स्मृति सिंह और उनकी मां मंजू सिंह ने राष्ट्रपति से इस सम्मान को प्राप्त किया. 

इस दौरान जब राष्ट्रपति भवन के हॉल में शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह की बहादुरी की गाथा को बताया जा रहा था तो स्मृति सिंह अपनी भावनाओं को रोक नहीं सकी. अपने पति शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह की बहादुरी को सुनकर स्मृति सिंह की आंखें नम हो गई. उनके चेहरे पर उदासी और मायूसी साफ झलक रही थी.  
 कीर्ति चक्र सम्मान लेते समय स्मृति सिंह नम आंखों से अपने वीर पति शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह के उस साहसी किस्से को सुन रही थीं, जिसके लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जा रहा था. 

सफेद रंग की साड़ी पहनकर आई स्मृति सिंह ने डबडबाई आंखों के साथ राष्ट्रपति से कीर्ति चक्र सम्मान लिया. उस समय स्मृति सिंह के चेहरे पर दुख, दर्द और पीड़ा को साफ देखा जा सकता था. जिससे उनके दुख का अंदाजा भी लग रहा था. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मान देने के बाद स्मृति सिंह के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें ढंढास भी बंधाया.

कीर्ति चक्र सम्मान लेने के दौरान का स्मृति सिंह का वीडियो तब सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा वायरल भी हुआ था. 

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