गायत्री माता को वेदों की जननी कहा जाता है. इसलिए गायत्री माता को वेदमाता, विश्वमाता और ज्ञान की देवी भी कहते हैं. इनकी अराधना स्वयं भगवान शिव, श्रीहरि विष्णु और ब्रह्मा जी भी करते हैं, इसलिए गायत्री माता को देव माता भी कहा जाता है.
चारों वेदों की उत्पति गायत्री मां से ही मानी जाती हैं. इसलिये वेदों का सार भी गायत्री मंत्र को माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि चारों वेदों का ज्ञान लेने के बाद जिस पुण्य की प्राप्ति होती है अकेले गायत्री मंत्र को समझने मात्र से चारों वेदों का ज्ञान मिलता जाता है. गायत्री मां को हिंदू भारतीय संस्कृति की जन्मदात्री मानते हैं. वेदों और पुराणों के अनुसार, गायत्री मंत्र की अधिष्ठात्री देवी स्वयं आदिशक्ति का ही रूप हैं.
पंचमुखी अवतार:में मां गायत्री को पंचमुखी और दस हाथों वाला माना गया है, जो सृष्टि के पांच तत्वों पृथ्वी, जल, वायु, तेज और आकाश का प्रतीक हैं. त्रिशक्ति स्वरूप: उन्हें त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शक्तियों (सरस्वती, लक्ष्मी और काली) का संयुक्त रूप माना गया है.
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