मूली एक प्रचलित सब्जी है जिसे अंग्रेजी में रेडिश के नाम से जाना जाता है. मूली का उपयोग मूल रूप से सलाद के तौर पे किया है. मूली मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक मानी जाती है.
मूली में बहुत से विटामिन और खनिजों का भंडार है जो कई तरह की बीमारियों से बचाता है. पेट के आंतो की सफाई, पित्त की समस्या को दूर करने में व्याधियों में मूली बहुत सहायक होती है, इसके अलावा भूख की कमी, बुखार, गले की सूजन आदि की कमी को दूर करने में भी मूली काफी कारगर मानी जाती है. सामान्य तौर पे खाने के साथ ही मूली का उपयोग कई औषधीयां बनाने में भी किया जाता है. मूली के तने के साथ साथ मूली के पत्ते, मूली के बीज भी शरीर के लिए फायदेमंद होते है.
यह कोई साधारण सब्ज़ी नहीं बल्कि मानव शरीर के लिए एक संपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक वरदान है. मूली पाचन से लेकर दिल, हड्डियों, स्किन और इम्यूनिटी तक – हर जगह अपनी भूमिका बखूबी निभाती है. सही मात्रा और सही समय पर मूली का सेवन करने से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लंबे समय तक बेहतर बनाए रख सकता हैं. इनका सेवन सभी को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए. मूली को एक अच्छा घरेलु उपचार माना जाता है. अक्सर डाइट में मूली की सलाद का सेवन लोग अधिक करना पसंद करते है. मूली पाचन क्रिया को भी मजबूत बनाती है.
मूली खाने बहुत से फायदे होते है, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख है -
बुखार कम करने में मूली बहुत सहायक होती है, क्योंकि बुखार शरीर में तापमान को बढ़ाता है, और मूली एक ऐसी सब्जी है जिसकी तासीर ठंडी होती है. इसलिए मूली का उपयोग बुखार के तापमान को कम करने के लिए किया जाता है. बुखार में अक्सर चिकिस्तक मरीज को पानी पीने की सलाह देते है ताकि शरीर का तापमान कम हो सके, मूली का सेवन करने से बुखार के तापमान में बदलाव देखा जाता है. क्योंकि इसमें अच्छी मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते है, जो शरीर के तापनमान को कंट्रोल करने में सहायक होते है.
सिरदर्द की समस्या को दूर करने के लिए भी मूली का उपयोग किया जाता है.
मधुमेह को नियंत्रण करने में भी मूली का भी प्रयोग किया जाता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को मूली खाने की सलाह दी जाती है. क्योंकि मूली उनके शरीर के शुगर स्तर को कम करने में मदद करता है. शुगर स्तर कम होने से शरीर को इंसुलिन बनाने में सुविधा होती है. इंसुलिन से मधुमेह कंट्रोल में रहता है. मधुमेह के मरीज मूली ही नहीं बल्कि मूली के पत्तों का साग बनाकर भी सेवन कर सकते है क्योंकि इनकी पत्तियों में सामान पोषक तत्व मौजूद होते है जो मधुमेह को कंट्रोल करते है. चिकिस्तक भी मधुमेह के मरीजों को मूली का सेवन करने की सलाह देते है.
बालो के लिए भी मूली बहुत फायदेमंद होती है. जिस तरह लोगो के लिए चेहरा खूबसूरत होना आवश्यक है उसी तरह बालो का मजबूत होना बहुत जरुरी होता है. बालो से जुडी एक समस्या का लोगों को अक्सर सामना करना पड़ता है, जो है बालों के झड़ने की समस्या, जिसको कम करने के लिए मूली के रस का उपयोग किया जाता है. मूली के रस को बालो में लगाकर मालिश करके यदि 15 - 20 मिनट छोड़ दे, तो यह बालों को मजबूती प्रदान करता है. इसके बाद शैम्पू से बालो को अच्छी तरह धोना होता है, यह प्रयोग सप्ताह में दो बार करने से बालो की गिरने की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है, क्योंकि मूली का रस बालो की जड़ को मजबूत बनाने में मदद करते है. इस तरह मूली के प्रयोग से बाल मजबूत और चमकीले हो जाते है.
पीलिया के इलाज में भी मूली बहुत कारगर साबित होती है, पीलिया का बेहतरीन उपचार मूली को माना जाता है. इसमें कुछ ऐसे यौगिक होते है जो पीलिया के जोखिम को कम करते है. पीलिया होने पर इसके मरीज व्यक्ति को मूली के पत्तियों का साग खिलाया जाता है. मूली की पत्तिया पीलिया को बहुत जल्दी ठीक कर देती है. क्योंकि पीलिया फ्लू के कारण होता है, जो शरीर में संक्रमण फैलाता है और मूली में पाया जाने वाला विटामिन सी संक्रमण रोकता है. इसके अलावा यह शरीर की रोगप्रतीरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है.
स्किन के लिए मूली अच्छी मानी जाती है क्योंकि मूली में अच्छी मात्रा में पानी होता है जो त्वचा में नमी बनाये रखता है और त्वचा की झुर्रियों को कम करने में मदद करता है. कुछ शोधों के अनुसार मूली के बीज को दही में मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से मुँहासों की समस्या से निजात मिलती है और चेहरे के काले धब्बे भी कम होने लगते है. क्योंकि मूली में अच्छी मात्रा विटामिन सी व एंटीऑक्सीडेंट होता है.
मूली के अंदर बहुत अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट की सफाई और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है. जिन्हें कब्ज़, गैस या एसिडिटी जैसी दिक़्क़त रहती है, उनके लिए मूली किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं है. इसके साथ ही, मूली के रस को पीने से लीवर और पेट की कार्यक्षमता भी दुरुस्त होती है, जो शरीर के वजन को कम करने में भी सहायक होती है. क्योंकि मूली में फाइबर बहुत ज्यादा होता है और कैलोरी बेहद कम, जिससे इसका सेवन करने वाले को पेट भरा-भरा लगता है लेकिन शरीर में फैट नहीं बढ़ता. यही कारण है कि मूली की गिनती चुनिंदा वेट लॉस डाइटस में की जाती है.
मूली में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के खून को साफ करके शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकाकर उसको डिटॉक्स करने का काम करते हैं. इसीलिए जो लोग नियमित रूप से मूली खाते है उनकी स्किन ज्यादा ग्लोइंग और साफ दिखाई देती है.
इसके अलावा मूली में पाया जाने वाला पोटैशियम नामक मिनरल शरीर के ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है और साथ ही हार्ट हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है. इस प्रकार मूली दिल और ब्लड प्रेशर के लिए बहुत लाभकारी है.
मूली में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स मानव शरीर के कोलेस्ट्रॉल लेवल को बैलेंस करने में भी मदद करते हैं. मूली में मौजूद विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं. सर्दी-जुकाम के मौसम में मूली या मूली के पत्तों का सेवन करने से सांस की नलियों की सफाई होती है, जो जुकाम, खांसी व अस्थमा जैसी समस्याओं से राहत दिलाती है.
दांत और हड्डियों के लिए मूली में मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस बहुत फायदेमंद होता है. दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाकर मूली, जो लोग हड्डियों की कमजोरी या दांतों की समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, उन्हें बड़ी रहत देती हैं.
मूली का सेवन करने से शरीर में हॉरमोनल बैलेंस बना रहता है, जो थायरॉयड जैसी समस्याओं से निजात दिलाने में सहायक सिद्ध होता होता है. यही वजह है कि कई आयुर्वेदिक दवाइयों में मूली का प्रयोग किया जाता है.
इतने सारे बड़े फायदों के साथ मूली का सेवन करते समय एक विशेष बात का ध्यान रखना होता है, जो है इसके सेवन का समय. मूली के सेवन में समय कितना अधिक महत्वपूर्ण है इसका पता इस बात से चलता है कि मूली के सेवन के विषय में यह बात बहुत प्रचलित है कि सुबह को मूली मूल है, दोपहर को मूली धूल है, रात को मूली शूल है. जो मूली के सेवन के समय के अनुसार उसके प्रभाव का विवरण देती है.
सुबह को मूली मूल है, दोपहर को मूली धूल है, रात को मूली शूल है, इस कहावत के अनुसार मूली को हमेशा दिन में सुबह के समय खाना बेहतर होता है, तब यह मूली के मूल फायदे खाने वाले को प्रदान करती है, यानी सुबह को मूली मूल है.
दोपहर के समय मूली खाने के फायदे अपेक्षाकृत कम है इसीलिए कहा जाता है, दोपहर को मूली धूल है.
और यदि रात को मूली का सेवन किया जाये तो क्योंकि रात में खाने पर कुछ लोगों को इससे गैस या एसिडिटी की समस्या हो सकती है, इसलिए कहा जाता है रात को मूली शूल है, अतः रात के समय मूली का सेवन हानिकारक होता है. इसके अलावा थायरॉयड की समस्या से जूझ रहे लोगो को कहा जाता है, कि डॉक्टर की सलाह लेकर ही मूली का सेवन करें.
मूली का सेवन प्रमुख रूप से सलाद, पराठा, अचार, सब्ज़ी या मूली के रस के रूप में किया जाता है.
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