परशुराम जयंती श्री हरि विष्णु के छठे अवतार के रूप में जन्मे भगवान् परशुराम के जन्मोत्सव के उपलक्ष में मनाई जाती है. सन 2026 में परशुराम जयंती रविवार 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी.
भगवान परशुराम श्री हरी विष्णु का छठा अवतार माने जाते है. उनका जन्म सप्तऋषि में प्रथम भृगुश्रेष्ट महर्षि जमदग्नि के द्वरा पुत्रेष्टि यज्ञ के माध्यम से देवराज इंद्र के आशीर्वाद से माँ रेणुका के गर्भ से वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था.
उनका जन्म सतयुग में हुआ था उनके जन्म दिन के उपलक्ष्य में परशुराम जयंती मनाई जाती हे. जो आमतौर पर अप्रैल या मई महीने में आता है. उन्होंने पिता की आज्ञा पर अपनी माता का वध कर दिया था और 21 बार पृथ्वी को हैहेय वंशी क्षत्रियों से विहिन कर दिया था.
परशुराम जयंती हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भगवान विष्णु के छठे अवतार, परशुराम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. परशुराम को अक्सर क्रोधी ऋषि के रूप में दर्शाया जाता है, जिन्होंने कई युद्धों में भाग लिया और धर्म की स्थापना के लिए कई बार अधर्मी राजाओं और क्षत्रियों का नाश किया.
परशुराम जयंती का महत्व हमें बताता है कि भगवन परशुराम के जीवन से क्या क्या सीखना चाहिए, जो कि निम्नलिखित है.
परशुराम का जीवन धर्म और न्याय की स्थापना के लिए समर्पित था. उन्होंने अन्यायी राजाओं और क्षत्रियों के विरुद्ध युद्ध किया और धरती को उनसे मुक्त कराया. इस प्रकार, परशुराम जयंती उनके इस न्यायप्रिय और धर्मपरायण जीवन का उत्सव है.
वीरता और शक्ति के प्रतीक के रूप में भी परशुराम जयंती मनाई जाती है क्योंकि परशुराम को उनके पराक्रम और युद्ध कौशल के लिए जाना जाता है. वे शस्त्र विद्या में अत्यंत कुशल थे और उन्होंने अपने फरसे से कई युद्धों में विजय प्राप्त की.
वीरता के साथ ही आध्यात्मिकता और शिक्षा का संवर्धन भी परशुराम जयंती से सीखने को मिलता है, उन्होंने कई आश्रम स्थापित किए और शिक्षा के प्रसार में भी अहम भूमिका निभाई. उन्होंने वेदों और शस्त्रों की शिक्षा देकर समाज को ज्ञानवान बनाने का प्रयास किया.
परशुराम जयंती की पूजा-विधि निम्न प्रकार है -
परशुराम जयंती पर, उनके प्रेमी भक्त व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं. भगवान परशुराम की मूर्ति या चित्र की स्थापना कर उन्हें फूल, फल, तुलसी के पत्ते और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है. इस दिन उनकी कथाएं और भजन भी गाए जाते हैं.
परशुराम जयंती से धर्म की रक्षा के लिए सजग रहने और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा मिलती है. यह त्योहार भारतीय संस्कृति में न्याय और वीरता के महत्व को दर्शाता है.
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