nandi pratima aur pushkarnini jalasrota wala shree yaganti uma maheshwar mandir

नंदी प्रतिमा और पुष्‍कर्णिनी जलस्रोत वाला श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर

श्री यंगती उमा महेश्वर मंदिर रामायण काल का एक विचित्र मंदिर है, जो विज्ञान के नियमो से परे है. इस मंदिर में नंदी भगवान की मूर्ति का आकार इतना बढ़ गया, कि मंदिर के खम्बो को भी हटाना पड़ा.

आंध्र प्रदेश के कुरनूल में स्थित श्री यंगती उमा महेश्वर मंदिर अपने आप में कई अनोखी विशेषताएं रखता है.  मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां नंदी भगवान के बढ़ते आकार की वजह से रास्‍ते में पड़ रहे कुछ खंबों को हटाना पड़ गया था. एक-एक करके यहां नंदी जी के आस-पास स्थित कई खंबों को हटाना पड़ा.

15वीं शताब्‍दी में विजयनगर साम्राज्‍य के संगम वंश के राजा हरिहर बुक्का राय के द्वारा श्री यंगती उमा महेश्वर मंदिर बनवाया गया था. यह मंदिर हैदराबाद से लगभग 300 किलोमीटर और विजयवाड़ा से 360 किलोमीटर  दूर स्थित है. जो कि प्राचीन काल के पल्लव, चोला, चालुक्य और विजयनगर शासकों की परंपराओं का प्रतीक भी माना जाता है.

यहां भगवान शिव और माँ पार्वती अर्द्धनारीश्‍वर रूप में विराजमान हैं और मंदिर की प्रतिमा को अकेले एक पत्‍थर को तराशकर बनाया गया है. शिव मंदिर में नंदी महाराज होते ही है तो इस मंदिर में नंदी महाराज स्थित है. मगर उनकी प्रतिमा लगातार रहस्यमय तरीके से विशालकाय होती जा रही है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है. 

नंदी भगवान की प्रतिमा की आकृति में हर बीस साल में लगभग एक इंच की बढ़ोत्तरी हो जाती है और जिसके चलते मंदिर के कई स्तम्भों को हटाना भी पड़ गया है. कहते हैं कि इस नंदी प्रतिमा का मूल आकार बहुत छोटा था लेकिन समय के साथ जब इसकी आकृति लगातार बढ़ती गई तो पुरातन विभाग ने इस पर रिसर्च किया और शोध में पाया कि नंदी की प्रतिमा का निर्माण एक ऐसे पत्थर से किया गया है, जिसकी प्रवृत्ति विस्तार करने की होती है.

साथ ही यहां के स्‍थानीय लोग नंदी प्रतिमा में होने वाली इस बढ़ोतरी को एक कथा से जोड़कर बताते हैं कि एक समय जब अगस्‍त्‍य ऋषि तपस्‍या कर रहे थे, तो कौवे उनको आकर परेशान कर रहे थे. नाराज ऋषि ने शाप दिया कि वे अब यहां कभी नहीं आ सकेंगे. चूंकि कौए को शनिदेव का वाहन माना जाता है, इसलिए यहां शनिदेव का वास भी नहीं होता है.

श्री यंगती उमा महेश्वर मंदिर की एक खास बात और भी है कि यहां पुष्‍कर्णिनी नामक पवित्र जलस्रोत से हमेशा पानी बहता रहता है. यह कोई नहीं जानता कि साल के बारह महीनो इस पुष्कर्णिनी में पानी आता कहां से है. भक्‍तों का मानना है कि मंदिर में प्रवेश से पहले इस पवित्र जल में स्‍नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं.

Read more at headlineshunt :

  •     आशुतोष शर्मा का जीवन परिचय
  •     अदिति जेटली जडेजा वाइफ ऑफ अजय जडेजा
  •     ब्रज भूषण शरण सिंह का जीवन परिचय
  •     पलक सिधवानी का जीवन परिचय
  •     डॉ सी पी मैथ्यू का जीवन परिचय
  •     शिल्पा शिरोडकर का जीवन परिचय
  •     केवी कुटीर कुमार विश्वास का इको फ्रेंडली घर
  •     रिवाबा जडेजा वाइफ ऑफ सर रविंद्र जडेजा
  •     सपना चौधरी वाइफ ऑफ़ प्रवीण कुमार
  •     श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव और उसका महत्त्व
  •     प्रेमानंद जी महाराज श्री राधा जू के परम भक्त
  •     हनुमान भक्त महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार
  •     पितृ पक्ष में कौवें को खाना खिलाने का वैज्ञानिक महत्त्व
  •     आयुष बडोनी का जीवन परिचय
  •     अनसूया सेनगुप्‍ता एन एक्ट्रेस एंड प्रोडक्शन डिज़ाइनर