अरुंधति रेड्डी द ग्रेट इंडियन वूमन क्रिकेटर बेहतरीन आलराउंडर्स में गिनी जाती है वह दाएं हाथ से बल्लेबाजी करती है और दाहिने हाथ की मध्यम-तेज गेंदबाज भी है. अरुंधति रेड्डी की लाइफ स्टोरी संघर्ष, जुझारूपन, दृढ़ संकल्प, एक माँ के सपोर्ट और अपने सपनों को लगातार पूरा करने के लिए संकल्पित एक स्त्री शक्ति की है.
10 अप्रैल 1997 को हैदराबाद, तेलंगाना में जन्मी अरुंधति रेड्डी के क्रिकेटर बनने में उनकी माँ का अहम् योगदान है. भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेलना एक समय अरुंधति के लिए केवल एक खेल नहीं था, बल्कि उनकी और उनकी माँ का एक साझा सपना भी था. अरुंधति रेड्डी ने केंद्रीय विद्यालय पिकेट, सिकंदराबाद से अपनी स्कूलिंग की है.
अपनी माँ के लिए अरुंधति रेड्डी कहती है कि मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की हूँ, और मेरी माँ का मुझ पर विश्वास मेरे लिए कोचिंग जितना ही ज़रूरी था. मेरे बिना पूछे भी, वह मेरे दिल की बात जानती थीं और सदैव मेरे साथ खड़ी रहीं. इसी आत्मविश्वास ने मुझे चुनौतियों का सामना करने और निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया.
जब अरुंधति रेड्डी महज 12 साल की थी, तब अपने घर के पास वाली गली में क्रिकेट खेलने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक, उनका सफ़र समर्पण, लगन और अपनी माँ के अटूट सहयोग को दर्शाता है.
अरुंधति रेड्डी के बड़े भाई का नाम रोहित रेड्डी है और वही क्रिकेट के शुरूआती दौर में उनके क्रिकेट साथी हुआ करते थे.
उनकी माँ भाग्य रेड्डी ने ही क्रिकेट के प्रति अरुंधति रेड्डी के जुनून को पहचाना और हमेशा सुनिश्चित किया कि उन्हें इसे आगे बढ़ाने के अवसर मिलते रहे. भाग्य रेड्डी खुद एक स्पोर्ट्स पर्सन रही है और पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी है, हालांकि उन्होंने पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के चलते खेल छोड़ दिया था. लेकिन अपने जीवन से इस बड़े त्याग की वजह से ही भाग्य रेड्डी कभी नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी भी ऐसा करे.
एक मध्यमवर्गीय परिवार आने के बावजूद, रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियाँ बखूबी संभालते हुए, भाग्य रेड्डी ने अरुंधति का दाखिला एक क्रिकेट प्रशिक्षण केंद्र में कराया और उनके लिए एक टाइट डेली शेड्यूल तैयार किया, जिसके मुताबिक अरुंधति रेड्डी को वह सुबह 4 बजे मैदान पर ले जातीं थी. फिर आकर खाना बनातीं, स्कूल छोड़तीं और शाम को अभ्यास के लिए फिर से वापस क्रिकेट ग्राउंड पर ले जातीं थी. अरुंधति रेड्डी के सफल होने के लिए यह टाइट शेड्यूल सालों तक हर दिन रोज फॉलो किया गया था.
अरुंधति रेड्डी का क्रिकेट करियर हैदराबाद, तेलंगाना से शुरू हुआ, जहाँ तेज़ गेंदबाज़ी के प्रति उनके स्वाभाविक रुझान को उनके परिवार की सपोर्ट ने पोषित किया और राज्य की घरेलू क्रिकेट में मेहनत से उन्होंने निखारा. अपने खेल के शुरूआती दिनों में अरुंधति रेड्डी महान पूर्व भारतीय क्रिकेटर राहुल द्रविड़ से प्रेरित होकर एक विकेटकीपर बनना चाहती थीं. लेकिन, उनके कोच गणेश ने अरुंधति रेड्डी की गेंदबाजी की गति को पहचाना और उन्हें एक ऑलराउंडर के रूप में विकसित किया.
दाएँ हाथ की एक तेज़-तर्रार फ़ास्ट बॉलर, जिसने अपनी ऊर्जा, सटीकता और गेंद को स्विंग कराने की क्षमता के दम पर क्रिकेट जगत में अपनी प्रतिष्ठा बनाई. इन्ही खूबियों ने अरुंधति रेड्डी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई गेंद संभालने वाली उन चंद भारतीय महिला क्रिकेटर्स में से एक बना दिया जिन पर भरोसा किया जाता था. बहुत जल्दी अरुंधति की प्रतिभा निखर कर सामने आ गयी जब महज 15 साल की उम्र में, उन्हें हैदराबाद अंडर-19 टीम के लिए चुन लिया गया, और न केवल टीम के लिए चुना गया बल्कि अरुंधति रेड्डी ने एक कप्तान के तौर पर अपनी टीम का नेतृत्व भी किया.
अपने लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर पहले 2016-17 सीज़न तक हैदराबाद के साथ और बाद में स्टार खिलाड़ियों से सजी रेलवे टीम के साथ, अपने खेल के दम पर उन्होंने अंततः उभरती हुई भारतीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बनायी.
सन 2017 में अरुंधति रेड्डी को पहली बड़ी सफलता जब मिली जब पहले तो उन्हें भारतीय रेलवे टीम में शामिल किया गया, फिर उन्हें कोच नुशील अल कादिर का मार्गदर्शन मिला. फिर सन 2018 में, अरुंधति रेड्डी ने श्रीलंका के खिलाफ टी20 मैच से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने क्रिकेट करियर का आगाज किया था. फिर अपने दमदार प्रदर्शन से अगले कुछ वर्षों में, अरुंधति भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम का नियमित हिस्सा बन गई.
उन्होंने सन 2018 में अंडर-23 इंटर-जोनल टूर्नामेंट में चार मैचों में नौ विकेट लेकर अपने दमदार प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया. इसी प्रदर्शन ने उन्हें पहले श्रीलंका के खिलाफ टी20 श्रृंखला और बाद में टी20 विश्व कप टीम में जगह दिलाई.
इसके बाद भी उनको कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, एक समय नए गेंदबाज़ों के आने से, उन्होंने अस्थायी रूप से भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह खो दी थी, लेकिन हार न मानने वाले अपने जुझारू जज्बे को कायम रखते हुए अरुंधति केरल चली गईं, वहां कोच बीजू जॉर्ज की निगरानी में दो साल तक प्रशिक्षण लिया और मज़बूत होकर वापसी की.
2023 में महिला प्रीमियर लीग की शुरुआत हुई तो, अरुंधति रेड्डी दिल्ली कैपिटल्स की टीम का अहम हिस्सा बनी, जहां उन्होंने 17 पारियों में 14 विकेट लेकर सबका ध्यान आकर्षित किया. दिल्ली कैपिटल्स के साथ जुड़कर महिला प्रीमियर लीग में अपनी काबिलियत फिर से साबित की जिसके बाद डोमेस्टिक क्रिकेट और दिल्ली कैपिटल्स की फ्रैंचाइज़ी से जुड़कर अच्छे खेल से उन्हें वनडे टीम में भी जगह मिली.
लगभग छह साल तक क्रिकेट के छोटे प्रारूप टी 20 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बाद, उन्होंने जून 2024 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया. मौका मिलते ही अरुंधति रेड्डी ने खुद को साबित करते हुए केवल 9 मैचों में, 11 विकेट लिए, जिनमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी ही धरती पर तब तक का करियर का सर्वश्रेष्ठ 4/26 प्रदर्शन भी किया. इस मैच में उन्होंने फ़ोएबे लिचफ़ील्ड, जॉर्जिया वोल, एलिस पेरी और बेथ मूनी जैसी शीर्ष चार बल्लेबाज़ों को आउट किया था.
अरुंधति रेड्डी का प्रभाव केवल खेल प्रदर्शन और आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है. वह अक्सर मैदान पर ऊर्जा का केंद्र होती हैं, और पूरी टीम को को मोटीवेट रखती है. भारत के स्पिन-प्रधान आक्रमण में एक अथक नई गेंदबाज़ और जब भारत को सफलता की ज़रूरत होती है, उस समय का एक विश्वसनीय विकल्प है अरुंधति रेड्डी.
2025 में भारतीय अंतराष्ट्रीय टीम में वापसी करते हुए अरुंधति आईसीसी महिला विश्व कप की तैयारी कर रही भारतीय टीम का भी हिस्सा बनी. महिला विश्व कप टूर्नामेंट 2025 में अरुंधति रेड्डी भारत की सीनियर पेस कोर का अहम हिस्सा हैं, क्योंकि वह अनुशासित है, तेज है और आक्रामक है.
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