सन 1947 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद यहाँ की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई, तो भारत ने केंद्रीकृत योजना शुरू की जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं का ध्यान किया गया -
- जब सन 1952 में पहली पंचवर्षीय योजना लागू की गई, तो इसमें आधुनिक तकनीकी और वैज्ञानिक संस्थानों, अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रमों की स्थापना को उचित महत्व दिया गया.
- इन प्रयासों के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था क्योंकि पूंजी निर्माण की कमी, जनसंख्या में वृद्धि, रक्षा पर भारी व्यय और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे जैसी विकट स्थितियों के चलते उतनी तीव्र गति से विकसित नहीं हो सकी.
- जिसके परिणामस्वरूप भारत को विदेशी स्रोतों से उधार पर बहुत अधिक निर्भर होना पड़ा और अंततः 1991 में आर्थिक उदारीकरण पर सहमती देनी पड़ी.
- इस सबके बावजूफ भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी रही.
- भारत की बढ़ती आय, बचत निवेश के अवसर, घरेलू खपत में वृद्धि और युवा आबादी जैसे सकारात्मक विषयों से आने वाले दशकों में भारत का विकास सुनिश्चित माना जाता है.
- समय समय पर उन विकास क्षेत्रों की पहचान की जाती है, जिनकी दुनिया भर में तेजी से बढ़ने की संभावना है. फिर उनको मजबूत करने के प्रयास किये जाते है.
- मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और विदेशी व्यापार नीति की शुरूआत जैसी सरकारी योजनाओं ने बीच में निर्यात - आयात और व्यापार संतुलन के मामले में भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिली.
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