dharmik aur vaigyanik visheshtaon wala ped peepal

धार्मिक और वैज्ञानिक विशेषताओं वाला पेड़ पीपल

पीपल एक विशाल, पर्णपाती, तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष है, जिसकी ऊंचाई 30 मीटर तक होती है, इसका मुकुट फैला हुआ होता है और तना बहुत चौड़ा होता है, जिसका व्यास 3 मीटर तक होता है. पीपल का वृक्ष देखने में भव्य और सुन्दर होता है. पीपल को अश्वत्था नाम से भी जाना जाता है. हृदय के आकार की इसकी पत्तियां स्पष्ट रूप से लंबे सिरों वाली होती है.

पीपल का वृक्ष हिंदुओं धार्मिक मान्यताओं वाले लोगों के सबसे पवित्र वृक्षों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि हिंदू त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर) इसी वृक्ष में निवास करते हैं. पीपल को शाश्वत जीवन का वृक्ष भी कहा जाता है. भगवान श्री कृष्ण ने भी भगवद् गीता में कहा है, वृक्षों में मैं पीपल हूं. गौतम बुद्ध ने भी पीपल के वृक्ष के नीचे ही ज्ञान प्राप्त किया था. जैन तीर्थंकर अनंतनाथ जी को भी पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था. पीपल का वृक्ष कल्पवृक्षों में से भी एक है. पीपल का वृक्ष पंचवटी वृक्षों के समूह में भी आता है.

देव तुल्य रूप वाले पितरों के लिए भी पीपल वृक्ष की पूजा अत्यंत लाभकारी होती है. धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, विशेष रूप से पितृ पक्ष, श्राद्ध काल या अमावस्या के दिनों में पितर पीपल के पेड़ पर निवास करते हैं. इसलिए प्रतिदिन अथवा पितृ पक्ष या अमावस्या को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने से पितृ तृप्त होते हैं. शाम के समय पीपल के नीचे संध्या का दीपक जलाने से भी पितरों के मार्ग का अंधकार दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है. संकट या बाधाओं से मुक्ति के लिए पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करने और पितरों से प्रार्थना करने का भी एक प्रसिद्ध विधान है. पितृ दोष शांति: नियमित रूप से पीपल की सेवा और पूजा करने से जन्म कुंडली का पितृ दोष भी शांत होता है.

आदि जगन्नाथ मंदिर के पीपल के पेड़ के रूप में भगवान विष्णु पुलावर, कलावर और कनुवर ऋषियों के सामने प्रकट हुए थे. यह आदि जगन्नाथ मंदिर, थिरुपुल्लानी, रामनाथपुरम जिला, तमिलनाडु में स्थित है.

 भगवान शिव ने पेरूर पट्टीश्वरर मंदिर के प्रसिद्ध पीपल के पेड़ के नीचे तांडव नृत्य किया था. जो कि पेरूर पट्टीश्वरर मंदिर, कोयंबटूर जिला, तमिलनाडुमें स्थित है.

गुरुद्वारा पिपली साहिब में भी एक प्रसिद्ध पीपल का पेड़ है.

पीपल के पेड़ को पुष्य नक्षत्र से सम्बंधित माना जाता है. धनु राशि से भी पीपल के पेड़ का संबद्ध माना जाता है. गुरु ग्रह और बृहस्पति देव से भी पीपल के पेड़ का सम्बन्ध है.

तेजी से बढ़ने वाला यह पीपल का वृक्ष बिहार और हरियाणा राज्य का राजकीय वृक्ष भी है.

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