सम्राट चौधरी भारतीय राजनीती के धुरंधर नेता माने जाते है. 15 अप्रैल 2026 को वह पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने और उन्होंने बिहार के 24 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उतार चढ़ावों से भरा उनका राजनीतिक उनकी परिपक्वता और कामयाबी का कारण है. सम्राट चौधरी ने 1990 में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी, उनको पहली बड़ी कामयाबी 1999 में लालू की पत्नी राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री बनने पर मिली थी.
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवम्बर 1968 को लखनपुर मुंगेर बिहार में हुआ था. उन्हें गुलु नाम से भी जाना जाता है.
इसके बाद वह सन 2014 में नीतीश के नेतृत्व वाली पार्टी जेडीयू में शामिल हुए लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बहुत ख़राब रहा जिसकी जिम्मेदारी खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लेते हुए मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया, और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया इसी मंत्रिमंडल में सम्राट चौधरी भी प्रमोट किये गए और मंत्री बने.
फिर सन 2017 में हवा का रुख भांपते हुए सम्राट चौधरी भाजपा में शामिल हुए. जहां लगभग एक दशक तक कड़ी मेहनत करते हुए 2025 की भाजपा-जेडीयू की बिहार विधानसभा चुनाव जीत का सम्राट चौधरी सूत्रधार बने, जिसके फलस्वरूप उन्हें दो उपमुख्यमंत्रियों में से एक के रूप में गृह मंत्रालय का प्रभार भी मिला, और इस तरह वह नितीश सरकार में नंबर 2 बन गए.
हालांकि कुछ ही समय पश्चात नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की घोषणा कर दी, जिसके बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊपर था. जो कि सही साबित हुआ जब सम्राट चौधरी 14 अप्रैल 2026 को बिहार के पहले भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बने.
सम्राट चौधरी राजनीति की बड़ी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रहे है,उनके पिता, शकुनी चौधरी, सेना में कार्यरत थे और बाद में राजनीति में आकर कांग्रेस से राजनीतिक पारी शुरु करके लालू प्रसाद और नीतीश कुमार जैसे अपने दोस्तों और दुश्मनों के बीच अक्सर अपनी निष्ठा बदलते हुए राजनीती करते रहे.
सन 1985 में शकुनी चौधरी पहली बार तारापुर से बिहार विधानसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गए थे, इसी विधानसभा सीट से अब सम्राट चौधरी चुनाव लड़ते है. इसके बाद शकुनी चौधरी ने सन 1990 में कांग्रेस के टिकट पर उसी सीट से जीत हासिल की, फिर समता पार्टी, उसके बाद आरजेडी और बाद में शकुनी चौधरी पूर्व जेडीयू मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा में भी शामिल हुए. जिसके बाद अंततः उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया, हालांकि इसके बाद शकुनी चौधरी अक्सर भाजपा के कार्यक्रमों में दिखाई देते रहे.कुल मिलाकर शकुनी चौधरी ने सन 1985 से 2010 के बीच छह बार तारापुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें महिला आरक्षित सीट होने पर उनकी पत्नी और सम्राट चौधरी की मां, पार्वती देवी भी तारापुर से विधायक रही हैं.
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