annamalai kuppusamy from administration to politics

अन्नामलाई कुप्पुसामी एडमिनिस्ट्रेशन से पॉलिटिक्स तक

अन्नामलाई कुप्पुसामी दक्षिण भारत के एक युवा गतिशील, ऊर्जावान, कड़ी मेहनत करने वाले नेता हैं, जिनमें काफी संभावनाएं हैं. अन्नामलाई कुप्पुसामी पहले एक आईपीएस अफसर थे और उन्हें कर्नाटक का सिंघम भी कहा जाता था. वह सिविल सर्विस छोड़ कर अपने राज्य तमिलाडु को आगे ले जाने के लिए राजनीती में आये है.

हालांकि उनकी राह आसान नहीं है और भाजपा को द्रविड़ पार्टी के विकल्प के तौर पर स्थापित करने के लिए उन्होंने बहुत प्रयास किये. तमिलनाडु की राजनीती में सन 1971 के चुनावों के बाद से, दो द्रविड़ पार्टियों (द्रमुक और अन्नाद्रमुक) का ही राज्य की राजनीति पर वर्चस्व रहा है और एक समय पर  शक्तिशाली रही कांग्रेस राज्य में तीसरी पार्टी रही है. राज्य में भाजपा का कभी कोई आधार नहीं रहा और भाजपा ने अतीत में तमिलनाडु में जब सीटें जीती तो इन दो द्रविड़ पार्टियों के साथ गठबंधन में ही जीती थी. कन्याकुमारी क्षेत्र को छोड़कर राज्य में भाजपा का कभी कोई गढ़ नहीं रहा.

तमिलनाडु में स्टालिन द्रमुक के निर्विवाद नेता के रूप में उभरे, लेकिन जे जयललिता की मृत्यु के बाद अन्नाद्रमुक फिर भी एक स्थापित पार्टी नहीं रही, लेकिन फिर भी, एआईएडीएमके के पास तमिलनाडु में बहुत बड़ा आधार है और भाजपा के लिए अन्नाद्रमुक के विकल्प के रूप में उभरना हल फिलहार लगभग असंभव ही है. जिसके लिए अन्नामलाई ने पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की बहुत कोशिश की.

अन्नामलाई कुप्पुसामी का लक्ष्य था कि हर विधानसभा में भाजपा के लोग हो और हर बूथ तक भाजपा कार्यकर्ता जाये. वह राज्य में भाजपा की जमीनी स्तर पर उपस्थिति बनाने के प्रयास करते रहे हैं, जहां उन्हें दो विशाल संगठनों का सामना करना पड़ा है और कांग्रेस जैसी अन्य पार्टियों का भी तमिलनाडु में प्रभाव है. और किसी संगठन को शुरू से बनाने में आमतौर पर बहुत समय लगता है और सफलता की कोई गारंटी भी नहीं होती है. लेकिन अन्नामलाई बहुत मेहनत कर रहे है.

अन्नामलाई तुरंत में तमिलनाडु में गेम चेंजर नहीं होंगे, लेकिन अगर वह धीरे धीरे ही सही अपना जनाधार बढ़ाते हैं तो यह के अन्नामलाई के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी. अन्नामलाई कुप्पुसामी एक युवा राजनेता नहीं हैं और उनके पास काफी समय है. अमित शाह तमिलनाडु में जा कर कह ही चुके है कि भविष्य में एक तमिल भाषी नेता भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है और शायद उनका इशारा अन्नामलाई कुप्पुसामी की तरफ ही था. तो हो सकता है कि आने वाले दशकों में अन्नामलाई भारत के बड़े नेताओं की श्रेणी में शामिल हो जाये और फिर कुछ भो हो सकता है. जब एक तमिल भाषी नेता उत्तर प्रदेश या बिहार में अपनी पार्टी के लिए स्टार प्रचारक बनेगा तो भारत का लोकतंत्र और मजबूत होगा. गुजरात से आने वाले मोदी तो पहले ही यह कर चुके है और आने वाले दशकों में शायद यही उम्मीद अन्नामलाई से रहेगी. 

हालांकि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एक अप्रत्याशित बड़ा उलटफेर करते हुए जब थलापति विजय ने अपनी नयी पार्टी टीवीके से राज्य की पुरानी स्थापित दोनों बड़ी पार्टीयों द्रमुक और अन्नाद्रमुक को परास्त करते हुए मुख्यमंत्री के पद तक का सफर तय किया तो इसने अन्नामलाई कुप्पुसामी को अभी अपने राजनीतिक जीवन का पुनर्निरीक्षण करने का विचार दिया. जिस पर मंथन के बाद अन्नामलाई कुप्पुसामी ने थलापति विजय के नक़्शे कदम पर चलते हुए, 2 जून 2026 को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्य्ता से इस्तीफ़ा दे दिया और टीवीके की तर्ज पर ही तमिलनाडु में एक और नयी पार्टी का निर्माण करने का निर्णय लिया.   

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