amratv ka rahasya aur sikandar

अमरत्व का रहस्य और सिकंदर

भारत देश एक वृहद धर्म संस्कृति विविधताओं से भरा देश है, आज का विज्ञान और रिसर्च जिन विषयों को अब खोज रहा है. वह भारत के महान संत, मुनि, ऋषियों ने अनेको वर्ष पहले खोज लिया था, जिसके प्रमाण समय समय पर मिलते रहते है. 

ऐसा ही एक विषय है अमरता, इस संसार में आज हर कोई अमर होना चाहता है, जिसके लिए मनुष्य कुछ भी करने को तैयार रहता है. लेकिन अमर होने करीब पहुँच कर भी शरीर की नश्वरता को मानना ही पड़ता है. माना जाता है कि हिन्दुकुश पर्वत जो आज अफगानिस्तान में है, इस पर्वत  पर एक ऐसा झरना बहता है, जिसमे अमरता का रहस्य छिपा है. 

इसी खोज में अमर होने का सपना लेकर विश्व विजेता सिकंदर हिन्दुकुश पर्वत पर पहुंचा था, जहाँ पर उसकी मुलाकात एक योगी से हुई, उसने योगी को बहुत सारी धन संपत्ति का लालच दिया तथा उससे अमरता का रहस्य पूछा. क्योकि सिकंदर ने सुन रखा था कि भारत के योगी हजारों सालों तक जीवित रहते हैं तथा वे अमरत्व पा चुके हैं. 

सिकंदर के प्रलोभन पर योगी महाराज ने मुस्कुराते हुए उसकी सारी धन संपत्ति ठुकरा दी और बोले यह सब उसके लिए बेकार की चीज है. इसके बाद सिकंदर ने योगी को मृत्यु का भय दिखाया, जिस पर योगी जी बोले भारतीय संतो को मौत का कोई भय नहीं होता है, तुम जो चाहो कर सकते हो, यह सुनकर सिकंदर योगी से विनती करने लगा, तब योगी ने कहा कि सिकंदर यदि तुम अमरता पाने के लिए इतने ही व्याकुल हो, तो सुनो, सामने जंगल में जो यह रास्ता जा रहा है, आगे जाकर एक गुफा पर पहुंचेगा, उस गुफा में तुम्हें एक छोटा सा जलकुंड मिलेगा, उस जलकुंड से पानी पीकर तुम अमर हो जाओगे.

सिकंदर तुरंत योगी की बताई गुफा की खोज में निकल पड़ा, काफी दिनों तक भटकने के बाद आखिर उसने उस गुफा को खोज कर निकाल लिया तथा वह अकेला ही गुफा में घुसा. जलकुंड से पानी लेकर वह पीने ही वाला था कि तभी एक कौवे ने उसे रोका और  कहा, सिकंदर, तुम महान नहीं मूर्ख हो, कौवे ने कहा कि उसने भी अमर होने की चाह में इस कुंड का पानी पी लिया था. उसके बाद वह चाह कर भी मर नहीं पा रहा है. 

मेरे सभी यार दोस्तों की कई पीढ़िया तक मर चुकी है तथा मै बस अकेला पागलो की तरह भटक रहा हूँ. अब मै इस जीवन से ऊब चुका है लेकिन, अमरता का जल पीने के बाद मुझे मौत नहीं आ रही है. उसने सिकंदर से कहा कि वह इस जल को पीने से पहले एक बार जरूर सोच ले.

कौवे की सलाह पर सिकंदर ने काफी सोच विचार किया और अचानक ही उस जल कुंड से दूर भाग गया. उसने समझ लिया था कि एक समय के बाद यह अमरता भी उसके लिए बोझ बन का जाएगी.

अतः हम समझ सकते है कि भारत के योगी महापुरुष बौद्धिकता की पराकाष्ठा से परे जा चुके थे. 

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