यशस्वी जायसवाल इंडियन क्रिकेट वर्ल्ड का वो चमकता सितारा है जिसकी जीवन यात्रा कठिन संघर्षों से भरी है. क्रिकेटर बनने के लिए यशस्वी जायसवाल ने कभी मैदान के बाहर गोलगप्पे बेचे तो कभी दूसरी टीमों की गुम बॉल तलाशने जैसे काम भी किये.
भारतीय क्रिकेट का ये वो युवा लेफ्टी बल्लेबाज है, जो भारत के लिए अंडर -19 में मुंबई की ओर से खेलते हुए महज 17 साल की उम्र में सुर्ख़ियों में आ गया था. दरसअल यशस्वी जायसवाल पहली बार अक्टूबर 2019 में तब सुर्ख़ियों में आये जब प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उस समय के दोहरा शतक बनाने वाले दुनिया के सबसे युवा क्रिकेटर बने.
इसके बाद आईपीएल 2020 के ऑक्सन में राजस्थान रॉयल्स की फ्रेंचाइजी ने उन्हें 2.4 करोड़ में खरीदा.
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से आने वाले यशस्वी जायसवाल का सुरियावां नगर में घर हैं. एक साधारण परिवार से आने वाले यशस्वी जायसवाल के पिता भूपेंद्र जायसवाल भदोही में ही पहले पेंट की एक छोटी सी दुकान चलाते थे. भूपेंद्र कहते थे कि बेटे ने मेरा सपना पूरा कर दिया. कभी जो लोग मुझे पागल कहा करते थे, वो आज मेरे साथ में फोटो खिंचवाते हैं. जो लोग कहते थे कि बेटे के पीछे तुम भी बर्बाद हो जाओगे, आज वही लोग न्यूज़ पेपर हाथों में लेकर आते हैं और फक्र से कहते हैं, मोंटी हमारा बच्चा है.
बचपन से ही क्रिकेटर बनने का जुनून पाले यशस्वी जायसवाल ने 10 साल की उम्र में अपने पिता से मुंबई जाने की जिद की तो पिता भूपेंद्र ने भी बेटे की काबिलियत और टैलेंट को समझते हुए उसे नहीं रोका बल्कि सपोर्ट किया और मुंबई के वर्ली में रहने वाले एक रिश्तेदार संतोष के यहां यशस्वी जायसवाल को भेज दिया. वर्ली में रहते हुए यशस्वी जायसवाल 5-6 महीने वहीं रहे और वहां से आजाद मैदान प्रैक्टिस करने जाते थे. लेकिन, क्योंकि रिश्तेदार का घर छोटा था और सबकी अपनी भी समस्याएं होती ही है तो वहां लंबे समय तक रह पाना संभव नहीं था.
यशस्वी जायसवाल शुरू में आजाद मैदान में नहीं पहुंच सके और कई महीने तक वह ग्राउंड के बाहर ही दूसरे बच्चों के साथ खेलते रहे. मैदान में नेट तक नहीं पहुंच सके जिसके बाद रिश्तेदार संतोष ही यशस्वी जायसवाल को आजाद ग्राउंड ले गए और वहां पर एक परिचित ग्राउंडमैन सुलेमान से बात करके यशस्वी को वहीं पर प्रैक्टिस और रहने की भी व्यवस्था करवाई. मुंबई के आजाद मैदान में लगभग तीन साल तक रहते हुए यशस्वी जायसवाल क्रिकेट की बारीकियां सीखीं और एक टेंट में रहकर अपने सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष किया. इसी दौरान एक समय ऐसा भी आया जब यशस्वी जायसवाल को आज़ाद मैदान के बहार पानीपुरी भी बेचना पड़ा.
कर्नाटक के अलूर में खेली गयी, भारत के प्रथम श्रेणी क्रिकेट की प्रीमियर वनडे विजय हजारे ट्रॉफी प्रतियोगिता 2019 के मुंबई और झारखंड के एक दिवसीय मुकाबले में यशस्वी जयसवाल ने दोहरा शतक जड़ा. यशस्वी जयसवाल ने सिर्फ 154 गेंदों पर 17 चौके और 12 छक्कों की मदद से 203 रन ठोक डाले. तब वनडे क्रिकेट में सबसे कम उम्र में दोहरा शतक लगाने वाले यशस्वी जयसवाल दुनिया के पहले बल्लेबाज बने थे.
इसके बाद आईपीएल में भी अपनी धमाकेदार परियों से यशस्वी जायसवाल ने सभी का ध्यान अपनी और खींचा.