vishnu dev sai master of chhattisgarh politics

छत्तीसगढ़ के राजनीतिक पुरोधा विष्णु देव साय

विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्र सरगुजा के जशपुर जिले के एक छोटे से गांव बगिया से आते हैं. किसान परिवार में जन्में विष्णु देव साय को राजनीति विरासत में मिली है. उनके दादा स्वर्गीय बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक मनोनीत विधायक रहे तो विष्णु देव साय के ताऊ स्वर्गीय नरहरि प्रसाद साय जनसंघ के समय से 1962-67 और 1972-77 के कार्यकालों में विधायक रहे तथा 1977-79 के कार्यकाल में सांसद बने. इसी कार्यकाल में नरहरि प्रसाद साय जनता पार्टी सरकार में राज्य मंत्री बनाये गए थे. विष्णु देव साय के दूसरे ताऊ जी केदारनाथ साय भी जनसंघ से 1967-72 में तपकारा के विधायक बने थे.

भारतीय जनता पार्टी में महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर कार्य करने के साथ ही परिवार की समृद्ध राजनीतिक विरासत, केंद्रीय मंत्री से लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद तक महत्वपूर्ण विभागों को संभालने के बाद भी, विष्णु देव साय अपनी विनम्रता, सरल स्वभाव, काम के प्रति समर्पण और लक्ष्यों को प्राप्त करने के संकल्पशक्ति के लिए पहचाने जाते हैं.

विष्णु देव साई ने सरगुजा में राजनीति का ककहरा सीखा, इस क्षेत्र को पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का राजनीतिक गढ़ और छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख स्विंग क्षेत्र माना जाता है. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में, भाजपा ने इस क्षेत्र की सभी 14 सीटें जीतीं जो विष्णु देव साई को प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक ले जाने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई.

विष्णु देव साय ने प्रारंभिक शिक्षा कुनकुरी के एक सरकारी स्कूल से ली और फिर स्नातक करने के लिए अंबिकापुर चले गए. मगर 1988 में पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वापस अपने गांव लौट आए और 1989 में वह अपने गांव बगिया की ग्राम पंचायत के पंच बने फिर 1990 में विष्णु देव साय बगिया ग्राम पंचायत से निर्विरोध सरपंच चुने गए. इसी वर्ष विष्णु देव साय को दिग्गज भाजपा नेता दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव का सहयोग मिला जिन्होंने विष्णु देव साय को राज्य की राजनीती में प्रवेश दिला दिया और 1990 विधानसभा चुनाव में विष्णु देव साय ने अविभाजित मध्य प्रदेश में जशपुर जिले की तपकरा सीट से भारतीय जनता पार्टी  के टिकट पर चुनाव जीतकर अपनी राजीतिक पारी की शुरुआत की. फिर सन 1993 के विधानसभा चुनाव में भी विष्णु देव साय तपकरा से जीतकर विधायक बने. मगर तीसरी बार विष्णु देव साय जब 1998 में अपनी सीट बदलकर निकटवर्ती पत्थलगांव सीट से चुनाव लड़े तो वह चुनाव हार गए. लेकिन यह हार शायद विष्णु देव के लिए कुछ बड़ा लेकर आने वाली थी और एक साल बाद जब वह 1999 में लोकसभा चुनाव लडे तो सरगुजा का यह आदिवासी लाल भारतीय संसद का सदस्य बन गया. इसके बाद विष्णु देव साय सरगुजा में, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार चार बार रायगढ़ से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने. 

हालांकि विधायकी और पत्थलगांव सीट का विष्णु देव साय से छत्तीस का आंकड़ा रहा क्योंकि सन् 2000 में छत्तीसगढ़ अलग राज्य बन गया और भाजपा ने विष्णु देव साय को 2003 और 2008 के विधानसभा चुनावों में पत्थलगांव सीट से चुनाव लड़ाया, मगर नतीजा वही था जो 1998 में था.

2014 में जब भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय राजनीती में मोदी युग की शुरुआत की तो 2014 की मोदी सरकार में विष्णु देव साय को इस्पात और खनन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गयी. 2018 में जब पार्टी छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हार गयी तो विष्णु देव साय को 2019 में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ाया गया और विष्णु देव साय भाजपा के उन 10 सिटिंग सांसदों में से एक एक थे, जिन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में चुनाव नहीं लड़ाया गया था. 

लेकिन शायद भारतीय जनता पार्टी विष्णु देव साय के लिए कुछ बड़ा सोच रह थी और उनके संगठनात्मक कौशल को केंद्रीय नेतृत्व भलीं भांति जानता था इसीलिए 2018 में राज्य में भाजपा की हार के बाद पार्टी को फिरसे मजबूत करने के लिए विष्णु देव साय को 2020 में छत्तीसगढ़ में पार्टी अध्यक्ष बनाया गया. उनके पास इस पद पर 2006 से 2010 तक और फिर जनवरी-अगस्त 2014 तक कार्य करने का अनुभव था तो इस बार भी उन्होंने आशा के अनुरूप काम किया और नयी जिम्मेदारी के लिए विष्णु देव साय को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक एक साल पहले 2022 में अध्यक्ष पद से मुक्त करके ओबीसी नेता अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. 

चुनावों से पहले, विष्णु देव साय को जुलाई 2023 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य नामित किया गया. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में विष्णु देव साय को जशपुर जिले की कुनकुरी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया, जहां उन्होंने कांग्रेस के सिटिंग ऍम एल ए यू डी मिंज को 25,541 वोटों के भारी अंतर से हराकर जीत दर्ज की.

और जैसा तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान कुनकुरी निर्वाचन क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए वहां के मतदाताओं से विष्णु देव साय के लिए समर्थन मांगा था तो वादा किया था कि अगर भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ की सत्ता में वापसी करती है तो साय को बड़ा आदमी बना दिया जाएगा.

राज्य की आबादी में आदिवासियों की संख्या लगभग 32 फीसदी है तथा सरगुजा क्षेत्र के जशपुर जिले से आने वाले विष्णु देव साय भाजपा की कार्ययोजना में बिल्कुल फिट बैठते हैं. आदिवासी राज्य में ओबीसी के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूह है.

एक गुमनाम गांव के सरपंच के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले अनुभवी आदिवासी नेता विष्णु देव साई को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में बम्पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने राज्य का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। 2023 में जब विष्णु देव साई को छत्तीसगढ़ का मुख्यमत्री बनाया गया तो उनके पास दो बार विधानसभा सदस्य और चार बार के लोकसभा सदस्य होने का लम्बा राजनीतिक अनुभव था.

विष्णु देव साई की यह नियुक्ति उनके प्रभुत्व को और मजबूत करने और जीत का एक पुरस्कार प्रदान करने का प्रयास है. दक्षिण में बस्तर के आदिवासीयो को भी विष्णु देव साई की छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद पर इस नियुक्ति से खुशी मिली.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद अपनी नियुक्ति के बाद विष्णु देव साई ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, मुख्यमंत्री के रूप में, मैं अपनी सरकार के माध्यम से मोदी की गारंटी को पूरा करने का प्रयास करूंगा इससे उनका तात्पर्य भाजपा द्वारा 2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव पूर्व किये गए वादों से था. साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने कहा कि मेरी सरकार की आवास योजना के लाभार्थियों के लिए 18 लाख घरों को मंजूरी देना पहली प्राथमिकता होगी।

विष्णु देव साई ने खुद को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री चुने जाने पर कहा कि उन्हें गुमनाम रूप से चुना गया और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा मुझ पर किये गए भरोसे के लिए आभारी हैं.

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