गणेश चतुर्थी पर्व का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है, गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान् श्री गणेश के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है. यह त्योहार विशेष रूप से भारत के महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश, और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.
यह पर्व हिंदी कैलेंडर के भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी के दिन भगवान् श्री गणेश की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है और 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी पर भगवान् श्री गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में भी जाना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान् श्री गणेश की पूजा करना बहुत शुभ होता है ताकि कार्य बिना किसी विघ्न के पूरा हो सके.
भगवान् श्री गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है. गणेश चतुर्थी का यह पर्व व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर धूमधाम से मनाया जाता है और लोग उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा भावना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं.
प्राचीन सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार, गणेश जयंती के दिन चंद्रमा को देखना निषिद्ध माना जाता है, जो व्यक्ति इस दिन चंद्रमा को देखता है, वह मिथ्या दोष यानि गलत आरोप लगने का कष्ट पाता है. कहा जाता है कि भगवान् श्री कृष्ण पर समयंतक मणि चुराने का मिथ्या आरोप गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन के बाद ही लगा था.
गणेश चतुर्थी पर भगवान् श्री गणेश की पूजा का विशेष विधान होता है. इस दिन लोग अपने घरों में भगवान् श्री गणेश की प्रतिमा की स्थापना करते हैं और विधिपूर्वक पूजा करते हैं.
इस दिन सबसे पहले पूजा के शुभ मुहूर्त में भगवान् श्री गणेश जी की प्रतिमा को घर में या सार्वजनिक मंडप में स्थापित किया जाता है. इसके बाद भगवान् श्री गणेश को पंचामृत से स्नान आदि कराया है तथा माथे पर तिलक लगाते है. उन्हें वस्त्र, जनेऊ, चंदन, दूर्वा, अक्षत, धूप, दीप, शमी पत्ता, पीले पुष्प और फल चढ़ाया जाता है, इसके बाद आरती की जाती है तथा भगवान् श्री गणेश को मोदक, लड्डू, फल और अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है. मोदक श्री गणेश जी को अति प्रिय होता है.
गणेश चतुर्थी के दसवें दिन अनंत चतुर्दशी को श्री गणेश विसर्जन किया जाता है. इस दिन भक्तजन गणेश प्रतिमा का विसर्जन नदी, तालाब या झील में करते हैं. विसर्जन के समय भक्त गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना के जयकारे लगाते हुए विदाई करते हैं.