तुलसी विवाह कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष में आने वाली देव उठनी एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि को मनाया जाता है. तुलसी विवाह पर्व का हिन्दू धर्म में एक विशेष महत्त्व है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति तुलसी विवाह कराता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते है.
तुलसी विवाह पूजन सामग्री
एक तुलसी का पौधा, शालिग्राम जी (पत्थर रुपी ), कलश, पानी वाला नारियल, पूजा के लिए लकड़ी की चौकी, लाल रंग का कपड़ा, 16 श्रृंगार की सामग्री (जैसे चूड़ियां, बिछिया, पायल, सिंदूर, मेहंदी, कागज, कजरा, हार, आदि, फल और सब्जियां (आंवला, शकरकंद, सिंघाड़ा, सीताफल, अनार, मूली, अमरूद आदि), हल्दी की गांठ, पूजन सामग्री (जैसे कपूर, धूप, आम की लकड़ियां, चंदन आदि))
तुलसी विवाह की संपूर्ण विधि
देवउठनी एकादशी के दिन जो लोग तुलसी विवाह करते हैं, जिन्हें कन्यादान करना होता है उन्हें इस दिन व्रत जरूर करना चाहिए.
इसके बाद शालिग्राम जी की ओर से पुरुष वर्ग और तुलसी माता की तरफ से महिलाओं को इकट्ठा होना होता है. शाम के समय दोनों पक्ष तैयार होकर विवाह के लिए एकत्रित होते हैं.
तुलसी विवाह के लिए सबसे पहले घर के आंगन में एक चौक सजाया जाता है. फिर रंगोली बनाई जाती है, और उस पर चौकी स्थापित की जाती है.
इसके बाद तुलसी जी के पौधे को बीच में रखकर तुलसी माता को अच्छी से तैयार करना चाहिए. उन्हें लाल रंग की चुनरी, साड़ी या लहंगा पहनाएं चूड़ियां आदि से उनका श्रृंगार करें. जहां पर तुलसी माता को विराजमान किया गया हैं वहां पर गन्ने से मंडप बनाएं.
इसके बाद अष्टदल कमल बनाकर चौकी पर शालिग्राम जी को स्थापित करके उनका श्रृंगार करें.
फिर कलश की स्थापना करें, सबसे पहले कलश में पानी भर लें उसमें कुछ बूंद गंगाजल की डालें. फिर आम के 5 पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर कलश पर स्थापित करें. फिर एक चौकी पर शालिग्राम जी को विराजमान करें. शालिग्राम जी को तुलसी जी के दाएं तरफ रखना होता है.
अब घी का दीपक जलाएं और ॐ श्री तुलस्यै नम: मंत्र का जप करें. शालिग्राम जी और माता तुलसी पर गंगाजल का छिड़काव करें.
इसके बाद शालिग्राम जी पर दूध और चंदन मिलाकर तिलक करें तथा माता तुलसी को रोली का तिलक करें.
इसके बाद पूजन सामग्री जैसे फल, फूल, मेवे आदि सब शालिग्राम जी और तुलसी माता को अर्पित करें.
अब सभी पुरुष शालिग्राम जी को अपनी गोद में उठा लें और महिलाऐं माता तुलसी को उठा लें. फिर तुलसी माता की 7 बार परिक्रमा कराएं. इस दौरान बाकी सभी लोग मंगल गीत गाए और कुछ लोग विवाह के विशेष मंत्रों का उच्चारण करें. मंत्रों के उच्चारण में कोई गलती नहीं होनी चाहिए.
अंत में शालिग्राम जी और तुलसा माता दोनों को खीर पूड़ी का भोग लगाएं. अंत में माता तुलसी और भगवान श्री शालिग्राम जी की आरती उतारें. फिर अंत में सभी लोगों को प्रसाद वितरित करें.
तुलसी विवाह से जुड़ी पौराणिक कथा -
एक बार भगवान शिव ने अपने तीसरे नेत्र की क्रोध अगनि को समुद्र में फेक दिया, जिससे समुद्र के जल में एक बहुत ही तेजस्वी बालक का जन्म हुआ. जल में पैदा होने के कारण इस बालक का नाम जालंधर पड़ा, आगे चलकर यह बालक एक पराक्रमी दैत्य राजा बना और इसने अपनी राजधानी का नाम भी जालंधर रखा. जालंधर ने सुर, असुर सब पर विजय प्राप्त कर ली.
जालन्धर की पत्नी का नाम वृंदा था, जो दैत्य राज कालनेमी की पुत्री थी और वृंदा विष्णु भगवान की परम भक्त थी तथा अत्यधिक पतिव्रता स्त्री थी. वृंदा के सतित्व के कारण ही जालंधर का वध करना आसान नहीं था और न ही उसे हराना आसान था.
एक दिन जालंधर की नजर माता पार्वती पर पड़ी तथा उनका रूप देखकर जालंधर उन पर मोहित हो गया. माता पार्वती को अपने साथ ले जाने के लिए उसने अपने निर्माता भगवान शिव को ही युद्ध के लिए ललकार दिया. युद्ध में जालंधर का वध करना भगवान शिव के लिए भी आसान नहीं था, अतः इस समस्या के निवारण के लिए भगवान विष्णु ने जालंधर की पत्नी वृंदा का सतित्व भंग करने का निर्णय किया, ताकि जालंधर का वध किया जा सके.
भगवान विष्णु ने जालन्धर का रूप ले कर छल से वृंदा को स्पर्श किया. जिससे वृंदा का सतीत्व भंग हो गया तथा भगवान शिव ने जालंधर का वध कर दिया. परन्तु जब वृंदा को अपने आराध्य देव विष्णु जी के द्वारा किये गये छल पता चला, तो वह क्रोध से भर गई तथा भगवान विष्णु को ह्रदयहीन पत्थर में परिवर्तित होने का श्राप दे दिया.
भगवान ने भी अपने भक्त के दिए हुए श्राप का मान रखा तथा पत्थर में परिवर्तित हो गए. यह देखकर माता लक्ष्मी जी तथा देवताओ ने वृंदा से अपना श्राप वापिस लेने की विनती की, तो वृंदा को अपनी भूल का अहसास हुआ और उसने अपना श्राप वापिस लिया, लेकिन वृंदा खुद वही पर भस्म हो गई. जिस जगह पर वृंदा भस्म हुई वही उसकी भस्म में एक पौधा उत्पन्न हुआ, जिसको विष्णु भगावन ने तुलसी का नाम दिया और आशीर्वाद दिया कि तुम हमेशा मेरे साथ मेरे इस पाषाण रूप में पूजी जाओगी और जो भी आज के दिन हमारा गठबंधन करेगा उसके जीवन के सरे कष्ट दूर हो जायेगे, तब ही से तुलसी और पाषाण रुपी भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का विवाह कराया जाता है.