तुलसी गबार्ड को सामान्यतः उनके फर्स्ट नाम तुलसी की वजह से भारतीय समझ लिया जाता है, मगर उनका भारत से कोई डारेक्ट लिंक नहीं नहीं है. दरसल तुलसी गबार्ड की मां ने हिंदू धर्म अपना लिया था और अपने सभी बच्चों के नाम हिंदू रखे थे. तुलसी गबार्ड भी खुद को हिंदू मानती हैं और हिन्दू होने पर गर्व करती है, इस बात का सबसे बड़ा सबूत यह है कि तुलसी गबार्ड ने भगवद गीता पर हाथ रखकर पद की शपथ ली थी. तुलसी गबार्ड पहली हिंदू अमेरिकी कांग्रेसवुमन भी बनी थी. हालांकि मूल रूप से तुलसी गबार्ड अमेरिकी समोआ मूल से आती हैं.
तुलसी गबार्ड के पति का नाम अब्राहम विलियम्स है और वह एक सिनेमेटोग्राफर है. तुलसी गबार्ड के पिता का नाम माइक गैबार्ड हैं, जो कि एक स्टेट सीनेटर है. तुलसी गबार्ड की तरह ही माइक गैबार्ड पहले एक रिपब्लिकन के रूप में चुने गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने भी डेमोक्रेटिक पार्टी ज्वाइन क्र ली थी.
अमेरिका के जब 2024 में डोनाल्ड ट्रंप फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने पूर्व डेमोक्रेट तुलसी गबार्ड को अपने प्रशासनिक मंत्रिमंडल में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक डीएनआई के पद पर नियुक्त किया. तुलसी गबार्ड की नियुक्ति को डोनाल्ड ट्रंप ने तब एक एक प्राउड रिपब्लिकन बताया था जो अमेरिका के खुफिया तंत्र को अपनी निडर भावना शैली से आगे बढ़ा सकती हैं. साथ ही वह हमारे संवैधानिक अधिकारों की वकालत भी करेगी और ताकत के दम पर शांति सुनिश्चित करेगी. मुझे पूरा विशवास है तुलसी हम सभी अमेरिकन्स को गौरवान्वित करेगी.
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने स्टेटमेंट में कहा था कि डेमोक्रेट राष्ट्रपति पद के लिए तुलसी गबार्ड को पूर्व उम्मीदवार के रूप में अब दोनों पार्टियों में व्यापक समर्थन प्राप्त है और वह एक गौरवान्वित रिपब्लिकन हैं.
हालाँकि तुलसी गबार्ड को खुफिया उद्योग में कोई विशेष अनुभव नहीं है, लेकिन तुलसी गबार्ड एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक अमेरिकी सेना में सेवा की है. उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रतिनिधित्व किया और सन 2013 से 2021 तक हवाई के दूसरे जिले के लिए कांग्रेसवुमन के रूप में बेहतरीन कार्य किया है.
तुलसी गबार्ड को आर्मी नेशनल गार्ड में काम करने का दो दशकों से भी अधिक का अनुभव है और इराक व कुवैत में तैनात रहकर काम कर चुकी. साथ ही दो साल तक उन्होंने हाउस होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी में भी काम किया है.
सन 2020 में, तुलसी गबार्ड ने कमला हैरिस के खिलाफ डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन की दावेदारी की थी, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी पर युद्धों का विरोध न करने का आरोप लगाया था. हालांकि बाद में वह राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो गई थी और अंत में सन 2022 में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी थी कि इसमें युद्धोन्मादियों के अभिजात्य गुट और जागृत विचारकों का वर्चस्व है.
जिसके बाद 2022 में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल होने के बाद, तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति पद के लिए डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन किया था और कमला हैरिस के खिलाफ डिबेट की तैयारी में उनकी मदद भी की थी.