tulsi gabbard ka jeevan parichay

तुलसी गबार्ड का जीवन परिचय

तुलसी गबार्ड अमेरिका की प्रसिद्ध महिला राजनेता है. सैनिक, राजनेता और सबसे बड़े ख़ुफ़िया तंत्र के चीफ़ तक का सफ़र तय करने वाली, तुलसी गबार्ड ने अपने राजनीतिक जीवन में कई रिकॉर्ड कायम किये हैं. महान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी तुलसी गबार्ड को बहादुर कहते हुए उनकी तारीफ़ कर चुके हैं.
 
उनको सामान्यतः उनके फर्स्ट नाम तुलसी की वजह से भारतीय समझ लिया जाता है, मगर उनका भारत से कोई डारेक्ट लिंक नहीं नहीं है. दरअसल तुलसी गबार्ड की मां ने हिंदू धर्म अपना लिया था और अपने सभी बच्चों के नाम हिंदू रखे थे. तुलसी गबार्ड भी खुद को हिंदू मानती हैं और हिन्दू होने पर गर्व करती है, इस बात का सबसे बड़ा सबूत यह है कि तुलसी गबार्ड ने भगवद गीता पर हाथ रखकर पद की शपथ ली थी. तुलसी गबार्ड पहली हिंदू अमेरिकी कांग्रेसवुमन भी बनी थी. हालांकि मूल रूप से तुलसी गबार्ड अमेरिकी समोआ मूल से आती हैं. 

तुलसी गबार्ड के पति का नाम अब्राहम विलियम्स है और वह एक सिनेमेटोग्राफर है. तुलसी गबार्ड के पिता का नाम माइक गैबार्ड हैं, जो कि एक स्टेट सीनेटर है. तुलसी गबार्ड की तरह ही माइक गैबार्ड पहले एक रिपब्लिकन के रूप में चुने गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने भी डेमोक्रेटिक पार्टी ज्वाइन कर ली थी.

वह सन 2002 में महज 21 साल की उम्र में हवाई असेंबली के लिए चुनी गईं थी. ऐसा करने वाली वह सबसे युवा शख़्स थीं. अस्त ही अमेरिकी कांग्रेस में पहुँचने वाली पहली हिंदू प्रतिनिधि भी बनीं थी. इराक़ में ही तुलसी गबार्ड ने मेडिकल यूनिट में अपनी सेवाऐं दी है, हालांकि फिर बाद में उनकी नेशनल गार्ड यूनिट को इराक़ भेजा गया, जिसके कारण गबार्ड ने एक कार्यकाल के बाद पद छोड़ दिया था. इसके बाद वह 2013 से 2021 तक वो डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से हवाई से कांग्रेस की सदस्य रहीं.

सन 2020 में, तुलसी गबार्ड ने कमला हैरिस के खिलाफ डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन की दावेदारी की थी, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी पर युद्धों का विरोध न करने का आरोप लगाया था. उस दौरान तुलसी  विदेशी युद्धों में हस्तक्षेप विरोधी नीति को प्रमुख मुद्दा बनाया था. हालांकि बाद में वह राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो गई थी और अंत में सन 2022 में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी थी कि इसमें युद्धोन्मादियों के अभिजात्य गुट और जागृत विचारकों का वर्चस्व है.

एक न्यूज़ की टिप्पणीकार के रूप में उन्होंने जेंडर और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर खुलकर राय रखी और बाद में ट्रंप की मुखर समर्थक बन गईं.
जिसके बाद 2022 में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल होकर, तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति पद के लिए डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन किया था और कमला हैरिस के खिलाफ डिबेट की तैयारी में उनकी मदद भी की थी. उन्होंने 2024 में ट्रंप का समर्थन किया. उनके साथ चुनाव प्रचार किया. ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद ट्रांजिशन टीम का हिस्सा भी बनी.

जब 2024 में डोनाल्ड ट्रंप फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने पूर्व डेमोक्रेट तुलसी गबार्ड को अपने प्रशासनिक मंत्रिमंडल में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक डीएनआई के पद पर नियुक्त किया. तुलसी गबार्ड की नियुक्ति को डोनाल्ड ट्रंप ने तब एक एक प्राउड रिपब्लिकन बताया था जो अमेरिका के खुफिया तंत्र को अपनी निडर भावना शैली से आगे बढ़ा सकती हैं. साथ ही वह हमारे संवैधानिक अधिकारों की वकालत भी करेगी और ताकत के दम पर  शांति सुनिश्चित करेगी. मुझे पूरा विशवास है तुलसी हम सभी अमेरिकन्स को गौरवान्वित करेगी.

इस पद पर रहते हुए वह कई अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच को-ऑर्डिनेशन का काम करती थीं और राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह देती थीं.

2025 में ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के कुछ ही हफ़्तों के बाद उन्हें अमेरिकी ख़ुफ़िया तंत्र की सबसे शक्तिशाली हस्तियों में शामिल किया गया था. हालांकि इस साल वह सार्वजनिक रूप से काफ़ी कम दिखाई दीं. इस दौरान अमेरिका ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की, क्यूबा पर दबाव बढ़ाया और वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति को हटाने जैसी कार्रवाई की.

डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने स्टेटमेंट में कहा था कि डेमोक्रेट राष्ट्रपति पद के लिए तुलसी गबार्ड को पूर्व उम्मीदवार के रूप में अब दोनों पार्टियों में व्यापक समर्थन प्राप्त है और वह एक गौरवान्वित रिपब्लिकन हैं.

हालाँकि तुलसी गबार्ड को खुफिया उद्योग में कोई विशेष अनुभव नहीं था, लेकिन तुलसी गबार्ड एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक अमेरिकी सेना में सेवा की है. उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रतिनिधित्व किया और सन 2013 से 2021 तक हवाई के दूसरे जिले के लिए कांग्रेसवुमन के रूप में बेहतरीन कार्य किया था. 

तुलसी गबार्ड को आर्मी नेशनल गार्ड में काम करने का दो दशकों से भी अधिक का अनुभव है और इराक व कुवैत में तैनात रहकर काम कर चुकी है. साथ ही दो साल तक उन्होंने हाउस होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी में भी काम किया है. 

उनके नेतृत्व में अमेरिकी ख़ुफ़िया तंत्र को छोटा किया गया. सन 2025 में एजेंसी के लगभग 50 फ़ीसदी कर्मचारियों की कटौती की योजना का एलान करते हुए उन्होंने कहा था कि पिछले दो दशकों में यह एजेंसी ज़रूरत से ज़्यादा बड़ी और अक्षम हो गई थी.

अपने राजनीतिक करियर के दौरान गबार्ड ने विदेश में होने वाले युद्धों में अमेरिकी हस्तक्षेप का विरोध करने वाली नेता की छवि बनाई थी. ट्रंप ने जब ईरान पर हमला करने का फ़ैसला किया तब भी प्रशासन से तुलसी गबार्ड का तनाव दिखा था. यही नहीं ईरान पर इसराइल की सैन्य कार्रवाई का भी उन्होंने खुलकर समर्थन नहीं किया था. मार्च 2026 में कांग्रेस की सुनवाई के दौरान संघर्ष के संभावित नतीजों के पर पूछे गए सवालों से भी वह सावधानी से बचती रहीं थी.

इस दौरान डेमोक्रेट नेताओं ने उनके सामने ये सवाल भी उठाए थे कि व्हाइट हाउस और ख़ुफ़िया एजेंसियों के दावों में ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर अंतर क्यों दिखता है? क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस के सामने तुलसी गबार्ड के उस बयान को भी ख़ारिज कर दिया था, जिसमें तुलसी ने कहा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है. तब ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, मुझे फ़र्क नहीं पड़ता कि उन्होंने क्या कहा. मुझे लगता है कि वो लोग परमाणु हथियार बनाने के बहुत क़रीब थे. ट्रंप लगातार ईरान की परमाणु क्षमता को युद्ध की वजह बताते रहे हैं.

मई 2026 में मंत्रिमंडल से अपने त्यागपत्र में तुलसी गबार्ड ने लिखा कि उनके पति अब्राहम के लिए आने वाले सप्ताह और महीने काफी बड़ी चुनौतियों से भरे और महत्वपूर्ण है. इसलिए वह अपने पद से इस्तीफ़ा दे रही है. 

उनके इस्तीफे को स्वीकार करते हुए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि गबार्ड, इस समय अपने पति के साथ रहना चाहती हैं. वो उन्हें फिर से स्वस्थ होने में मदद करना चाहती हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि वह जल्द ही पहले से भी बेहतर हो जाएंगे. साथ ही ट्रंप ने कहा कि प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर एरॉन लुकास कार्यवाहक डायरेक्टर की ज़िम्मेदारी संभालेंगे.

तुलसी गबार्ड का इस्तीफ़ा उनके शीर्ष सहयोगी और पूर्व नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर निदेशक जो केंट के इस्तीफ़े के दो महीने बाद आया है. केंट ने भी ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन छोड़ते हुए राष्ट्रपति से अपना रुख़ बदलने की अपील की थी. हालांकि, केंट के इस्तीफ़े के बाद तुलसी गबार्ड ने सार्वजनिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप के ईरान संबंधी सैन्य कार्यवाही के फ़ैसले का समर्थन किया था. उन्होंने कहा था कि कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति ही तय करते हैं कि कौन-सा ख़तरा फौरी है और कौन सा नहीं.

ट्रंप प्रशासन 2.0 में कैबिनेट छोड़ने वाली तुलसी गबार्ड चौथी सदस्य हैं. इससे पहले अप्रैल 2026 में श्रम मंत्री लोरी चावेज-डीरेमर ने पद छोड़ा था. होमलैंड सिक्योरिटी मिनिस्टर क्रिस्टी नोएम और अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी भी इसी साल ट्रंप प्रशासन से अलग हुए थे.

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