the kashmir files

फिल्म द कश्मीर फाइल्स

फिल्म द कश्मीर फाइल्स दादा साहब फाल्के अवार्ड 2023 की विनर बनी तो एक बार फिर इसने साबित किया कि 1990 में हुए कश्मीर हिन्दू नरसंहार की सच्चाई को प्रदर्शित करने वाली यह फिल्म किसी भी तरह से गलत नहीं है.  

24 अगस्त 2023 को फिल्म द कश्मीर फाइल्स को एक और पुरस्कार से नवाजा गया जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राष्ट्रीय एकता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का नरगिस दत्त पुरस्कार 2023 द कश्मीर फाइल्स को दिया गया.

फिल्म द कश्मीर फाइल्स के लिए इसकी रिलीज के समय सबसे बड़ी असामान्य प्रतिक्रिया तो आम जनता की रही. न्यूज़ चैनलों पर साफ़ देखा गया कि आघात अनुभव करती हुई, दुखी और भीगी हुई आंखों से थियेटर से बाहर निकल कर हर कोई अन्य लोगो को फिल्म देखने के लिए अनुरोध कर रहा था. मानो जैसेे यह केवल कश्मीरी पंडितों का दर्द नहीं, बल्कि हर एक भारतीय का दर्द बन गया.

कुछ लोगो का मानना था कि फिल्म द कश्मीर फाइल्स कन्वर्ट हिंदुओं के प्रति नफरत का भाव पैदा कर रही है और भारत की गंगा जमुनी तहजीब को तोड़ने का प्रयास करती है क्योंकि इस फिल्म में कश्मीर में दर्शाये गए हिंदुओं के भीषण नरसंहार को अनुचित नहीं कहा जा सकता. हिन्दुओं में एक बड़ी संख्या को ऐसा माना जाता जो स्व केंद्रित और स्वार्थी हैं. उनको अपने पड़ोस में होने वाली घटनाओं से भी कोई मतलब नहीं रहता है.

कुछ लोगो का मत है कि द कश्मीर फाइल फिल्म कश्मीर में हुए हिंदुओं के नर संहार को प्रदर्शित करती है और इस तरह की यह पहली घटना नहीं है, क्योंकि इससे पहले 1947 में विभाजन का नरसंहार, पाकिस्तान की मांग के समय मोपला नरसंहार, और काफी पहले मेवाड़ नरसंहार, अजमेर नरसंहार जैसे और न जाने कितने नरसंहार यह हिंदू सभ्यता देख चुकी है और भोग चुकी है.

वही कुछ लोग कह रहे हैं कि यह प्रोपेगेंडा फिल्म है, लेकिन कोई भी व्यक्ति यह नहीं बता सकता कि इस फिल्म में दर्शायी गयी कोई भी घटना असत्य हो या झूठी दर्शाई गई हो, क्योंकि ऐसा है ही नहीं है और यदि ऐसा होता तो यह लोग उतपात मचा देते हंगामा कर देते. इन लोगो का मानना है कि इस फिल्म में  बहुत कम घटनाये दिखाई गई हैं और ऐसी तो न जाने कितनी घटनाएं कश्मीर के दूरदराज इलाकों में उस समय घटित हुई थी.

कोई कहता था कि यह सब राजनीति है और बीजेपी का वोट बैंक मजबूत करने के लिए यह सब माहोल बनाया जा रहा है. इन लोगो ने इस फिल्म का शुरू से ही विरोध किया, सेंसर बोर्ड पर दबाव बनाया गया, न्यायालय चले गए. और तो और जब सब जगह से निराशा हाथ लगी तो फिल्म का प्रमोशन भी नहीं होने दिया गया. 

किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसको रिलीज नहीं होने दिया गया और एक साजिश के जरिये फिल्म द कश्मीर फाइल्स का एचडी वीडियो क्वालटी में लिंक भी वायरल किया गया जिससे कि लोग फिल्म देखने सिनेमाघरों तक ना जाए. इस लिंक के जरिये फिल्म देख ले और फिल्म फ्लॉप हो जाए ताकि आने वाले समय में कोई भी फिल्म निर्माता-निर्देशक इस तरह की फिल्म बनाने की हिम्मत न कर सके.

लेकिन इस समय भारत में राष्ट्रवाद का उद्भव न केवल भारत की घटनाओं को लेके बल्कि वैश्विक घटनाओ तक है वह चाहे अमेरिका हो, फ्रांस हो, जर्मनी हो या फिर यूक्रेन हर कही उग्र भारतीय राष्ट्रवाद हर रोज बढ़ता जा रहा है. भारतीयता का यह भाव ऐसा है जिसे दुनिया की कोई भी ताकत रोक नहीं सकती.

द कश्मीर फाइल्स केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि सच्चाई से भरा हुआ सामाजिक चेतना जगाने का एक ऐसा यंत्र है, जिसे हर भारतीय राष्ट्रवादी को अवश्य देखना चाहिए.

 

 

 

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