sunita williams a journey beyond earth

सुनीता विलियम्स ए जर्नी बियॉन्ड अर्थ

सुनीता लिन विलियम्स, जिन्हें प्यार से संयुक्त राज्य अमेरिका में सुनी और स्लोवेनिया में सोनक के नाम से जाना जाता है, एक असाधारण लेडी हैं जिनके जीवन की कहानी लिमिटस और ग्रेविटी से परे है. 19 सितंबर, 1965 को ओहियो के यूक्लिड में जन्मी, सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष अन्वेषण, रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो सदियों तक पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सुनीता विलियम्स नीधम, मैसाचुसेट्स से हैं, लेकिन उनकी जड़ें कई महाद्वीपों में फैली हुई हैं. सुनीता विलियम्स के पिता, दीपक पांड्या, एक भारतीय-अमेरिकी न्यूरोएनाटोमिस्ट हैं, जबकि उनकी मां, उर्सुलिन बोनी (ज़ालोकर) पांड्या स्लोवेनियाई विरासत है. सुनीता विलियम्स तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं, उनके बड़े भाई, जे थॉमस है और बड़ी बहन का नाम दीना अन्नाद हैं.

बालयकाल में होने वाली परवरिश में सुनीता विलियम्स को सामाजिक जिम्मेदारीयो से अवगत कराया गया तो साथ ही जिज्ञासु भी बनाया गया. सन 1983 में, सुनीता विलियम्स ने नीधम हाई स्कूल से ग्रेजुएट किया, और अपनी आने वाली उड़ान के लिए मंच तैयार किया. इसके बाद उन्होंने 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से भौतिक विज्ञान में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की. बाद में, सुनीता विलियम्स ने सन 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री भी ली.

सैन्य कैरियर और नौसेना एविएटर

मई 1987 में संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना में एक पताका के रूप में कमीशन किया गया, इसी समय सुनीता विलियम्स ने एक ऐसे रास्ते पर भी चलना शुरू किया जो उसे पृथ्वी के वायुमंडल से परे ले जा गया. उनके नौसैनिक करियर ने सुनीता विलियम्स को नौसेना तटीय प्रणाली कमान और नौसेना वायु प्रशिक्षण कमान सहित विभिन्न कार्यों में जिम्मेदारियों पे नियुक्त किया गया. जुलाई 1989 में, सुनीता विलियम्स को नौसेना एविएटर का प्रतिष्ठित पद प्रदान  किया गया.

हेलीकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 3 (HC-3) में सुनीता के हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण ने उन्हें फोरेन अपॉइंटमेंट के लिए तैयार किया. उन्होंने नॉरफ़ॉक, वर्जीनिया में हेलीकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 8 (HC-8) के साथ भी काम किया, ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड और ऑपरेशन प्रोवाइड कम्फर्ट के दौरान भी सुनीता विलियम्स ने भूमध्यसागर, लाल सागर और फारस की खाड़ी में मिशन में भाग लिया. उनका साहस और समर्पण स्पष्ट था क्योंकि सुनीता विलियम्स ने 1992 में मियामी, फ्लोरिडा में तूफान एंड्रयू के समय राहत प्रयासों में भी सहयोग किया था.

अंतरिक्ष साइंटिस्ट कैरियर और स्पेसवॉक रिकॉर्ड्स

सुनीता विलियम्स की सितारों की यात्रा तब शुरू हुई जब वह सन 1998 में एक अंतरिक्ष ट्रैवलर के रूप में नासा में शामिल हुईं. उनके अंतरिक्ष ओडिसी में कई महत्वपूर्ण मिशन शामिल थे, जिनमें कुछ निम्नलिखित है. 

एसटीएस -116/117 (अभियान 14/15) - सुनीता को एक्सपेडिशन 14 और एक्सपेडिशन 15 के हिस्से के रूप में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) सौंपा गया. आईएसएस पर अपने समय के दौरान, उन्होंने अपनी फ्लेक्सिबिलिटी और टेक्नीकल स्किल्स का प्रदर्शन करते हुए स्पेसवॉक में पार्टिसिपेट किया.  

सोयूज टीएमए - 05M (अभियान 32/33) - सन 2012 में सुनीता विलियम्स ने एक्सपीडिशन 32 में फ्लाइट इंजीनियर के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी थीं और जहाँ पर बाज में वह एक्सपेडिशन 33 की कमांडर भी बनी. अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स के विस्तारित प्रवास के दौरान उनका नेतृत्व और अनुकूलन क्षमता बेहतरीन थी.

पृथ्वी से परे व्यक्तिगत और सांस्कृतिक कनेक्शन 

सुनीता विलियम्स की अनूठी विरासत ने उनके अंतरिक्ष प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. स्लोवेनियाई झंडा, एक समोसा और एक कार्निओलन सॉसेज को अंतरिक्ष में ले जाकर उन्होंने गर्व महसूस किया. इस तरह सुनीता विलियम्स ने भारतीय और स्लोवेनियाई संस्कृति से जुड़ाव का जश्न मनाया. सुनीता विलियम्स  स्पेस यात्रा मानवता की एकता का बेहतरीन उदाहरण है, यह यात्रा राष्ट्रीय सीमाओं को पार करती है और ब्रह्मांड मनुष्य के साझा अस्तित्व पर जोर देती है. 

सुनीता विलियम्स के जीवन की कहानी साहस, जिज्ञासा और लौकिक अन्वेषणों में से एक है. उसके सात स्पेसवॉक, कुल 50 घंटे और 40 मिनट, मानव सरलता और दृढ़ संकल्प के लिए एक वसीयतनामा बने हैं. जैसा कि लोग सितारों को देखते हैं, उसे एक ऐसे ट्रेलब्लेज़र के रूप में याद करते हैं जिसने गुरुत्वाकर्षण को चैलेंज किया और सभी को प्रेरित किया.

सुनीता विलियम्स की खोज की विरासत जिज्ञासुओं को अज्ञात को जानने की ओर प्रेरित करती रहे, याद दिलाती रहे कि मनुष्य के सपने ग्रहों की सीमाओं से बहुत आगे तक पहुंच सकते हैं.

6 मई 2024 को सुनीता विलियम्स की बोइंग स्टारलाइनर के जरिए अतंरिक्ष की तीसरी उड़ान तकनीकी खराबी के चलते अचानक रोक दी गयी थी. इस यात्रा में वह अपने अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ यात्रा करने वाली थी. 

इसके लगभग 1 महीने बाद जून 2024 में इंडो अमेरिकन स्पेस साइंटिस्ट सुनीता विलियम्स ने बोइंग के स्टारलाइनर स्पेस क्राफ्ट को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले चालक दल मिशन पर संचालित करके इतिहास रचा. अंतरिक्ष में सुनीता विलयम्स की यह तीसरी यात्रा थी, इस मिशन का उद्देश्य स्टारलाइनर को रेगुलर स्पेस ट्रैवेल के लिए स्थापित  करना था. इस मिशन की सफलता के बाद सुनीता विलियम्स और उनके को-पायलट बैरी विल्मोर पृथ्वी पर लौटने से पहले एक सप्ताह के प्रवास पर आईएसएस क्रू पर भी रहे थे. 

इसी प्रोजेक्ट में 27 जून को बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में संदिग्ध हीलियम रिसाव के कारण एक कठिन स्थिति उत्पन्न हुई. हालांकि इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये नासा के अधिकारी वाणिज्यिक चालक दल कार्यक्रम प्रबंधक स्टीव स्टिच ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हमें घर लौटने की कोई जल्दी नहीं है. उन्होंने आई.एस.एस. की सुरक्षा पर स्पष्ट विवरण देते हुए कहा कि स्टेशन एक अच्छा, सुरक्षित स्थान है, जहां हम रुक सकते हैं और वाहन के अंदर काम करने के लिए समय ले सकते हैं, तथा यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हम घर आने के लिए तैयार हैं.

सुनीता विलियम्स के इस प्रोजेक्ट पर नासा और बोइंग दोनों ने ही सतर्क रुख अपनाया हुआ था और पृथ्वी पर वापसी की यात्रा शुरू करने से पहले स्टारलाइनर की प्रणोदन प्रणाली के प्रदर्शन का डीप एनेल्सेस लिया गया.

नासा ने अपने शेड्यूल को समायोजित करते हुए, अगले स्पेसवॉक के लिए जुलाई 2024 के अंतिम दिनों तक का लक्ष्य बनाया. इस री शिड्यूलिंग से ग्राउंड टीमों को लीकेज को ठीक करने और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा कन्फर्म करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया.

हालांकि अंतरिक्ष यात्रियों को प्रोजेक्ट की शुरुआत में केवल आठ दिनों के मिशन के लिए तैयार किया गया था, लेकिन आईएसएस पर उनका प्रवास काफी हद तक बढ़ा दिया गया. हालांकि, नासा ने आश्वासन दिया कि इस टाइम पीरियड में अंतरिक्ष यात्रियों की सहायता के लिए अंतरिक्ष यान में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराये गए हैं.

नासा ने बताया था कि, अंतरिक्षयान को सामान्य मिशन पूरा करने के लिए सात घंटे का समय चाहिए तथा इसके टैंकों में अभी इतना हीलियम बचा है कि यह अनडॉकिंग के बाद भी लगभग 70 घंटे तक मुक्त उड़ान भर सकता है.

अगस्त 2024 में सुनीता विलियम्स को मिशन पर कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझना पड़ा. अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को आईएसएस पर दृष्टि संबंधी कुछ समस्याऐं हो गयी. जिसके बाद बोइंग की काफी कड़ी आलोचनायें हुई और बोइंग के स्टारलाइनर पर उनकी वापसी में देरी की कॉम्पलेक्सिटी नासा ने स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर उपस्थित सुनीता विलियम्स और मिशन पर उनके सहयोगी बुच विल्मोर को वापस लाने के लिए तैयार किया है. 

क्रू ड्रैगन मिशन विलियम्स और विल्मोर की वापसी के लिए सितंबर 2024 में भेजा जायेगा जिसके बाद सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में समय शुरुआती आठ दिनों से बढ़ाकर आठ महीने से अधिक का हो जायेगा. इस मिशन के बाद बोइंग का स्टारलाइनर बिना चालक दल के वापस लौटेगा, जो कंप्यूटर सिस्टम द्वारा ऑपरेट किया जाएगा.

13 सितम्बर 2024 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन फंसी सुनीता विलियम्स और उनके साथी विल्मोर ने कहा कि यदि मुसीबत में फसे स्पेस क्राफ्ट की प्रॉब्लम्स सॉल्व करने के लिए बोइंग के स्टारलाइनर को थोड़ा और अधिक समय मिल जाता तो हम उसपर वापस पृथ्वी पर आ सकते थे.

दरसअल इससे एक सप्ताह पहले ही बैरी विल्मोर और सुनीता विलियम्स ने उस बोइंग स्टारलाइनर को देखा, जिस पर वे जून 2024 में स्पेस सेंटर गए थे, और उन्हें वापस लिए बिना ही लौट आया था. 

विल्मोर ने कहा कि अंतरिक्ष में रुकने के डिसीजन से उनको कोई प्रॉब्लम नहीं हैं, लेकिन उन्हे वापसी कैसे करनी है, इस बारे में डिफरेंट ओपेनियन थे.

केवल 10 दिन के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर गईं सुनीता विलियम्स 9 महीने तक अंतरिक्ष में फंसी रही. उनकी वापसी के लिए कई प्रयासों के बाद 14 मार्च 2025 को स्पेस एक्स का क्रू 10 मिशन लॉन्च किया गया. इस मिशन के तहत माना जा रहा है कि अब कुछ ही दिनों में सुनीता विलियम्स धरती पर वापस लौट आएंगी.

Read more at headlineshunt :