सुनील छेत्री मशहूर इंडियन फुटबॉल प्लेयर हैं. सुनील छेत्री का जन्म 3 अगस्त 1984 को सिकंदराबाद में हुआ था. सुनील छेत्री नेपाल से आते है. उनके पिता का नाम के.बी. छेत्री और माँ का नाम सुशीला छेत्री हैं. सुनील छेत्री की प्रारंभिक शिक्षा गंगटोक के बहाई स्कूल, दार्जिलिंग के बेथानी और आरसीएस, कोलकाता में लोयोला स्कूल और नई दिल्ली के आर्मी पब्लिक जैसे स्कूलों में हुई.
सुनील छेत्री ने अपनी अक्टूबर, 2001 में कुआलालंपुर में चल रही एशियाई स्कूल चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए आशुतोष कॉलेज में पढ़ते हुए 12वीं की पढाई बीच में ही छोड़ दी. 2001 में उस समय सुनील छेत्री महज 17 साल के थे, जब सुनील ने अपने फुलबॉल करियर का आगाज दिल्ली में सिटी क्लब से किया. इसके महज एक साल बाद ही सुनील छेत्री के टेलेंट को फेमस फुटबॉल क्लब मोहन बागान ने पहचान लिया और उन्हें टीम में ले लिया. यही वो पल था जब सुनील छेत्री के प्रोफेशनल फुटबॉल करियर की शरुआत हुई और उसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड के नहीं देखा.
सन 2005-06 में सुनील छेत्री को जेसीटी एफसी के लिए स्थानांतरित किया गया. इस सत्र में, सुनील छेत्री ने सभी प्रतियोगिताओं में दो गोल किए, एक सलगांवकर और एक एससी गोवा के खिलाफ, जिसकी बदौलत, जेसीटी लीग में सिक्स्थ प्लेस पर पहुंचने में सफल रही. बाद में वह काफी लम्बे समय तक मोहन बागान जेसीटी एफसी के लिए खेले और टीम को लीड किया. कुछ समय वह ईस्ट बंगाल क्लब के साथ भी जुड़े.
सन 2007 में कम्बोडिया के अगेंस्ट सुनील छेत्री द्वारा किये गए दो गोलों ने उन्हे रातो रात स्टार बना दिया, पूरे विश्व मे सुनील छेत्री के टेलेंट को सम्मान मिला. इसी साल सुनील छेत्री ने 61 वें संतोष ट्रॉफी के ग्रुप स्टेज मैच में दिल्ली के लिए गोलों की दो हेट-ट्रिक्स भी लगाई, इस टूर्नामेंट में उड़ीसा और रेलवे दिल्ली की टीमें प्री-क्वार्टर फाइनल प्लेऑफ़ में ही बहार हो गयी थी. एक्स्ट्रा टाइम में तमिलनाडु को 1-0 से हारने के बाद 2006-07 सीज़न के अंत में, छेत्री को लीग के प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड से पुरस्कृत भी किया गया और साथ ही सर्वश्रेष्ठ अग्रिम पुरस्कार से सम्मानित किया गया. लीग मे सुनील छेत्री ने कुल 12 गोल किये. जेसीटी ने डेम्पो एससी के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए बारह गोल किये.
दो मोहन बागान के खिलाफ 2-0 की जीत दर्ज करते हुए किये और डेम्पो एससी के खिलाफ भी 3-2 से जीत दर्ज की इस तरह अपने पहले आई लीग सीज़न मे, सुनील छेत्री ने सात गोल बनाए और जेसीटी तीसरे स्थान पर रही. उस सीज़न में, सत्र के आखिरी मैच में उनका एकमात्र गोल डबल सालगोकर के खिलाफ था.
सन 2007 में सुनील छेत्री को एआईएफएफ प्लेयर ऑफ़ द ईयर भी चुना था. 2007 में ब्राजील के क्लब साओ पाओलो एफसी के खिलाफ सुपर सॉकर सीरीज़ में सुनील छेत्री के प्रदर्शन के बाद, इनकी तुलना तबके स्टार भारतीय फुटबॉलर स्टुअर्ट बाईचुंग भूटिया के साथ होने लगी.
इसके एक साल बाद सन 2008 में एएफसी चॅलेंज कप के फाइनल में ताजिकिस्तान के खिलाफ 3 गोल दागकर उन्होने 27 साल के बाद भारत की एशिया कप में एंट्री करा दी. अक्टूबर 2008 में यह खबरें चली कि सुनील छेत्री विदेशी क्लबों की तरफ से खलने मे इंट्रेस्ट ले रहे है और ये फुटबॉल क्लब लीग वन के लीड्स यूनाइटेड और पुर्तगाल के दूसरे डिवीजन लीग डे होनरा के एस्ट्रल प्रेया थे.
तभी एक इंटरव्यू के दौरान सुनील छेत्री ने कहा था कि अभी तक इस बात की कोई कुछ भी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हां, मुझे लगता है कि मैं वहां पहुंचने के बहुत करीब हूँ. इससे साफ पता चलता है कि इंग्लैंड में कॉन्ट्रेक्ट साइन करने का सुनील छेत्री के पास एक मौका था हालांकि, अंत में ऐसा नहीं हो सका.
मई 2009 में सुनील छेत्री डेम्पो एससी क्लब के साथ दो साल के लिए जुड़े. अगस्त 2009 में क्वीन एंड आरस्कू पार्क रेंजरों के साथ भी उन्होंने तीन साल का कॉन्ट्रेक्ट किया, मगर क्योंकि तब तक भारत फीफा रेटिंग के टॉप 70 में नहीं आता था तो वह इस टूर्नामेंट में खेल नहीं सके.
जैसे जैसे सुनील छेत्री ने सफलता का स्वाद चखा उनको प्रलोभन भी आने शुरू हो गए. दूसरे देशों से फुटबॉल खेलने के लिए सुनील छेत्री को कई ऑफर आये. एक समय अफवाहें मची कि सुनील छेत्री इंग्लिश प्रिमियर लीग में खेल सकते है. सुनील छेत्री ने सन 2010 में कंसास सिटी के लिए मेजर लीग सॉकर यूएसए में खेलने के लिए गये तो वहां वह तीसरे ऐसे भारतीय बने जो भारत के बाहर खेलने के लिए गये.
सन 2012 में उन्होने स्पोर्टिंग क्लब डी पुर्तगाल की रिज़र्व्स टीम की तरफ से खेला वहां भी सुनील छेत्री ने अपने बेहतरीन खेल से सभी के दिलों को जीत लिया. स्पोर्टिंग क्लब डी पुर्तगाल के साथ जैसे ही उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म हुआ उन्होने बेंगलूरु फुटबॉल क्लब के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर लिया. अपने रिटायरमेंट तक सुनील छेत्री इस क्लब के कप्तान बने रहे और उनके खेल और नेतृत्व में यह टीम आई-लीग की टॉप पोजीशन पर भी पहुंची.
सुनील छेत्री का विवाह 4 दिसंबर 2017 को फुलबॉल क्लब मोहन बागान के पूर्व लीजेंड प्लेयर सुब्रत भट्टाचार्य की बेटी सोनम भट्टाचार्य से हुआ है. सोनम भट्टाचार्य ने बिजनेस मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन किया हुआ है.
सुनील छेत्री ने इंडियन फुटबॉल टीम के लिए जूनियर ओर सीनियर दोनो लेवल पे फुटबॉल खेली है. सन 2011 में जब सुनील छेत्री को भारतीय फुटबॉल टीम का कप्तान बनाया गया तो सन 2024 में जब उन्होंने रिटायरमेंट लिया तब तक वह भारतीय टीम के कप्तान रहे.
सुनील छेत्री ने मई 2024 में घोषणा कर दी थी कि कोलकाता में 6 जून को कुवैत के खिलाफ वह भारत के लिए अपना अंतिम अंतराष्ट्रीय मैच खेलेंगे और उसके बाद संन्यास ले लेंगे. और फिर 6 जून को अपनी घोषणा के अनुसार सुनील छेत्री ने संन्यास ले लिया.