सुनेत्रा पवार वाइफ ऑफ अजीत पवार महाराष्ट्र की राजनीती से जुड़ा एक बड़ा नाम है. अपने पति अजित पवार के विमान हादसे में आकस्मिक निधन के बाद सुनेत्रा पवार 31 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र की पहली उप मुख्यमंत्री बनी थी.
महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक परिवार पवार से आने वाली सुनेत्रा पवार उस समय महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद थी और पवार परिवार के बड़े राजनीतिक नामों शरद पवार, सुप्रिया शूले, अजीत पवार में से एक मानी जाती है.
सुनेत्रा पवार जब महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनी तो उन्हें 31 जनवरी 2026 को शाम पांच बजे मुंबई के लोक भवन में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पद की शपथ दिलाई थी.
महाराष्ट्र के धाराशिव ज़िले की रहने वाली सुनेत्रा पवार, सुनेत्रा पवार का बचपन धाराशिव के टेर में बीता. सुनेत्रा पवार शादी के बाद पवार खानदान की बहु बनकर ही राजनीति से नहीं जुडी बल्कि उनका बचपन भी राजनीतिक परिवेश में ही बीता है. उन्हें आज भी याद है कि वह कैसे बचपन में घर घर जाकर लोगों से मिलती थी.
राजनीति और सामाजिक कार्य के प्रति अपने जुनून के लिए वह अपने पिता को प्रेरणा स्त्रोत्र मानती है. सुनेत्रा पवार के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी और गांव के रसूखदार व्यक्तियों में से थे. यही नहीं एनसीपी के वरिष्ठ नेता पद्मसिंह पाटिल, सुनेत्रा पवार के भाई हैं. पद्मसिंह पाटिल और शरद पवार की दोस्ती की वजह से ही सुनेत्रा और अजित पवार की शादी हुई थी.
अजित पवार से सुनेत्रा की शादी सन 1980 में हुई, जिसके बाद सुनेत्रा बारामती आ गईं. तब तक अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर का आगाज नहीं किया था. जब सुनेत्रा अजित पवार के जीवन में आयी तो शुरुआती कुछ सालों तक सुनेत्रा ने अजित का घर संभाला और अजित ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की. इसी दौरान सुनेत्रा ने अजित पवार के दूध के बिजनेस में भी सहायता की. फिर सुनेत्रा पवार के अजीत पवार से जय पवार और पार्थ पवार दो बेटे हुए. सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार 2019 के लोकसभा चुनाव में मावल सीट से अपनी किस्मत आजमा चुके है जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली थी.
बारामती क्षेत्र में सुनेत्रा पवार अपने सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती हैं और एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया नामक एक एनजीओ भी चलाती हैं.
सुनेत्रा पवार के सामाजिक कार्यों की शुरुआत काटेवाड़ी से हुई थी. जब अजित पवार सतारा के गार्डियन मिनिस्टर थे, तब सुनेत्रा पवार महाबलेश्वर की यात्रा पर गईं, वहां से लौटते समय उन्हें एक ऐसा गांव दिखा जहां संत गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान चल रहा था. इसी अभियान से प्रेरणा लेकर सुनेत्रा पवार के एग्रेसिव इंटरेस्ट पर काटेवाड़ी परियोजना की शुरुआत की गई.
उनकी वेबसाइट सुनेत्रा पवार डॉट कॉम के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने जैविक खेती और हरी खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है. उन्होंने भारत में इको-विलेज की अवधारणा को बढ़ावा देने में भी बड़ी भूमिका निभाई है.
साथ ही सुनेत्रा पवार लोकप्रिय शैक्षणिक संस्थान विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी भी हैं. फ्रांस में विश्व उद्यमिता मंच के थिंक टैंक का भी सुनेत्रा पवार सन 2011 से हिस्सा रही हैं.
साल 1993 में जब मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाके हुए तो शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, और भतीजे अजित पवार पत्नी सुनेत्रा पवार सहित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास यानी वर्षा बंगले में उनके साथ रहने लगे. उस समय देश में कंप्यूटर क्रांति अपने चरम पर थी. इसी समय सुनेत्रा ने कंप्यूटर सीखने की ज़िद की और उनकी ज़िद को अजित ने पूरा भी किया.
2024 के लोकसभा चुनाव में सुनेत्रा पवार पत्नी अजित पवार ने बारामती संसदीय सीट से ननद और सिटिंग एमपी सुप्रिया सुले के सामने चुनाव भी लड़ा मगर वह जीत दर्ज नहीं कर सकी. हालांकि महाराष्ट्र के जिस बारामती क्षेत्र से सुनेत्रा पवार ने चुनाव लड़ा लड़ता, वह एन सी पी प्रमुख शरद पवार का गढ़ माना जाता है, और उनकी पुत्री सुप्रिया सुले वहां से कई बार सांसद रह चुकी थी. लगभग पांच दशकों से पवार परिवार और सुप्रिया सुले ने बारामती लोकसभा में एक छत्र राज किया है यह जानते हुए भी यहां से लोकसभा चुनाव लड़ने का सुनेत्रा पवार का फैसला काफी साहसिक माना गया था.
और अपने इसी साहसिक कदम से सुनेत्रा पवार की यह बड़े स्तर पर राजनीतिक शुरुआत थी, हालांकि इससे पहले वह पति अजीत पवार के राजनीतिक कार्यों में सहयोग करती रही थी और बेटे पार्थ पवार के चुनाव में भी सक्रीय भूमिका निभाई थी.
इन चुनावों के दौरान सुनेत्रा पवार के पति और तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे अजित पवार द्वारा अपनी चचेरी बहन और सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ सुनेत्रा पवार को उम्मीदवार उतारकर बारामती के मतदाताओं से भावनात्मक अपील की गयी थी कि इस बार पहला चुनाव लड़ रहे व्यक्ति को चुनें जो आपकी भावी पीढ़ियों के कल्याण के लिए काम करेगा.
सुनेत्रा पवार के पति अजीत पवार का अपने चाचा शरद पवार से मतभेद के कारण पवार परिवार की पार्टी एनसीपी में विभाजन भी हो गया था, इसलिए आम चुनावों में बारामती में पवार परिवार के दो बड़े सदस्यों ने आमने सामने यह चुनाव लड़ा था.
बारामती लोकसभा चुनाव 2024 के इस चुनाव में सुनेत्रा पवार भले ही सांसद नहीं बन पायी मगर सांसद बनने के लिए उन्हें ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा और जून 2024 में ही सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन ली गयी. तो इस प्रकार लोकसभा न सही पवार खानदान की यह बहु सुनेत्रा पवार पहली बार उच्च सदन राज्य सभा से सांसद बनी.
महाराष्ट्र के पुणे डिस्ट्रिक के अंतर्गत आने वाली बारामती लोकसभा सीट पर लगभग 60 सालों से ज़्यादा पवार परिवार का दबदबा रहा है. शरद पवार ने 1967 में पहली बार बारामती विधानसभा सीट से विधायकी का चुनाव जीता था. उन्होंने 1972, 1978, 1980, 1985 और 1990 के विधानसभा चुनावों में भी इसी सीट को बरकरार रखा.
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने 1984, 1996, 1998, 1999 और 2004 में बारामती लोकसभा क्षेत्र ही संसदीय चुनाव भी जीता. बीच में शरद पवार के उत्तराधिकारी माने जाने वाले अजित पवार ने सन 1991 में बारामती ससदीय सीट का लोकसभा में नेतृत्व किया. 2004 के बाद शरद पवार ने बारामती लोकसभा सीट अपनी पुत्री सुप्रिया सुले को सौंप दी जिसका उन्होंने बखूबी मान रखते हुए 2009, 2014, 2019 और 2024 में नेतृत्व किया और सांसद बनी.
वही दूसरी ओर पति अजीत पवार बारामती विधानसभा सीट से सात बार विधायक रहे थे, तो कई सालों से सक्रिय राजनीति से दूर रहीं सुनेत्रा हमेशा बारामती के चुनावी अभियानों में पर्दे के पीछे से अजित की प्रेरक शक्ति बनी रहीं थी.
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