शांतनु का पूरा नाम शांतनु व्यंकटेश नायडू है. शांतनु टाटा ट्रस्ट के सबसे यंगेस्ट असिस्टेंट मैनेजर है, तथा रतन टाटा और शांतनु बहुत अच्छे मित्र भी थे.
शांतनु नायडू का जन्म पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था. इनके पिता का नाम व्यंकटेश नायडू है. जो टाटा मोटर्स में इंजीनियर है. शांतनु नायडू ने सोनियाबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से बी. टेक. तथा कॉर्नेल विश्वविद्यालय न्यूयॉर्क, अमेरिका से एमबीए किया है.
शांतनु नायडू एक एनिमल लवर और ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट भी है. इन्होने मोटोपोज,ऑन योर्स स्पार्क्स और द गुड़फेलोज जैसी कई समाजसेवी सस्थाओं की स्थापना की है, शांतनु नायडू अपने जीवन का उद्देश्य लोगो की मदद करना तथा समाज सुधार करना बताते है.
इंजीनियरिंग करने के बाद शांतनु ने सन 2009 से 2010 तक टाटा टेक्नोलॉजी में इंटर्नशिप की, जिसके बाद सन 2014 में उन्हें टाटा एलेक्सी में नौकरी मिल गई, जहाँ शांतनु ने 2016 तक डिजाइन इंजीनियर के रूप में कार्य किया. शांतनु नायडू को स्ट्रीट डॉग्स से बड़ा लगाव है.
एक बार किसी दर्दनाक दुर्घटना को देख कर शांतनु को बहुत दुःख हुआ तथा उन्होंने इनके किये कुछ करने की ठान ली. फिर अपने इसी संकल्प के लये मोटोपॉज की उन्होंने स्थापना की, जिसके अंतर्गत उन्होंने डॉग्स के लिए एक ऐसा नैक कालर बनाया, जो रात में भी चमके और वाहन चालक को सामने आने वाले किसी डॉग की पहचान हो सके. यह उन्होंने स्ट्रीट डॉग्स की वजह से होने वाली सड़क दुर्घटना को कम करने के लिए किया.
लेकिन अपने इस महान उद्देश्य को आगे जारी रखने के लिए शांतनु नायडू को जब फंड्स की जरुरत पड़ी, तो उनके पिता ने अपनी कम्पनी के मालिक सर रतन टाटा को पत्र लिखने और मदद मांगने का सुझाव दिया. रतन टाटा ने शांतनु नायडू के इस पत्र का जवाब भी दिया और शांतनु के काम की सराहना भी की.
साथ ही रतन टाटा ने शांतनु को मिलने के लिए मुंबई बुलाया. यहीं पर पहली बार शांतनु की मुलाकात रतन टाटा सर से हुई. इसी मुलाकात से शांतनु नायडू और रतन टाटा की फ्रेंडशिप की भी शुरुआत भी हुई.
सन 2016 में शांतनु ने जीएमएटी की परीक्षा पास करके कॉर्नेल यूनिवर्सिटी न्यूयॉर्क में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी की, अपनी एमबीए की इस पढ़ाई के दौरान शांतनु ने जॉनसन लीडरशिप केस कॉम्पिटिशन जीता और हेममीटर एंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड भी प्राप्त किया. शांतनु ने जॉनसन के सोशल मीडिया के राजदूत के रूप में भी कार्य किया, साथ ही और भी कई उपलब्धिया प्राप्त की.
जून 2017 में शांतनु ने वापस लौटकर बिजनेस स्ट्रेटेजी इंटर्न के रूप में टाटा ट्रस्ट्स ज्वाइन किया. सन 2018 में रतन टाटा खुद शांतनु के स्नातक डिग्री के दीक्षांत समारोह में भी शामिल हुए थे. भारत लौटने के बाद रतन टाटा ने शांतनु को टाटा ट्रस्ट में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद के लिए प्रस्ताव दिया, जिसको शांतनु ने ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लिया.
एक इंटरव्यू में शांतनु नायडू ने खुद बताया था कि उन उन्होंने रतन टाटा सर के साथ बाल कटवाने से लेकर फ़िल्में देखने तक कई कामों में काफ़ी समय साथ बिताया है. शांतनु ने रतन टाटा जी का इंस्टाग्राम अकाउंट भी बनाया था, जिस पर रतन टाटा अपनी और अपने कुत्तों की पुरानी तस्वीरें शेयर करते थे.
शांतनु ने बताया कि रतन टाटा को प्यार से वह मिलेनियल डंबलडोर कहकर बुलाते थे, जबकि रतन टाटा जी शांतनु को मिलेनियल फ्रेंड बोलते थे. उम्र का इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद भी दोनों को एकदूसरे का साथ बहुत पसंद था, और हो भी क्यों न आखिर दोनों लाइक माइंडेड लोग समाज और जीवों के प्रति सहानुभूति सबसे पहले रखते थे. शांतनु ने रतन टाटा के नेतृत्व में कई जनहित संस्थाओ की भी स्थापना की है.
शांतनु ने सन 2020 में ऑन योर स्पार्क्स नामक संस्था की स्थापना की, यह संस्था युवा उद्यमियों का उनके व्यवसाय को बढ़ाने में मार्गदर्शन करती है.
सन 2022 में शांतनु को टाटा ग्रुप में आरएनटी में महाप्रबंधक के रूप में चुना गया था, इसी साल शांतनु ने द गुडफेलो संगठन की नीव रखी थी, जो वरिष्ठ नागरिको को अकेलेपन से लड़ने में हेल्प करता है. शांतनु ने आई केम अपॉन ए लाइटहाउस नामक किताब भी लिखी है, जो रतन टाटा के शार्ट मेमॉयर ऑफ़ लाइफ पर आधारित है.
9 अक्टूबर 2024 को 86 वर्ष की आयु में जब रतन टाटा जी का देहांत हुआ तो शांतनु नायडू को बड़ा गहरा दुःख हुआ, जिसके बाद शांतनु ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर रतन टाटा जी के लिए अपनी श्रद्धांजलि के रूप में एक भावुक पोस्ट भी किया था.
शांतनु नायडू का नाम रतन टाटा ने अपनी वसीयत में भी शामिल किया था, जिससे यह पता चलता है कि युवा शांतनु नायडू और रतन टाटा के बीच दोस्ती का कितना खास रिश्ता था. अपनी वसीयत में रतन टाटा ने शांतनु नायडू के उनके बिजनेस गुडफेलो में अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी थी और उनके एजुकेशन लोन को भी माफ कर दिया था. अपनी वसीयत में रतन टाटा ने शांतनु नायडू के साथ विकसित हुए अपने गुरु-शिष्य संबंध को बखूबी निभाया था.