डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वो सीनियर साइंटिस्ट हैं जिन्होंने भारत के स्पेस मिशनस के लांच पैड के क्रिएशन में इम्पोर्टेन्ट रोल प्ले किया. डॉ. रितु करिधल की जीवन यात्रा कुछ ऐसी रही जिसके लिए उन्हें भारत की रॉकेट महिला के रूप में ख्याति प्राप्त हुई. हाई डिटर्मिनेसन और एजुकेशनल एक्सेलेन्स का डॉ. रितु करिधल एक इंस्पिरेशनल एग्जाम्पल है.
चंद्रयान-3 मिशन में लगभग 54 महिला इंजीनियर और वैज्ञानिक शामिल रही, जिनमें डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर के रूप में कई इम्पोर्टेन्ट रेस्पॉन्सिबिलिटीज निभाते दिखी. मिशन चंद्रयान -3 को सीनियर साइंटिस्ट डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव ने बखूबी लीड किया.
डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था. स्पेस साइंस के प्रति उनकी विशेष रूचि थी और उनको इसरो व नासा की न्यूज़ रिपोर्ट्स की पेपर कटिंग कलेक्ट करने का विशेष शौंक था.
लखनऊ यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएसन कंप्लीट करने के बाद स्पेस साइंस के लिए डॉ. रितु करिधल का इंटरेस्ट इनको भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) ले गया, जहां से इन्होने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली और फिर भौतिकी में ही पीएचडी करने चली गई. यहाँ पर डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव को पीएचडी शुरू किये अभी मात्र छह महीने ही हुए थे कि उन्होंने ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) एग्जाम क्लियर कर लिया जो उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ.
इस ऑपर्चुनिटी का पूरा लाभ उठाते हुए डॉ. रितु करिधल ने अपनी पीएचडी की पढ़ाई छोड़कर अंतरिक्ष अन्वेषण में उतरने का निर्णय लिया. अपनी मेंटर प्रोफेसर मनीषा गुप्ता की गाइडेंस में उन्होंने सन 1997 में इसरो ज्वाइन किया.
यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) में, डॉ. रितु करिधल का एजुकेशनल बैकग्राऊंड और आईआईएससी में एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी परफॉरमेंस उन्हें चैलेंजिंग रोल्स के लिए मजबूत बना चुका था, जिसके बाद डॉ. रितु करिधल ने अपने कांफिडेंस के दम पर ऐसे कई एडवांस्ड प्रोजेक्ट्स को बखूबी कम्प्लीट किया जिनपर आमतौर पर सीनियर साइंटिस्ट ही काम करते थे.
TEDx पर एक इंटरव्यू में, डॉ. डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव ने स्वयं बताया था कि सीनियर साइंटिस्ट्स के मौजूद होते हुए भी उनको कई एडवांस प्रोजेक्टस पर अप्पॉइंट किया जा रहा था जिसकी वजह से उनकी इनरसेल्फ़ और कॉन्फिडेन्स में काफी बढ़ोतरी हुई और इस एरिया में उनके डैडीकेसन को और बढ़ा दिया.
डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव की लीडरशिप की जर्नी, मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) - मंगलयान-1 के डेप्युटी डायरेक्टर की पोस्ट पर अपॉइंटमेंट के साथ स्टार्ट हुई. इस हिस्टोरिकल मिशन मंगलयान-1 को 5 नवंबर, 2013 को लॉन्च किया जो कि भारत का पहला इंटरप्लेनेट्री एफर्ट था, जिसमें उन्हें सफलता मिली.
इसके बाद 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किए गए चंद्रयान -2 के लिए डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव को मिशन डायरेक्टर की रेस्पॉन्सिबिलिटी दी गयी थी. जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था.
चंद्रयान -3 मिशन को लीड करना डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव के सक्सेसफुल करियर में एक नया माइलस्टोन साबित हुआ. 14 जुलाई, 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रयान -3 लॉन्च किया गया, जो 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के साउथ पोल पर सक्सेस्फुल्ली लैंड हुआ और इतिहास में भारत का नाम दर्ज हो गया.
सीनियर इसरो साइंटिस्ट डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव के डेडिकेसन और समर्पण की सभी सराहना करते है, डॉ. रितु करिधल को 2007 में, भारतीय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा इसरो यंग साइंटिस्ट अवार्ड दिया गया था, उन्हें सोसाइटी ऑफ इंडियन एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज एंड इंडस्ट्रीज (SIATI) द्वारा सन 2015 में मिशन ऑफ़ मार्स के लिए इसरो टीम अवॉर्ड, एएसआई टीम अवार्ड, और वीमेन अचीवर्स इन एयरोस्पेस (2017) जैसे अनेको पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका हैं.
डॉ. रितु करिधल को उनके अल्मा मेटर, लखनऊ विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया था. उनको यूके की महिला और जेंडर इक्वलिटी मिनिस्टर लिज़ ट्रस द्वारा 2021 में G7 की अध्यक्षता के दौरान जेंडर इक्वलिटी एडवाइजरी कमेटी (जीईएसी) का सदस्य बनाया गया.
डॉ.करिधल के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 20 से अधिक रिसर्च पेपर पब्लिश किए जा चुके हैं.