सावित्री जिंदल की गिनती भारत की सबसे अमीर महिलाओं में की जाती है. फोर्ब्स बिलियनेयर लिस्ट में जिंदल ग्रुप की अध्यक्ष सावित्री जिंदल अक्सर भारत की सबसे अमीर महिलाओं की लिस्ट में टॉप पर रहती हैं.
सावित्री जिंदल का जन्म असम के तिनसुकिया में 20 मार्च 1950 को हुआ था. यह वो समय था जब लड़कियों को पढ़ाना लिखाना जरूरी नहीं समझा जाता था. इसीलिए सावित्री जिंदल भी कभी स्कूल नहीं गई थी और महज 20 साल की उम्र में उनकी शादी ओमप्रकाश जिंदल के साथ हो गयी. यही नहीं इस शादी के समय ओमप्रकाश जिंदल की उम्र 40 वर्ष थी.
ओमप्रकाश जिंदल, जिंदल ग्रुप के चेयरमैन और एक बड़े उद्योगपति थे. व्यापार जगत में ओमप्रकाश जिंदल की छवि काफी मजबूत थी. शादी के बाद उस समय की अधिकांश महिलाओं की तरह ही सावित्री जिंदल भी एक ग्रहणी के रूप में परिवार संभालने में लगी रहती थी. विवाह के पश्चात सावित्री जिंदल की ओमप्रकाश जिंदल से नौ संताने हुई थी.
सावित्री जिंदल से शादी के बाद ओमप्रकाश जिंदल की किस्मत और भी चमक उठी. न केवल बिजनेस बल्कि राजनीतिक जगत में भी ओमप्रकाश जिंदल ने पकड़ बना ली थी. पहले ओमप्रकाश जिंदल बिहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और फिर हरियाणा की राज्य सरकार में मंत्री भी बने.
सब कुछ ठीक थक चल रहा था, मगर सावित्री जिंदल की डेस्टनी में कुछ और ही लिखा था. क्योंकि अचानक सन 2005 में ओमप्रकाश जिंदल की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई. सावित्री जिंदल पर हटात मानों मुसीबतों का पहाड़ टूट गया हो.
सावित्री जिंदल ने शादी के बाद से 35 सालों तक एक ग्रहणी के रूप में अपना घर संभाला था. मगर ओमप्रकाश जिंदल की मृत्यु के वह अकेली पड़ गई और अब परिवार की भी सभी जिम्मेदारियां उन पर आ गई थी. ओमप्रकाश जिंदल की विरासत के रूप मरीन पारिवारिक बिजनेस और सियासत को संभालना सावित्री जिंदल के लिए कोई आसान काम नहीं था. मगर इस कठिन समय में सावित्री जिंदल ने अपनी जुझारू शक्ति का प्रदर्शन करते हुए पीछे न हटने का निर्णय लिया और हिम्मत करते हुए बिजनेस के साथ ही सियासत में भी कदम रखा. धीरे-धीरे सावित्री जिंदल ने बिजनेस और सियासत की बारीकियां समझते हुए कामियाबी की और बढ़ना शुरू कर दिया.
सावित्री जिंदल ने जिंदल ग्रुप की चेयरपर्सन के रूप में उम्दा काम करते हुए, एक सक्सेसफुल बिजनेसवुमन के तौर पर खुद को स्थापित किया। अपनी पहचान बना ली थी. फिर कोरोना काल में जब सारा देश संकट के दौर से गुजर रहा था और बहुत सारे कारोबारियों को बिजनेस में बहुत बड़े घाटो से गुजरना पड़ा तो जिंदल ग्रुप और सावित्री के बिजनेस को भी घाटे से गुजरना पड़ा और उनका टर्नओवर भी इस दौरान 50% तक कम हो गया था.
घाटे के इस संघर्षील दौर में सावित्री जिंदल ने जिंदल ग्रुप को घाटे से निकालने के लिए लगभग दो सालों तक बड़ी मेहनत की और इसका फायदा जल्द ही उनकी कंपनी को होने लगा. इस तरह सावित्री जिंदल और जिंदल ग्रुप फिरसे सही पटरी पर आ गए.
सावित्री जिंदल के बड़े बेटे पृथ्वीराज, जिंदल सॉ कंपनी के चेयरमैन हैं. सज्जन जिंदल के पास जेडब्लूएस कंपनी की जिम्मेदारी है. तो परिवार के सबसे छोटे बेट नवीन जिंदल फेमस बिजनेसमैन है और जिंदल स्टील के चेयरमैन हैं.