भगवान विष्णु जी के दस अवतारों में पहला मत्स्य अवतार था, इसी मत्सय अवतार से जुडी एक कथा प्रचलित है कि मत्स्य अवतार के समय पृत्वी पर जल प्रलय आ गयी थी. इसी समय, एक बार राजा मनु के साथ सप्तऋषि एक विशाल नाव में सवार होकर जा थे और तब मत्स्य अवतार में भगवान विष्णु ने इन सभी के प्राणों की रक्षा की थी.
सप्तऋषियों के नाम का जाप हर रोज करना बहुत अच्छा माना जाता है, और यह हमारी परंपरा में भी प्रचलित है. ऐसी ही एक परंपरा हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को निभाई जाती है जिसे ऋषि पंचमी कहा जाता है. ऋषि पंचमी के दिन व्रत-उपवास करने और सप्तऋषियों की पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है.
शास्त्रों में सप्तऋषियों से जुड़े कई प्रचलित श्लोकों में से एक -
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
दहंतु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः॥
में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वसिष्ठ नामक सप्त ऋषियों के नाम बताए गए हैं. इनके नामों के जाप से सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं.
पहले ऋषि हैं कश्यप - कश्यप ऋषि की 17 पत्नियां थी. कश्यप ऋषि की अदिति नामक पत्नी से सभी देवता और दिति नाम की पत्नी से दैत्यों की उत्पत्ति मानी गई है. शेष पत्नियों से भी अलग-अलग जीवों की उत्पत्ति हुई है.
दूसरे ऋषि हैं अत्रि - त्रेतायुग में भगवान् श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी वनवास के समय में अत्रि ऋषि के आ़़श्रम में रूके थे. ऋषि अत्रि की पत्नी माता अनसूया थी. ऋषि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र हुए भगवान दत्तात्रेय.
तीसरे ऋषि हैं भारद्वाज - ऋषि भारद्वाज के पुत्र हुए है द्रोणाचार्य. भारद्वाज ऋषि ने ही आयुर्वेद सहित कई ग्रंथों की रचना की थी.
चौथे ऋषि हैं विश्वामित्र - ऋषि विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र की रचना की थी. भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के गुरु विश्वामित्र ही श्रीराम और लक्ष्मण जी को सीता जी के स्वयंवर में ले गए थे. इन्ही ऋषि विश्वामित्र की तपस्या को स्वर्ग की अप्सरा मेनका ने भंग की थी.
पांचवें ऋषि हैं गौतम - माता अहिल्या, ऋषि गौतम की पत्नी थीं. गौतम ऋषि ने ही अपनी पत्नी अहिल्या को शाप देकर पत्थर बना दिया था. फिर भगवान् श्रीराम की कृपा से माता अहिल्या ने फिर से अपना रूप प्राप्त किया था.
छठे ऋषि हुए हैं जमदग्नि - जमदग्नि ऋषि और रेणुका के पुत्र हैं भगवान परशुराम जी. परशुराम जी ने अपने पिता ऋषि जमदग्नि की आज्ञा से ही माता रेणुका का सिर काट दिया था. इससे जमदग्नि ऋषि प्रसन्न हुए और पुत्र परशुराम को वरदान मांगने के लिए कहा था. तब परशुराम ने अपने वर में माता रेणुका का जीवन मांग लिया. ऋषि जमदग्नि ने फिर अपने तप के बल से माता रेणुका को फिर से जीवित कर दिया था.
सातवें ऋषि हैं वशिष्ठ - त्रेता युग में ऋषि वसिष्ठ राजा दशरथ के चारों पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के गुरु थे.
तो ये है सप्तऋषि और उनके संक्षिप्त जीवन परिचय से जुडी प्रमुख घटनाएं.