प्रोफेसर शैलजा पैक महान इंडो अमेरिकन प्रोफेसर है, जिन्हे अक्टूबर 2024 में को ओहियो से 10 मैकआर्थर फेलो में से एक के रूप में चुना गया.
प्रोफेसर शैलजा पैक सिनसिनाटी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठित शोधकर्ता है जिनका सब्जेक्ट हिस्ट्री है. सिनसिनाटी शहर और सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में फेलोशिप की शुरुआत सन 1981 में हुई थी और तब से इस प्रतिष्ठित पुरस्कार मैकआर्थर फेलो के लिए सिनसिनाटी शहर और यूनिवर्सिटी की शैलजा पैक पहली प्राप्तकर्ता बनी.
शैलजा पैक का जन्म महाराष्ट्र के पोहेगांव में एक दलित परिवार में हुआ था. शैलजा पैक अपने माता पिता की चार बेटियों में से एक थीं. उनके जन्म के बाद शैलजा पैक का परिवार पोहेगांव से पुणे चला गया था. पुणे में शैलजा पैक का पालन-पोषण येरवडा की झुग्गी बस्ती में एक कमरे के घर में हुआ. अपनी दयनीय स्थिति और एक मामूली से परिवार से आने बावजूद, शैलजा पैक के पैरेंट्स, विशेष रूप से उनके पिता, शिक्षा के बड़े समर्थक थे, उन्होंने अपनी सभी बेटियों को शैक्षणिक उपलब्धि और सामाजिक चुनौतियों को फेस करने के लिए फ्लेक्सिबल रहने का महत्व समझाया. अपने पिता की इसी सीख से प्रोफेसर शैलजा पैक
ने ये बड़ी कामयाबी हासिल की.
शैलजा पैक ने सन 1994 में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से बीए और 1996 में एमए की डिग्री हासिल करते हुए पोस्ट ग्रेजुएशन किया. फिर सन 2005 में, शैलजा पैक पहली बार एमोरी विश्वविद्यालय से फेलोशिप पर अमेरिका गई और सन 2007 में वारविक विश्वविद्यालय से उन्होंने पीएचडी पूरी की.
प्रोफेसर शैलजा पैक ने यूनियन कॉलेज में 2008 से 2010 तक हिस्ट्री की विजिटिंग असिस्टेंट प्रोफेसर और येल विश्वविद्यालय में 2012 से 2013 में दक्षिण एशियाई इतिहास की पोस्टडॉक्टरल एसोसिएट व विजिटिंग असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अकादमिक पदों पर काम किया. 2010 से ही प्रोफेसर शैलजा पैक सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में संकाय सदस्य भी रही हैं. 2024 में जब प्रोफेसर शैलजा पैक को मैकआर्थर फेलोशिप के लिए चुना गया था, तो वह इतिहास की चार्ल्स फेल्प्स टैफ्ट प्रतिष्ठित शोध प्रोफेसर और सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में महिला, लिंग और कामुकता अध्ययन, एशियाई अध्ययन और समाजशास्त्र में एक सहायक के रूप में सेवाऐं दे रही थी.