फुलेरा दूज का पर्व हिंदी पंचांग के फाल्गुन में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है.
फाल्गुन मास का सबसे अधिक पवित्र दिन माने जाने वाले फुलेरा दूज के दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है. यह पर्व उत्तर भारत के मथुरा-वृंदावन शहरों में प्रेम पर्व के रूप में सेलेब्रेट किया जाता है, और प्रेम से भरे होने के कारण ही इसे सबसे शुभ दिन माना जाता है. सर्दियों के मौसम की समाप्ति के दिनों में फुलेरा दूज को विवाह के लिए साल का अंतिम अबूझ व शुभ मुहूर्त भी माना जाता. इस दिन शादियों की धूम रहेगी।
भगवान श्री कृष्ण को समर्पित यह पर्व उनकी भूमि कही जानें वाले क्षेत्रों मथुरा, वृंदावन, और उत्तर भारत के कृष्ण मंदिरों में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है. क्योंकि उत्तर भारत में फुलेरा दूज के पर्व को भगवान श्रीकृष्ण के पर्व के रुप में मनाया जाता है. इसलिए इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा को अधिक महत्व दिया जाता है. फुलेरा दूज को रंगों का पर्व भी माना जाता है और फुलेरा दूज के दिन श्री कृष्ण मंदिरों का श्रृंगार भी रंग-बिरंगे फूलों से किया जाता है. फुलेरा दूज के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा उन्हें गुलाल अर्पित करके की जाती है.
राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रतीक के रूप उनके भक्त इस दिन फूलों की होली भी खेलते हैं, जिससे व्यक्ति स्वाभाविक रूप से प्रकृति से जुड़ जाता हैं.
फुलेरा दूज का प्रेम के रस में भीगा पर्व का हर क्षण दोष मुक्त होता है, अतः इस दिन कोई भी शुभ एवं मांगलिक कार्य किया जा सकता है. आज भी भारत के ग्रामीण अंचलों में फुलेरा दूज के दिन संध्या काल में घरों को सुंदर रंगोली से सजाया जाता है.
फाल्गुन मास में वसंत के बाद आने वाला यह फुलेरा दूज का त्यौहार एक ऐसे समय में आता है, जब मन की भावनाओं को प्रफुल्लित करनें वाली सरसों के पीले फूलों की सुगंध अपने चरम पर होती है. साथ ही शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड समाप्ति की ओर बढ़ने लगती है, इसलिए सूर्य की गुनगुनाती धूप भी शरीर एवं मन दोनों को प्रसन्नता प्रदान करती है.
हरियाली एवं रंगबिरंगे फूलों से भरे खेतों को देखकर जब मानव मन-मयूर नृत्य करने लगता है, तो यह बंसत ऋतु के चरम का फुलेरा पर्व ही होता है. किसानों के घरों में बच्चे, किशोरवय युवक-युवतियां इस दिन अपने खेतों में उगे सरसों एवं फुलवारियों के फूलों से घर में रंगोलीयां बनाकर त्यौहार मनाते है.
भारत जोकि एक विविधता से भरा प्रकृति प्रेम से जुड़ा वृहद सांस्कृतिक देश है, अपनी सुन्दर सभ्यता का विकास इन्ही व्रत त्योहारों के माध्यम से करता है, और वैसे तो ये सभी त्योहार अपने आपमें महत्वपूर्ण होते हैं, किंतु इन्ही में से एक फुलेरा दूज का पावन पर्व में मन, रंग, खुशी, और प्रेम से सराबोर हो जाता है.