pawan kalyan ek safar filmon se rajneeti ka

पवन कल्याण एक सफर फिल्मो से राजनीति का

पवन कल्याण फिल्मो से लेकर राजनीति तक अपनी एक विशेष पहचान रखते है और जनसेना पार्टी के अध्यक्ष है. पवन कल्याण लोगो से मिलना बहुत पसंद करते हैं और कई बार लोकल मेट्रो में सफर करते हुए भी देखे गए है. साउथ फिल्मों के ये मशहूर एक्टर पवन कल्याण फिल्म स्टार चिरंजीवी के छोटे भाई है और रामचरण इनके भतीजे है. 

राजनीति में आने से पहले पवन कल्याण एक मशहूर भारतीय फ़िल्म अभिनेता थे. पवन कल्याण कई तेलुगू फिल्मों में काम कर चुके हैं. पवन कल्याण ने अभिनय की शुरुआत तेलुगू फ़िल्म अककड़ा अम्माई इककड़ा अब्बाई से की थी. 

पवन कल्याण अपने साधारण रहन सहन के लिए भी जाने जाते है, सन 2023 में जब आन्ध्र सरकार ने मन्दिरो पर कानून लाने की कोशिश की तो पवन कल्याण ने इसका सामने आकर विरोध किया जिसके चलते तत्कालीन आंध्र सरकार को पीछे हटना पड़ा था.

राजनीति में पवन कल्याण कोई मामूली नाम नही है. 2024 में जब भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और पवन कल्याण भाजपा के साथ एन डी ए गठबंधन के मुख्य घटक दल बने तो उन्होंने साफ़ कहा कि मैं मंत्री बनने नहीं आया हूं. मैं श्री नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने आया हूं. मुझे मंत्री पद मिले चाहे न मिले, मैं मोदी जी के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा. हमें केवल मोदी जी मतलब हैं.

पवन कल्याण की अध्यक्षता वाली जनसेना पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में 100% सफलता प्राप्त करते हुए एक इतिहास रचा, जिसमें उनकी पार्टी 2 लोक सभा सीटों पर चुनाव लड़ी और दोनों सीटों पर भरी मतों से जीत दर्ज की. 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ने 21  विधान सभा सीटों पर चुनाव में उम्मीदवार उतारे थे, जो कि सभी जीतकर विधायक बने. 

2024 के इन्ही लोकसभा चुनावों में खुद पवन कल्याण पीतमपुर निर्वाचन क्षेत्र से लड़ते हुए 70 हजार से ज्यादा मतों से जीतकर सांसद बने. 

पवन कल्याण मार्च 2014 में जन सेना पार्टी बना कर राजनीति में आए थे, मगर 2024 में आंध्र की राजनीति में कुछ ऐसी घटनाएं हुई कि पवन कल्याण एक दम सुपर एक्टिव मोड़ में आ गए और उन्होंने दो ऐसे महत्त्वपूर्ण और असंभव से दिखने वाले काम कर दिए कि 2024 के लोकसभा और आंध्र विधानसभा के सबसे प्रभावशाली राजनीतिज्ञों में पवन कल्याण का नाम आ गया तो वे दो काम थे, आंध्र प्रदेश में टीडीपी और भाजपा को करीब लाकर दोनो में गठबंधन करवाना और तेलंगाना व आंध्र प्रदेश दोनो राज्यो में भाजपा के साथ मिलकर कोंग्रेस हटाओ देश बचाओ के नारे को जान सामान्य तक पहुंचाना.

2024 के चुनावों में पवन कल्याण के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां तेलंगाना क्षेत्र की 17 में से 8 सीट भाजपा जीत गई वहीं  आंध्र प्रदेश की भी 25 में से 3 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की. साथ ही पवन कल्याण ने ही 16 सीटें टीडीपी को भी जिताने में सहयोग किया। जबकि पवन कल्याण ना तो भाजपा से आते है और ना टीडीपी से है बल्कि उनका जान सेना पार्टी के नाम से अपना एक अलग राजनीतिक संगठन है.

एक ऐसा व्यक्ति जिसकी अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी है, लेकिन वह कांग्रेस को दक्षिण भारत में रोकने के लिए भाजपा और टीडीपी को साथ लाकर ना केवल गठबंधन कराता है बल्कि भाजपा की तेलंगाना जैसे क्षेत्र में मदद भी करता है जहां भाजपा का जनाधार बहुत ही कम था. पवन कल्याण, नरेंद्र मोदी और चंद्रबाबू नायडू की जुगलबंदी का ये परिणाम हुआ कि 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में 175 विधानसभा सीटों में से टीडीपी को 135 तो भाजपा को 8 सीटे मीली और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी को लड़ी गयी सभी 21 सीटों पर जीत मिली। 

आंध्र प्रदेश में इन चुनावों में पवन कल्याण ने ज्यादा कुछ नही किया बस कुछ रैलियों में एक काम किया। यूपी के मुस्लिम तुष्टिकरण की तरह आंध्र के चर्च यानी ईसाइयो के तुष्टिकरण को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए उठाया और कहा कि राजनीति के नाम पर सनातन के साथ इतना भेदभाव क्यों। जो सुविधा सरकार चर्च को देती है वो बाकी सबको क्यों नही देती। पवन कल्याण के इस भाषण का प्रभाव लोगो पर कितना पड़ा इस बात का अंदाजा इनके गठबंधन को मिली सीटों से आसानी से लगाया जा सकता है. अनुमान लगा लो। कीस दल को कीतनी सीटे मीली ये मैं आप को ऊपर बता चुका हूं।

पवन कल्याण ने गठबंधन बनाने पर ही इतना ध्यान इसलिए दिया क्योंकि उनका लक्ष्य कोंग्रेस को रोकना था और वह अच्छी तरह से जानते थे कि बिना गठबंधन किये आंध्र में कोंग्रेस को रोक पाना असंभव होगा इसलिए पवन कल्याण ने भाजपा, टीडीपी और जनसेना का आपस मे गठबंधन करवाया जो अंततः सफल साबित हुआ. साउथ इंडिया में कहा जाता था कि भाजपा का कोई जनाधार नहीं है लेकिन 2024 के चुनावों में जिस तरह से मोदी जी के नाम की सुनामी आंध्र प्रदेश में चली है उसका क्रेडिट पवन कल्याण को ही जाता है.

2024 में मोदी जी ऐन डी ए गठबंधन की सरकार बनाने में सफल रहे तो उसमें पवन कल्याण का बहुत बड़ा योगदान है, यदि यह आंध्र प्रदेश में पवन कल्याण मैक्सिमम सीटें नहीं दिलवा पाते तो शायद मोदी जी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री भी नहीं बन पातें. सरकार बनवाने के साथ-साथ इन्होंने जब यह कहा कि श्री नरेंद्र मोदी जी हमारे गार्जियन है, हम उनसे प्रेरणा प्राप्त कर आगे बढ़ रहे हैं तथा सही समय पर सही नेतृत्व हमारे देश को मिला इसलिए आज हम भारत को विश्व गुरु बनाने जा रहे हैं. तो पवन कल्याण केवल साउथ ही नहीं पूरे भारत के हीरो बनकर उभरे.

जब गठबंधन सरकार में सहयोगी पार्टियां मंत्री पद की तलाश में थी तो पवन कल्याण ने खुद सामने आके कहा था कि मुझे किसी भी पद का कोई लालच नहीं है, मैं भारत को विश्वगुरु बनते हुए देखना चाहता हूं, मैं वहीं भारत चाहता हूं जिसे सोने का चिड़िया कहा जाता था. हमें विपक्ष वाले प्रधानमंत्री पद का ऑफर देंगे तब भी कांग्रेस के साथ नहीं जाऊंगा. मोदी जी ने देश के लिए जो किया है वो पूरी दुनिया ने देखा है. हम मोदी जी के लिए बड़े से बड़ा ऑफर भी ठुकरा सकते हैं. 

12 जून 2024 को पवन कल्याण ने चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार में उप-मुख्यमंत्री पद की शपत ली. पवन कल्याण के शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित एन डी ए गठबंधन के कई बड़े नेता शामिल हुए.  

नमन है पवन कल्याण जैसे महापुरुषों जो देश हित में निजी स्वार्थों की तिलांजलि दे देते है. 

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