राकेश कुमार मशहूर भारतीय पैरालिंपियन तीरंदाज हैं वह पुरुषों के व्यक्तिगत कंपाउंड ओपन में प्रतिस्पर्धा करते हैं. जम्मू - कश्मीर से आने वाले राकेश कुमार श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के खेल परिसर में प्रशिक्षण लेते थे और प्रेक्टिस करते थे. राकेश कुमार के कोच कुलदीप वेदवान का भी उनके करियर को ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. कुलदीप वेदवान से राकेश कुमार की मुलाकात मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर में ही हुई थी जो परिसर से जुड़े एक तीरंदाजी कोच थे. कुलदीप वेदवान एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने राकेश कुमार के जीवन को पूरी तरह बदल दिया.
राकेश कुमार का जन्म 13 जनवरी 1985 को हुआ था. 33 साल की उम्र में पैरा तीरंदाजी में अपना करियर शुरू करने वाले राकेश कुमार ने एक साल बाद ही अपना पहला गोल्ड मैडल जीत लिया था और उसके बाद लगातार बेहतरीन परफॉरमेंस देते रहे है. हालांकि बिलकुल शुरूआत में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं था और पहले राष्ट्रीय खेलों में वह 17वें स्थान पर थे, इसके बाद उन्हें पता चल गया कि मुझे कितनी मेहनत करनी है और उन्होंने जी जान लगाकर मेहनत की.
राकेश की उम्र अन्य साथी खिलाड़ियों से काफी ज्यादा है और वह उनसे काफी बड़े हैं, हालांकि राकेश कुमार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. वह भले ही कितनी भी देर से सोए हों, लेकिन रोज सुबह पांच बजे उठ जाते हैं. सामान्य दिनों में राकेश कुमार 9-10 बजे तक सो जाते हैं और सुबह उठकर 1-2 किलोमीटर व्हीलचेयर चलाते हैं. साथ ही कुछ सामान्य योगासन करते हैं. अपनी डाइट का भी राकेश कुमार पूरा ध्यान रखते हैं और मीठा नहीं खाते हैं, इसीलिए उनका पसंदीदा खाना वेज बिरयानी है.
एक किसान के बेटे राकेश कुमार, पहले एक प्लंबर थे और एक सामान्य व्यक्ति के रूप से अपना जीवन जी थे. तभी इनके साथ एक हादसा हुआ और इनके पैरों ने काम करना बंद कर दिया. जिसके बाद शुरुआत में उन्हें बहुत परेशानी उठानी पड़ी, लेकिन बाद में उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि उनको अपना जीवन अब व्हीलचेयर पर ही कटना है.
वर्ष 2018 में यूरोपीय सर्किट के दूसरे चरण में टीम प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम का राकेश कुमार भी हिस्सा थे. 2019 में 5वें फज़ा पैरा तीरंदाजी विश्व रैंकिंग टूर्नामेंट में मिश्रित टीम स्पर्धा में भी राकेश कुमार कांस्य पदक जीतने में सफल रहे थे. सितंबर 2021 में, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राकेश कुमार को 2020 टोक्यो पैरालिंपिक में उनके प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया
राकेश कुमार ने टोक्यो, जापान में आयोजित 2020 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक में पहली बार भारत का नेतृत्व किया था. फरवरी 2021 में भी दुबई में आयोजित 7वें फ़ैज़ा पैरा तीरंदाजी विश्व रैंकिंग टूर्नामेंट के पुरुषों के कंपाउंड ओपन सेक्शन में राकेश कुमार ने स्वर्ण पदक जीता था. 2024 पेरिस पैरालम्पिक के समय राकेश कुमार भारत के सर्वोच्च रैंक वाले कंपाउंड तीरंदाज थे, उस समय उनकी विश्व रैंकिंग ग्यारहंवी थी.
राकेश कुमार खुद कहते है कि जब आप पदक जीतते हैं और तिरंगा लेकर मैडल लेने पहुंचते हैं तो जब राष्ट्रगान बजता है वह सबसे ज्यादा गर्व का पल होता है. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर को भी राकेश अपना आभार जताते हुए कहते है कि यह पहला ऐसा ट्रस्ट है, जिसने खेलों को इतना बढ़ावा दिया है. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर के खिलाड़ी 200 से ज्यादा पदक जीत चुके हैं. हमारे कोच न तो खुद छुट्टी लेते हैं और न ही लेने देते हैं. साल के सभी 365 दिन अभ्यास कराने का ही नतीजा है कि हम लगातार अच्छा कर रहे हैं.
2024 पेरिस पैरालम्पिक्स में विश्व तीरंदाजी में तीसरी रैंकिंग के साथ पहुंचे राकेश कुमार का सफर अभी शुरू हुआ है, और जब तक वह देश के लिए पैरालंपिक स्वर्ण नहीं जीत लेंगे, तब तक उनका सपना पूरा नहीं होगा. देश के लिए पैरा तीरंदाजी में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीत चुके राकेश कुमार का सपना देश के लिए पैरालंपिक स्वर्ण जीतना है.