न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में 11 नवम्बर 2024 को भारत के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आदि की उपस्थिति में पद व गोपनीयता की शपथ ली थी.
संजीव खन्ना को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई थी. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला. संजीव खन्ना से पहले डीवाई चंद्रचूड़ मुख्य न्यायाधीश थे.
जिस समय संजीव खन्ना को भारत का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया वह 64 वर्ष के थे. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में यह नियुक्ति छह महीने के लिए की गयी है और उनका कार्यकाल 13 मई 2025 को पूरा हो जायेगा. जिसके बाद उनको सेवानिवृत्त होना हैं.
संजीव खन्ना का जन्म दिल्ली में हुआ है और उन्होंने मॉडर्न स्कूल बाराखंभा रोड से स्कूलिंग के बाद सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएट किया था. दिल्ली विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कैंपस संजीव खन्ना ने लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई करके कानून के क्षेत्र में अपने प्रोफेशनल करियर का निर्माण किया.
न्यायाधीश संजीव खन्ना के पिता न्यायमूर्ति देव राज खन्ना भी दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे और उनकी मां सरोज खन्ना लेडी श्री राम कॉलेज में लेक्चरर थीं. उनके चाचा न्यायमूर्ति हंस राज खन्ना भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे, हंस राज खन्ना ने ही आपातकाल के दौर में अल्पमत पर दिए गए अपने बड़े फैसले से ख्याति प्राप्त की थी. न्यायमूर्ति हंस राज खन्ना उस ऐतिहासिक फैसले में असहमति जताने वाले एकमात्र न्यायाधीश थे, जिसमें कहा गया था कि राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में न लिए जाने के अधिकार को निलंबित किया जा सकता है.
एक वकील के रूप में लम्बा कार्य करने के बाद सन 2005 में संजीव खन्ना दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप नियुक्त किये गए और सन 2019 में वह सर्वोच्च न्यायालय भेजे गए.
मुख्य न्यायाधीश बनाये जाने से पूर्व संजीव खन्ना कई बड़े ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की क्रेडेब्लिटी को बरकरार रखना और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को डेमोलिश करना प्रमुख है. चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाली खंडपीठ का भी संजीव खन्ना प्रमुख हिस्सा थे.