nisha bangre a flexible and dedicated personality

निशा बांगरे एक फ्लेक्सिबल और डेडिकेटेड पर्सनालिटी

निशा बांगरे मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से आने वाली एक फेमस आईएएस अधिकारी है जिन्होंने जनसेवा के प्रति अपने अटूट दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता से जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है. शिक्षा के अपने इंजीनियरिंग वाले दिनों से लेकर अपनी वर्तमान राजनीतिक आकांक्षाओं तक, निशा बांगरे की कहानी लचीलेपन और साहस की कहानी है.

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
निशा बांगरे ने सन 2010 से 2014 तक विदिशा इंजीनियरिंग कॉलेज, मध्य प्रदेश से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने गुरुग्राम, हरियाणा में एक मल्टीनेशनल कंपनी के लिए काम किया. हालांकि, उनका मन और अंतरात्मा राष्ट्रसेवा के लिए उत्साहित रहते थे.  इसीलिए वह सिविल सेवाओं में जाना चाह रही थी. आखिरकार निशा बांगरे ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) परीक्षा की तैयारी करने का फैसला लिया.

आईएएस अधिकारी बनना
सन 2016 में, निशा बांगरे ने पीएससी परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की और उनकी नियुक्ति मध्य प्रदेश में डिप्टी कलेक्टर के रूप में की गयी. एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट से एक आईएएस अधिकारी तक की निशा बांगरे की यात्रा उनके समर्पण और कड़ी मेहनत को दर्शाती है. छतरपुर जिले में लवकुश नगर के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के रूप में, निशा ने कर्तव्य, ईमानदारी और निष्ठा के साथ समुदाय की सेवा की.

टर्निंग प्वाइंट - सिविल सर्विसेज से राजनीती की ओर
निशा बांगरे के जीवन में अचानक सन 2023 में एक अप्रत्याशित मोड़ आया जब उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के संवैधानिक पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के पीछे का कारण एक अनुरोधित अवकाश को स्वीकार न किया जाना था. निशा बांगरे ने महसूस किया कि धार्मिक आयोजनों में उनकी भागीदारी पर प्रतिबंध की वजह से उनको अपने मौलिक अधिकारों से समझौता करना पड रहा है. जिसके लिए उन्होंने सिविल सर्विसेज के बजाय राजनीतिक माध्यमों से जनसेवा करने का निर्णय लिया ताकि वह ज्यादा प्रभावी ढंग से अपने कार्यों को अंजाम दे सके. 

चुनौतियां और दृढ़ संकल्प
निशा बांगरे को अपने पद से इस्तीफा देने में भी संघर्ष का सामना करना पड़ा जब सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने शुरू में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया, और निशा बांगरे को आंवला से भोपाल तक लगभग 300 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करनी पड़ी. इसी यात्रा के दौरान, उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया और जेल में एक रात भी बितानी पड़ी. यह घटना साबित करती है कि अपने संस्कारों विश्वासों और मध्य प्रदेश के लोगों के लिए लड़ने का निशा बांगरे का दृढ़ संकल्प अटूट है.

राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं
निशा बांगरे ने सन 2023 में मध्य प्रदेश चुनाव लड़ना चाहती थी. अब वह लोकतंत्र का हिस्सा बनना चाहती हैं और मानती हैं कि विधायक बनना उस दिशा में एक आवश्यक कदम है. हालांकि उन्होंने शुरू में कांग्रेस पार्टी से आंवला विधानसभा क्षेत्र के माध्यम से चुनाव लड़ने का लक्ष्य रखा था, लेकिन उनको टिकट नहीं दिया गया. जिसके बाद निशा बांगरे ने जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की भी बात कही. वह लोगों का प्रतिनिधित्व करना चाहती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना योगदान देना चाहती है.

निष्कर्ष 
निशा बांगरे की इंजीनियरिंग ग्रेजुएट से आईएएस अधिकारी बनने और अब राजनीतिक उम्मीदवार बनने की यात्रा कई लोगों के लिए प्रेरणा का काम करती है. उनका साहस, लचीलापन और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता सराहनीय है. निशा की कहानी जिस प्रकार से सामने आ रही है, आशा की जाती है कि मध्यप्रदेश राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर शीघ्र ही उनका प्रभाव देखने को मिलेगा.

तो निशा बंगरे की जीवन यात्रा दृढ़ संकल्प की शक्ति और किसी के दृढ़ विश्वास की खोज का एक वसीयतनामा है. उसकी कहानी किसी के लिए भी बाधाओं को दूर करने और अपने जीवन और समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करने वाली है.

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