महुआ मोइत्रा एक भारतीय राजनीतिज्ञ और निवेश बैंकर हैं, वह पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से लोकसभा सदस्य के रूप में भारतीय राजनीती में सक्रीय हैं.
महुआ मोइत्रा का जन्म 12 अक्टूबर 1974 को हुआ था.
महुआ मोइत्रा सन 2016 में पश्चिम बंगाल विधान सभा के करीमपुर क्षेत्र से विधायक बनी. फिर वह एआईटीसी की महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में कार्य करती रही है. महुआ मोइत्रा ने भारतीय लोकसभा चुनाव 2019 में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) पार्टी से चुनाव लड़ा और पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से सांसद बनी.
भारतीय संसद में महुआ मोइत्रा के भाषण अक्सर विवाद और लाइम लाइट में रहते है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से लेकर मशहूर बिजनेसमैन गौतम अडानी तक पर महुआ मोइत्रा अपने तीखे भाषणों से प्रहार करती रहती है. उनके द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को पागल या पप्पू बताए जाने पर दिए गए भाषण उनके तीखे तेवर दिखाते हैं और निशिकांत दुबे की फर्जी एमबीए डिग्री पर भी महुआ मोइत्रा ने कुछ सवाल खड़े किये.
अगस्त 2022 में, महुआ मोइत्रा ने बिलकिस बानो के रेपिस्टों की रिहाई को सपोर्ट किया.
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान मणिपुर मुद्दे पर भी महुआ मोइत्रा ने पीएम मोदी की आलोचना करते हुए उनसे सवाल पूछे.
14 अक्टूबर 2023 को जय अनंत देहाद्राई नाम के सुप्रीम कोर्ट के वकील ने महुआ मोइत्रा पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए एफआईआर के साथ सीबीआई को शिकायत भेजी थी.
इससे पहले महुआ मोइत्रा और जय देहाद्राई एक क्लोज्ड रिलेसन में रह चुके थे. मोइत्रा और देहाद्राई की दोस्ती में गैप्स के बाद कॉनफ्लिक्ट बढ़ गए और हेनरी नामक रॉटवीलर डॉग को लेकर विवाद हुआ, जिसे इन दोनों ने कथित तौर पर एक साथ मिलकर पाला और बड़ा किया था.
महुआ मोइत्रा के अनुसार रिलेसन बिगड़ने के बाद जय देहाद्राई कुछ भी करके उनसे रिवेंज लेना चाहते थे और इसलिए वह बीजेपी नेता निशिकांत दुबे से मिले. जय देहाद्राई ने निशिकांत दुबे को अपनी ओल्ड फ्रेंड महुआ मोइत्रा की कमिया और अपने कॉन्फ्लिक्ट बताये. और क्योंकि संसद में महुआ मोइत्रा के भाषणों और खुलासों से बीजेपी पहले से ही परेशान थी, तो जय देहाद्राई के रूप में उनको एक अच्छा पॉइंट मिल गया, जिसने बीजेपी को महुआ मोइत्रा को कंट्रोल करके घेरने में बीजेपी की हेल्प की.
सीबीआई और ED पर हमेशा विपक्षी पार्टी के नेताओं को घेरने के लिए प्रयोग करने की बात कही जाती है, बस उसके लिए इन तंत्रों को कही से कोई भी जानकारी या क्ल्यू मिल जाए, भले ही केस में कोई दम हो या न हो, ये संस्थाएं बस विपक्ष को घेरने के लिए एक पैर पर खड़ी रहती है. तो महुआ मोइत्रा ने भी ऐसा ही कहा जब तुरंत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई.
इसकी एक प्रति लोकसभा अध्यक्ष को भी सौंपी गई, जिन्होंने मामले को संसद की आचार समिति को भेज दिया. जय देहाद्राई ने महुआ मोइत्रा पर अदाणी ग्रुप के कम्पेटेटर ग्रुप समूह के प्रमुख दर्शन हीरानंदानी से अदाणी को टारगेट करने वाले प्रश्न संसद में पूछने के लिए धन और लाभ प्राप्त करने का आरोप लगाया. जिसे शुरुआत में तो हीरानंदानी ने इस एलिगेशन से सीधा डिनायल करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है और अदाणी के खिलाफ सवाल पूछने के लिए महुआ को कोई रिश्वत नहीं दी है.
लेकिन 19 अक्टूबर 2023 को, दर्शन हीरानंदानी सरकारी गवाह बन गए, और एक हलफनामे के जरिये दावा किया कि महुआ मोइत्रा को सच में लाभ मिला, और महुआ मोइत्रा ने उन्हें अपनी ओर से डायरेक्ट प्रश्न पोस्ट करने के लिए इंडियन पार्लियामेंट की ऑफिसियल वेबसाइट पर अपने अकाउंट का एक्सेस भी दिया था. महुआ मोइत्रा ने इन सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह सीबीआई और संसदीय आचार समिति की किसी भी तरह की जांच का स्वागत करती हैं.
हालांकि फिर कुछ ही दिनों बाद महुआ मोइत्रा ने खुद यह स्वीकार कर लिया कि उन्होंने ही प्रश्न टाइप करने के लिए दर्शन हीरानंदानी को अपने संसदीय अकाउंट का लॉगिन क्रेडेंशियल दिया था, और उनके दिए गए स्कार्फ, लिपस्टिक, कॉस्मेटिक्स आदि जैसे गिफ्ट्स भी लिए थे, लेकिन ये सब केवल एज ए फ्रेंड लिए गए थे. महुआ मोइत्रा ने कहा कि जो हुआ वह मैं आपको बिल्कुल सच बता रही हूं और दर्शन हीरानंदानी इससे ज्यादा कुछ भी साबित नहीं कर सकते हैं. क्योंकि मैंने उनसे कभी कोई रूपये, पैसे, नकदी या और कुछ भी लिया है.
लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने इसी कैश फॉर क्वेरी यानी पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में कार्रवाई करते हुए महुआ मोइत्रा को दिसंबर 2023 में संसद की सदस्यता से निलंबित कर दिया था.
इसके बाद टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा लोकसभा सदस्यता जाने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची जहाँ पर कोर्ट ने उनकी लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने की याचिका पर आदेश पारित करने से मना कर दिया. हालांकि कोर्ट ने लोकसभा सचिवालय से मांगा जवाब मांगते हुए मार्च के सेकण्ड वीक में सुनवाई की बात कही.
महुआ मोइत्रा के साथ ही संसद के 2024 के शीतकालीन सत्र के लिए लगभग 150 विपक्षी सांसदों को भी निष्काषित किया गया था.
2024 लोक सभा चुनावों में महुआ मोइत्रा एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस के सिम्बल पर चुनाव लड़ने के लिए उतरी जहां उनको इस बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके सामने बीजेपी ने राजमाता अमृता रॉय को कृष्णानगर लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है.