maa saraswati is the power of brahma ji

ब्रह्मा जी की शक्ति है माँ सरस्वती

पुराणों के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तो उन्हें विचार आया कि जब तक जीवों में बुद्धि नहीं होगी, ज्ञान नहीं होगा तो उनकी बनायी सृष्टि का कोई सार्थक अर्थ ही नहीं होगा, इसलिए ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना करते समय अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए, माँ सरस्वती जी को प्रकट किया, सरस्वती जी का प्राकाटय सभी प्राणियों को ज्ञान प्रदान करने के हेतु हुआ था. अतः माँ सरस्वती ब्रह्मा जी की शक्ति हैं जो स्त्री रूप में प्रकट हुई, अर्थात ब्रह्मा जी और माँ  सरस्वती दो नहीं है, वरन एक ही महाशक्ति के दो रूप हैं, इस सृष्टि रुपी लीला के लिए.

ब्रह्मा जी के द्वारा माँ सरस्वती जी को प्रकट करने का प्रयोजन था ज्ञान के साथ रचना की उत्पत्ति करना. माँ सरस्वती जी केवल मात्र ज्ञान प्रदान करने वाली शक्ति ही नहीं अपितु अत्यंत पवित्र और सुंदर स्वरूप वाली देवी के रूप में प्रकट हुई, जिनकी सुंदरता को देखकर स्वयं ब्रह्मा जी भी मोहित हो गए, उन्होंने विचार किया कि उनकी शक्ति अद्भुत है जो इतने सुंदर स्वरूप में प्रकट हुई है, और ब्रह्मा जी ने माँ सरस्वती जी से विवाह करना चाहा, प्रारम्भ में सरस्वती जी ने मना किया किन्तु अंत में माँ सरस्वती ने ब्रह्मा जी की बात मान ली.

माँ सरस्वती जी की महिमा बताई गई है कि वे अत्यंत सुंदर भी हैं, और ज्ञान की परम स्त्रोत भी हैं अर्थात पूजनीय हैं. ब्रह्मा जी ने माँ सरस्वती जी को अपनी शक्ति से प्रकट किया, जन्म नहीं दिया.. माता सरस्वती जी का कोई जन्म या मरण नहीं हैं वे अनंत हैं. 

इसी विषय से जुडी पुराणों में एक कथा भी आती है कि भगवान शिव एक बार एक बालक के रूप में प्रकट हुए उस समय ब्रह्मा जी क्रोध में थे. तो क्या आदि अनंत परमात्मा देवादिदेव महादेव ब्रह्मा जी के पुत्र हो गए, जिनका जन्म ही नहीं हुआ।।

शिव महापुराण में भी यह कथा आती है कि भगवान विष्णु, भगवान शिव के अग्निस्तंभ से प्रकट हुए तो क्या आदि अनंत परमात्मा श्री हरि भगवान शंकर के पुत्र हो गए? जिनका जन्म ही नहीं हुआ, उसी प्रकार ब्रह्मा जी कभी भगवान विष्णु की नाभि कमल से तो भगवान शिव के लिंग रूपी अग्निस्तंभ से प्रकट होते हैं. विभिन्न कल्पों में.. तो क्या ब्रह्मा जी विष्णु जी या शिव जी के पुत्र हो गए क्या? 

ये केवल लीला मात्र है उस एक परमात्मा की जो अनेकों रूपों में विराजमान हैं तथा अलग अलग रूप धारण करके लीला रचाते रहते हैं.

अतः माँ सरस्वती किसी की पुत्री नहीं हैं, अपितु वे अनंत हैं.

Read more at headlineshunt :