life story of yogi adityanath

योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय

5 जून 1972 को देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव में वन विभाग में अधिकारी आनंद सिंह बिष्ट के यहाँ जन्मे बालक ने अजय सिंह बिष्ट ने योगी आदित्यनाथ नाम के संन्यासी बनने तक का सफर काफी प्रसिद्ध है. राष्ट्रवादी विचारधारा और लोककल्याण की भावना से जुड़ी उनकी सनातनी संत की छवि उनको एक उच्च व्यक्तित्व प्रदान करती है. अपने जीवन की तरुणाई में ही योगी आदित्यनाथ का रुख राम मंदिर आंदोलन की ओर हो गया था. इसी क्रम में उनका संपर्क तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन अवेद्यनाथ के साथ हुआ.

योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से संबंध रखते हैं और नाथ संप्रदाय के साधु अविवाहित, भिक्षुक और शैव के उपासक होते हैं. ये लोग अपने कानों में कुंडल पहनते हैं और 12 वर्षों तक कठोर विचरण करते है जिसके बाद इन्हे नाथ संप्रदाय की दीक्षा दी जाती हैं.

महंत अवेद्यनाथ के सानिध्य में योगी आदित्यनाथ ने नाथ पंथ के विषय में ज्ञान प्राप्त किया. जिससे उनके जीवन में ऐसा बदलाव आया कि उन्होंने संन्यास का निर्णय ले लिया और सन 1993 में गोरखनाथ मंदिर में आ गए और पंथ की परंपरा के अनुरूप अध्यात्म की तत्विक विवेचना और योग-साधना में रम गए. योगी आदित्यनाथ की नाथ पंथ के प्रति निष्ठा और साधना देखकर महंत अवेद्यनाथ ने योगी को 15 फरवरी 1994 को गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी बना दिया.

गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने पीठ की लोक कल्याण और सामाजिक समरसता के ध्येय को सफलता पूर्वक आगे बढ़ाया. महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के पश्चात 14 सितंबर 2014 को योगी आदित्यनाथ गोरक्ष पीठाधीश्वर बने तो उनके ऊपर पीठ की जिम्मेदारी का भार उनके कंधे पर आ गया, जिसका उन्होंने बखूबी निर्वहन भी किया. उनकी इसी भूमिका के पश्चात उनको अखिल भारतीय बारह वेश पंथ योगी सभा का अध्यक्ष भी बनाया गया हैं.

22 साल की उम्र में संन्यास लेने वाले योगी आदित्यनाथ अपने परिवार का त्याग करके समस्त मानव समाज को अपना परिवार बना लिया. योगी आदित्यनाथ ने लोक कल्याण को अपने जीवन का ध्येय बनाने के क्रम में ही अध्यात्म के साथ-साथ राजनीति में भी कदम बढ़ाते हुए महज 26 साल की उम्र में सांसद के रूप में लोकसभा में प्रवेश किया. तब से बिना रुके योगी आदित्यनाथ राजनीति में बढ़ते ही चले गए. गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र की जनता ने योगी आदित्यनाथ को लगातार पांच बार अपना लोकसभा सांसद चुना.

इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उनकी राजनीतिक क्षमता से प्रभावित होकर 2017 में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दायित्व सौंप दिया गया. पार्टी द्वारा दी गयी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करते हुए योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश को विभिन्न उपलब्धियां प्राप्त कराई. 2017 में भाजपा ने जब योगी को मुख्यमंत्री बनाया तो राजनीतिक विचारको ने नए-नए तर्क और मत व्यक्त किये। जिनमें धर्मनिरपेक्ष देश में एक कट्टर हिंदू योगी आदित्यनाथ को जनता पर जबरदस्ती थोप दिया जाना कहा गया. 

इन लोगो का मानना था कि जनता इसे सहन नहीं करेगी. मगर योगी आदित्यनाथ के पांच साल के कार्यकाल और 2022 के चुनाव ने ये सभी मत मंतव्य गलत साबित कर दिए. मुख्यमंत्री के रूप में योगी ने भाजपा के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता के अपार समर्थन से जबरदस्त जीत दर्ज करते हुए दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद कुर्सी को हासिल किया। योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह लोकप्रियता और जन समर्थन प्राप्त करने वाले नेता है.
 
2022 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत देकर यूपी की जनता ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सफलता पर मुहर लगा दी. संसदीय चुनावों में अजेय रहे योगी आदित्यनाथ 2022 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और एक लाख से अधिक मतों से जीतकर अपनी अपराजेय राजनीतिक लोकप्रियता को फिर से प्रमाणित कर दिया. जनसंख्या की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य के योगी आदित्यनाथ 2022 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने.

योगी आदित्यनाथ ने कई मिथकों को तोड़ते हुए प्रदेश के इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने प्रदेश के हर जिले का कई बार दौरा करने के साथ नोएडा जाने के मिथक को भी तोड़ा, उनसे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मिथक के डर से नोएडा नहीं जाते थे कि वहां जाने से सत्ता चली जाती है. योगी आदित्यनाथ ने आधा दर्जन से अधिक बार नोएडा जिले का दौरा करके यह सिद्ध किया कि एक संत का ध्येय सिर्फ सत्ता को बचाए रखना नहीं है, बल्कि लोक कल्याण के पथ पर निडर होकर चलना होता है.

एक संत से कही अधिक अपने व्यक्तित्व में विशेषताएं रखने वाले योगी आदित्यनाथ एक श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ है. योगी आदित्यनाथ की छवि पहले से ही एक कट्टर  समावेशी सनातनी की रही है, जिसको वह अन्य छद्म राजनीतिज्ञों की तरह अपना बेसिक करेक्टर छुपाकर दिखावी नौटंकी नहीं करते है. हिन्दुत्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले से ही है. इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि वह अन्य मत, पंथ या धार्मिक मान्यता वाले लोगों के प्रति वह अपने मन में किसी प्रकार का कोई दुराग्रह रखते है. 

योगी आदित्यनाथ सभी विचारों तथा आस्थाओं का सम्मान करते हैं. वह स्पष्ट रूप से कहते है कि हर धर्मावलम्बी अपने मतानुसार अपनी जीवनचर्या करे परन्तु इसकी वजह से अन्य मतावलम्बियों को असुविधा नही होनी चाहिए. अपने पंथ के पालन में किसी दूसरे पंथ के लोगों का अनादर नही होना चाहिए. निरर्थक मुद्दों पर सार्वजनिक या निजी सम्पत्ति को नष्ट करने या क्षति पहुंचाने की कोई हिम्मत न कर सके ऐसी व्यवस्था योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल में स्थापित की. 

धार्मिक उन्मादों में सार्वजनिक जीवन किसी भी प्रकार से डिस्टर्ब न किया जाए. प्यार-मोहब्बत के नाम पर किसी समुदाय की बच्चियों का शोषण न किया जाए. सरकारी व दूसरों की जमीन पर अवैध कब्जे न किये जाएं. सभी लोग सुख और शांति से रहें तथा अन्य लोगों को भी रहने दें, एक मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ ने ऐसा वातावरण स्थापित किया जिसे न केवल उत्तर प्रदेश अपितु देश भर में लोगो ने पसंद किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में बड़े ही संतुलित ढंग से व कुशलतापूर्वक एक संत एवं मुख्यमंत्री होने की संवैधानिक जिम्मेदारी का उन्होंने कुशलता पूर्वक निर्वहन किया हैं. योगी आदित्यनाथ की एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रॉंगनेस का ही नतीजा है कि दशकों से जिस प्रदेश में आतंक का पर्याय रहे माफियाओं की सम्पत्तियों पर बुलडोजर चले, खूंखार अपराधी खुद सरेंडर करते हुए अपने जीवन को बचाने की कोशिस कर रहे हैं, जमानत निरस्त कराकर वापस जेल जा रहे हैं. 

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने से पहले माफियाओं से डटकर मुकाबला किया और अपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में वह दंगाइयों के विरुद्ध आयरन डोम का काम करते थे.

2017 में जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया तो यह मात्र एक संयोग नहीं था, बल्कि निर्वाचित होकर आये अधिकांश  विधायकों के आग्रह पर ऐसा हुआ था. उस समय भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने का निर्णय लगभग फाइनल कर चुका था.

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने पर योगी आदित्यनाथ ने बहुत ही सुलझे तरीके से अपना कार्यभार संभाला और अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने शीर्ष स्तर पर किसी प्रकार का कोई भ्रष्टाचार नहीं होने दिया और योगी मंत्रिमंडल के किसी भी मंत्री या उसके विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप तक नहीं लग सके. 

जहा एक और देश के कई मुख्य मंत्रियों और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के मुकदमें चल रहे हों, ऐसे में योगी आदित्यनाथ का बेदाग कार्यकाल अपने आप में एक बहुत बड़ा उदाहरण है.

जब देश में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर खुलकर मुस्लिम तुष्टिकरण किया जा रहा हो, योगी आदित्यनाथ ने कभी भी बिना लाग लपेट के अपने हिन्दू होने और हिंदुत्व को अपनी सांस्कृतिक पहचान मानने में कोई संकोच किया है. जहाँ एक और भारत के राजनेताओं में, जो टोपी पहनने और टोपी पहनाने में की होड़ लगी होती है, वे योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्व के लिए खुला सपोर्ट इन लोगो को रास नहीं आता था और ये सभी योगी आदित्यनाथ के विरोध में अक्सर उलटी सीधी बातें करते नजर आते थे. ये लोग योगी जी को चेतावनी देते थे कि धर्मनिरपेक्ष भारत में इस तरह का आचरण जनता को स्वीकार नहीं है. इसे योगी आदित्यनाथ की स्ट्रांग पर्सनालिटी का प्रभाव ही कहा जायेगा कि कालांतर में ऐसे नेता भी अपने आप को हिंदू साबित करने के लिए माथे पर चंदन लगाकर, रामनामी भगवा दुपट्टा पहन कर मंदिरों में दर्शन करते हुए फोटो सेशन कराते नजर आये. इस तरह धीरे धीरे योगी आदित्यनाथ ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश का माहोल और दशा दिशा बदल कर रख दी.

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में अपराधियों और अराजक तत्वों के विरुद्ध जितनी सख्त कार्यवाही योगी आदित्यनाथ ने की, उतनी पहले भाजपा के ही कल्याण सिंह के अलावा शायद ही किसी अन्य मुख्यमंत्री ने की हो. सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके खड़ी की गई आलीशान इमारतें भी गिराने में कोई विलम्ब नहीं किया गया और उन पर गरीबों के लिए मकान बनाए गए. योगी आदित्यनाथ के इस स्ट्रांग डिसीजन ने उन्हें त्तर प्रदेश में बुलडोजर बाबा के नाम से विख्यात कर दिया।

राज्य में लड़कियों और महिलाओं अपने आप को सुरक्षित महसूस किया और उनके मन में योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान में काफी वृद्धि हुई. 

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