विक्रम मिस्री का जन्म 1964 में कश्मीर के श्रीनगर में हुआ था. चीन स्पेशिलिस्ट के नाम से मशहूर विक्रम मिस्री ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर, मध्यप्रदेश से ली. जिसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से विक्रम मिस्री ने हिस्ट्री विषय में स्नातक की. फिर एक्सएलआरआई से एमबीए की डिग्री ली.
विक्रम मिस्री ने यू पी एस सी सन 1989 बैच में भारतीय विदेश सेवा ज्वाइन करके अपने आईएफएस अधिकारी के तौर पे राजनयिक करियर की शुरुआत की. अपने करियर के शुरुआती वर्षों में, वह ब्रुसेल्स और ट्यूनिस में भारतीय मिशनों के लिए काम करते रहे.
अपने शानदार राजनयिक करियर में विक्रम मिस्री ने स्पेन (2014-2016) और म्यांमार (2016-2018) में भारत के राजदूत के रूप में भी बहुत अच्छा काम किया. इसके अलावा विक्रम मिस्री को पाकिस्तान, अमेरिका, जर्मनी, बेल्जियम और श्रीलंका सहित कई देशों में भारतीय मिशनों को अंजाम देने का बड़ा अनुभव है.
विक्रम मिस्री सन 2024 में भारत की अठारहवीं लोकसभा में सरकार गठन के बाद भारत के नए विदेश सचिव बनाये गए. विक्रम मिस्री यू पी एस सी सन 1989 बैच के IFS अधिकारी है.
कूटनीतिक क्षेत्र में व्यापक पृष्ठभूमि रखने वाले विक्रम मिस्री को भारत के तीन प्रधानमंत्रियों इंद्र कुमार गुजराल, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के निजी सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके है.
उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) विक्रम मिस्री को 28 जून 2024 को भारत के विदेश सचिव नियुक्त किया गया. 1989 बैच के इंडियन फॉरेन सर्विसेज अधिकारी विक्रम मिस्री ने 15 जुलाई 2024 को भारत के तत्कालीन विदेश सचिव विनय क्वात्रा की जगह स्थान लिया.
विक्रम मिस्री की भारत के विदेश सचिव के रूप में ये नियुक्ति एक ऐसे समय हुई जब भारत पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद चीन के साथ अपने कोल्ड रिलेशन सहित विदेश नीति से जुडी कई चुनौतियों से निपटने की कोशिश कर रहा है. उप एनएसए नियुक्त होने से पहले, विक्रम मिस्री ने 2019-2021 तक चीन में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया था.
चीन के मामले में विक्रम मिस्री की गिनती विदेश मंत्रालय के सबसे बड़े विशेषज्ञों में से एक के रूप में होती है, विदेश सचिव बनने से पूर्व विक्रम मिस्री की एक राजदूत की भूमिका में अंतिम नियुक्ति चीन की राजधानी बीजिंग में थी. जिसके बाद जनवरी 2022 में, उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में नियुक्त किया गया था, जहां वे तत्कालीन एनएसए अजीत डोभाल को रिपोर्ट करते थे.
ऐसा माना जाता है कि पूर्वी लद्दाख में 2020 के गतिरोध और उसके बाद भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद तनाव काफी बढ़ गया था. जिसके बाद विक्रम मिस्री ने भारत और चीन के बीच वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.