life story of sita murmu soren

सीता मुर्मू सोरेन का जीवन परिचय

सीता मुर्मू सोरेन झारखण्ड की एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ है. वह झारखण्ड की प्रसिद्ध राजनीतिक सोरेन फैमली से आती है और जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन के बड़े बेटे दुर्गा सोरेन की पत्नी है. साथ ही वह हेमंत सोरेन और कल्पना मुर्मू सोरेन की भाभी भी है.    

सीता मुर्मू सोरेन पति दुर्गा सोरेन के आकस्मिक निधन के बाद सन 2009 में पहली बार जेएमएम की परंपरागत जामा विधान सभा सीट से जीतकर विधायक बनी थी. इसके बाद, उनको जेएमएम का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया  गया था. सीता मुर्मू सोरेन 2009 के बाद 2014 और 2019 में भी जामा विधान सभा से जीत की हैट्रिक लगाते हुए झारखंड विधानसभा पहुंची थी.  

21 मई 2009 को सीता मुर्मू सोरेन के पति दुर्गा सोरेन की अचानक मात्र 40 वर्ष की आयु में नींद में ही उनके बोकारो स्थित आवास पर मृत्यु हो गई थी. दुर्गा सोरेन की मृत्यु का कारण मस्तिष्क की नस फटने के कारण रक्तस्राव का होना बताया गया था.  

सीता मुर्मू सोरेन की तीन बेटियां है जिनके नाम क्रमशः जयश्री सोरेन, राजश्री सोरेन और विजयश्री सोरेन हैं. सीता मुर्मू सोरेन की बेटियां भी राजनीति में रूचि रखती है और अक्‍टूबर 2021 राजश्री सोरेन और जयश्री सोरेन ने अपने पिता दुर्गा सोरेन के नाम पर दुर्गा सोरेन सेना नामक एक पार्टी का गठन भी किया था.

सीता मुर्मू सोरेन एक विवाद से भी जुडी है, दरअसल उन पर 2012 के राज्यसभा चुनावों में आरके अग्रवाल से पैसे लेने का आरोप है. 2012 के राजयसभा चुनाव के दिन उनके आवास से 2 करोड़ रुपये से अधिक जब्त किए गए थे. भ्रष्टाचार के आरोप के चलते इस केस में सीता मुर्मू सोरेन ने सात महीने जेल में भी काटे और अब जमानत पर बाहर हैं.

इस मामले में सीता मुर्मू सोरेन ने 17 फरवरी 2014 के झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था, वह शीर्ष अदालत पहुंच गयी थी. 

4 मार्च 2024 को, सीता मुर्मू सोरेन ने एक याचिका दायर की जिसमें कहा गया है कि जिस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने 1998 के जेएमएम रिश्वत मामले के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें उनके ससुर शिबू सोरेन कोदोषमुक्त कर दिया था. उसी प्रकार सांसदों को अभियोजन से छूट देने वाले संवैधानिक प्रावधान और 1998 के फैसले को उन पर भी लागू किया जाना चाहिए.

मार्च 2024 में जब हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि उनकी पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन झारखंड की मुख्यमंत्री बनेंगी. तो इस विचार का सीता मुर्मू सोरेन ने खुलकर विरोध किया था और कहा था, कि मैं कल्पना मुर्मू सोरेन सीएम बनाने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध करूंगी. 

सीता मुर्मू सोरेन का इस विषय में साफ़ कहना था कि केवल कल्पना मुर्मू सोरेन ही क्यों, न तो वह एक विधायक हैं और न ही उनके पास कोई राजनीतिक अनुभव है. जबकि पार्टी में कई वरिष्ठ नेता हैं तो ऐसा क्या कारण है कि कल्पना मुर्मू सोरेन का नाम अगले मुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. यदि सोरेन परिवार से ही किसी व्यक्ति चुनाव करना चाहते हैं, तो मैं सदन में सबसे वरिष्ठ हूं और लगभग 14 वर्षों से लगातार विधायक भी रही हूं.

इस घटना के बाद सीता मुर्मू सोरेन ने झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि पार्टी में कई परिस्थितियां पैदा हुई, और अंत में यह मेरे लिए नैतिकता का मामला था. साथ ही सीता मुर्मू सोरेन ने दावा किया कि उनको पार्टी में उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है. 

सीता मुर्मू सोरेन ने कहा, जब मुझे पता चला कि मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ साजिश रची जा रही है. तो मेरे पास अपना इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. जेएमएम के साथ, पार्टी की सेवा में बिताए गए 14 वर्षो में मुझे वह सम्मान कभी नहीं मिला जिसकी मै हकदार थी.

आखिरकार मुझे अपने दिवंगत पति दुर्गा सोरेन जी की मेहनत के सम्मान के लिए जेएमएम छोड़ने का यह बड़ा फैसला लेना पड़ा. हम आज तक अपने सम्मान से अछूते हैं. हालांकि, तब जेएमएम नेता मनोज पांडे ने सम्मान की कमी के सीता मुर्मू सोरेन के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि पार्टी सीता मुर्मू सोरेन को  अपना एक महत्वपूर्ण सदस्य मानती है. 

19 मार्च 2024 को सीता मुर्मू सोरेन ने दिल्ली में तत्कालीन झारखंड में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी व पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली.  

इसी दौरान नवम्बर 2024 में जब उन्होंने जामताड़ा से अपना चुनावी नामांकन पत्र दाखिल किया, तो इसी सीट पर उनके खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे इरफान अंसारी ने सीता सोरेन के खिलाफ एक आपत्तिजनक टिप्पणी की  जिसके बाद झारखण्ड का सियासी तापमान बहुत बढ़ गया था. 

को लेकर भी सियासी बयानबाजियां थम नहीं रही हैं. इसके बाद सीता सोरेन की तत्कालीन पार्टी बीजेपी भी लगातार कांग्रेस और जेएमएम पर हमलावर हो गयी थी. साथ ही खुद सीता सोरेन ने भी मीडिया को अपनी प्रतिक्रिया दी थी, इस समय वह भावुक भी हो गई थी. सीता सोरेन ने कहा था, इरफ़ान अंसारी मेरे जामताड़ा से मेरे उम्मीदवार बनने के बाद से मुझे निशाना बना रहे थे, जो कि राजनीती में सामान्य बात है, लेकिन मेरे नामांकन करने के बाद उन्होंने जो अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए घटिया स्तर दिखाया हैं वह अस्वीकार्य है. यह केवल मेरा अपमान नहीं है, बल्कि समस्त आदिवासी समुदाय की महिलाओं का अपमान है. आदिवासी समुदाय उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. चूंकि झारखंड की जनता के सच्चे सेवक मेरे मेरे पति अब जीवित नहीं हैं, तो वह अंसारी
आज कुछ भी बोल रहा है. इतना कहते हुए सीता सोरेन भावुक हो गई... 

साथ ही सीता सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इरफान अंसारी का वो अमर्यादित वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, कांग्रेस प्रत्याशी इरफान अंसारी ने नामांकन के तुरंत बाद मीडिया के सामने मेरे लिए जो अमर्यादित भाषा प्रयोग की है, उसके लिए उन्हें माफी मांगनी होगी. इससे पहले भी वह मेरे विषय में अनर्गल व्यक्तिगत बातें बोली हैं, लेकिन इस बार निम्नता और घटियापन की सभी सीमाएं पार कर दी हैं.

इरफान अंसारी ने अपने नॉमिनेशन के बाद सीता सोरेन को बोरो खिलाड़ी और रिजेक्टेड माल बताते हुए, निम्न और घटिया स्तर का परिचय दिया था. 

 

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