सरबजीत सिंह का जन्म भारत के पंजाब राज्य मे हुआ था. सरबजीत सिंह की मृत्यु 2 मई 2013 को मे पाकिस्तान के लाहौर के एक अस्पताल मे हो गयी थी. मृत्यु का असली कारण सरबजीत सिंह के साथ पाकिस्तानी जेल मे उपस्थित अन्य कैदियो द्वारा किया गया दुरव्यवहार था, जिसमें अमीर सरफराज तांबा मुख्य आरोपी था.
हालांकि पाकिस्तान के कानून के द्वारा भी सरबजीत सिंह को मौत की सजा सुनाई जा चुकी थी. मगर तब तक सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर उनके लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही थी.
सरबजीत सिंह भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बसे तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव का रहने वाले एक सामान्य किसान थे. सरबजीत सिंह के पिता उत्तर प्रदेश पुलिस मे नौकरी करते थे. सरबजीत सिंह कब्बडी के बहुत अच्छे खिलाड़ी थे और अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए वे खेती बाड़ी करते थे और खेतो मे ट्रेक्टर भी चलाते थे. सन 1984 मे सरबजीत सिंह की शादी सुखबीर कौर से हुई थी. सरबजीत सिंह और सुखबीर कौर की 2 बेटियाँ पूनमदीप और स्वपनदीप कौर है.
30 अगस्त 1990 को सरबजीत सिंह अनजाने में भारत - पाकिस्तान बॉर्डर पार करके पाकिस्तान वाले हिस्से में पहुंच गये थे. जहां सरबजीत सिंह को पाकिस्तान आर्मी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था.
चूँकि सन 1990 मे भारत पकिस्तान सीमा पर तार की फेंसिंग नहीं होती थी, तब एक दिन सरबजीत सिंह गलती से सीमा के पार पाकिस्तान चले गए. जैसे ही उन्होंने पाकिस्तानी सीमा मे प्रवेश किया उन्हे एक पाकिस्तानी कर्नल द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के सात दिनो बाद सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी कोर्ट मे एक भारतीय जासूस और रॉ एजेंट के तौर पे पेश किया गया. यहां तक कि पाकिस्तानियों ने सरबजीत सिंह को फ़साने के लिए उनको मंजीत सिंह के नाम से प्रस्तुत किया गया ताकि भारत उनकी पैरवी न कर सके.
सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी कोर्ट ने रॉ का एजेंट बताते हुए लाहौर, मुल्तान तथा फैसलाबाद बम धमाको का दोषी बताया. इन्ही सब आरोपो के बिनाह पर सरबजीत को पाकिस्तानी कोर्ट ने फांसी की सजा भी सुनाई.
जिसके बाद सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर का भी दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. दलबीर कौर ने ही 1991 से 2013 तक लगभग 22 साल जेल में रहने के दौरान अपने भाई सरबजीत सिंह के लिए न्याय के की लड़ाई लड़ी थी.
फिर लगभग 11 साल बाद सरबजीत सिंह की हत्या के आरोपी और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संस्थापक हाफिज सईद के सहयोगी और करीबी माने जाने वाले अमीर सरफराज तांबा की रविवार, 14 अप्रैल 2024 को लाहौर में अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी.
अमीर सरफराज तांबा की हत्या पर सरबजीत सिंह की बेटी स्वप्नदीप कौर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह शुरू में तो यह संतुष्टि देने वाली बात थी कि मेरे पिता का हत्यारा नही रहा, लेकिन फिर मैंने सोचा कि यह न्याय नहीं है और जो हम चाहते थे कि पता चले कि मेरे पिता की हत्या क्यों की गई और उसकी साजिश में कौन कौन शामिल था, उस न्याय को रोकने के लिए ही ये सब कराया गया है. अब लगता है कि अमीर सरफराज तांबा की हत्या के पीछे पाकिस्तान सरकार का हाथ है और पकिस्तानी सरकार नहीं चाहती कि मेरे पिता सरबजीत सिंह की हत्या के असली गुनहगारों का पता चले क्योंकि इसमें बड़े नाम शामिल है.