किसान चाची यानि राजकुमारी देवी असली मिसाल है महिला सशक्तिकरण की, संघर्ष, मेहनत और जुनून की. राजकुमारी देवी के संघर्ष की कहानी एक ऐसी प्रेरणा है जो सिखाती है कि किस तरह विपरीत परिस्थितियों का सामना करके सफलता पायी जा सकती है. समाज को एक सही राह दिखाने वाली राजकुमारी देवी एक ऐसी भारतीय महिला है जो किसान चाची के उपनाम से प्रसिद्ध हैं.
किसान चाची एक ऐसी महिला है जो उठती है तो वह न केवल अपने परिवार को उठाती है बल्कि अपने साथ पूरे समाज को जीने की नई राह भी दिखाती है. बिहार जैसे राज्य से आने वाली एक कम पढ़ी लिखी महिला राजकुमारी देवी, एक ऐसी किसान है जिसकी चर्चा पूरे देश में है और पदमश्री अवार्ड जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है.
किसान चाची यानि राजकुमारी देवी, बिहार के मुजफ्फपुर जिले के सरैया प्रखंड के आनंदपुर की रहने वाली हैं. राजकुमारी देवी का विवाह सन 1974 में हुआ था, लेकिन एक लंबे समय तक इनको संतान नहीं हुई और जब 1983 में संतान हुईं तो इन्होने दो लड़कियो को जन्म दिया जिसकी वजह से राजकुमारी देवी को परिवार ने इन्हे 2.5 एकड़ की बंजर जमीन देकर घर से अलग कर दिया.
इस स्थिति में राजकुमारी देवी को भयंकर गरीबी का सामना करना पड़ा, मगर इन्होने धैर्य और हिम्मत बनाये रखी. अपने पति के साथ मिलकर उन्होंने खेती बाड़ी का काम करने ही बेहतर समझा. इनके पति ने एक छोटी सी दुकान खोल ली तो राजकुमारी देवी ने परिवार का पालन पोषण करने के लिए पुश्तैनी 2.5 एकड़ की बंजर जमीन में खेती करनी शुरू की. किसान चाची को भी लोगों की हंसी और मजाक का खूब सामना करना पड़ा बनाया क्योंकि महिला किसान वहां किसी ने देखी नहीं थी और साथ में खेती कर रही है ऐसी जमीन में जो बंजर है.
ऐसे कठिन समय में जो सबके साथ होता है वही सब किसान चाची को भी झेलना पड़ा क्योंकि परिवार के साथ ही इनके अपने रिश्तेदारों ने भी ऐसे समय में इनका साथ छोड़ दिया. लेकिन श्रेष्ठ मनुष्यों का निर्माण ऐसे कठिन समय ही किया करते है और हुआ भी वही राजकुमारी देवी की पक्की जिद और खेती में उनकी मेहनत ने एक ऐसा काम किया कि वह इतिहास बन गया.
हालांकि यह सफर इतना आसान नहीं था और शुरुआत में किसान चाची को खेती के काम में बहुत कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा. क्योंकि जमीन बंजर थी तो राजकुमारी देवी ने जैविक खेती करने की सोची इसके लिए शहर जाकर डॉ. राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) से जैविक खेती की ट्रेनिंग ली, खेती के लिए उन्नत तकनीकें सीखीं और अपनाईं, इनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और बंजर खेत लहराने लगे.
खेती के साथ ही राजकुमारी देवी ने घर पर इसी से जुड़ा एक भी बिजनेस शुरू किया, खेत में पैदा हुए ओल को सीधे बेचने की बजाय उसका अचार और आटा बनाना शुरू किया. खुद साइकिल चलाकर बाजार जाती और अचार-मुरब्बा बेचती, ऐसा करते देख लोग हास्य करते हुए इनको साइकिल चाची कहने लग गए। मगर अपने काम पे ध्यान एकाग्र करते हुए जी जान से जुटी राजकुमारी देवी लोगो के तानो, हंसी और व्यंगों से ऊपर उठ चुकी थी. शुद्ध, जैविक, पौष्टिक अचार धीरे धीरे बहुत प्रसिद्ध हो गया.
यही क्रम चलता रहा और अब समय आया पैसा आने का जिसने पहले घर की सूरत बदली और वही नाते रिश्तेदार जो छोड़कर चले गए थे लौटना शुरू कर दिया.
मगर किसान चाची की असली उड़ान अभी बाकी थी. कठिन समय में किया गया अटूट संघर्ष आपको आदर्श स्तर तक लेकर जाता है राजकुमारी देवी के साथ भी यही हुआ, हास्य, व्यंग करने वाले लोग अब किसान चाची के लिए तालियां बजाने लगे थे. किसान चाची की हिम्मत देखकर गांव, समाज की अन्य महिलाएं भी इनसे प्रेरित हुई और जैविक खेती के क्षेत्र में आगे आने लगीं.
अब राजकुमारी देवी को किसान चाची बनने का असली सफर करना था, क्योंकि अब वह गांव-गांव जाकर बाकी महिलाओं को खेती की जानकारियां और प्रेरणा देने लगी थी. लोगों को ऑर्गेनिक फार्मिंग के बारे में समझाने लगी थी. साथ ही महिलाओं को इसके साथ ही जैविक खेती के रॉ मेटेरियल को प्रोसैसेड प्रोडक्ट बनाकर सेल करना भी सिखा रही थी.
राजकुमारी देवी महिलाओं को जैविक खेती से जुड़े घर पर ही किये जा सकने वाले अन्य छोटे-छोटे काम जैसे अचार बना कर बेचना, दूध बेचना आदि के लिए भी प्रेरित करने लगीं, ताकि कभी अगर खेती में नुकसान हो जाये तो सपोर्टिंग साधन बेसिक जरूरतें पूरी करता रहे. उन्होंने महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह (सेल्फ हेल्प ग्रुप) बनाये.
जैविक खेती का यह प्रचार प्रसार और नारी सशक्तिकरण का जमीनी स्तर पर किया कार्य अब बिहार की कम पढ़ी लिखी एक सामान्य सी राजकुमारी देवी को किसान चाची के टायटल से मशहूर कर चुका था. किसान चाची महिलाओं में स्वावलंबन की अलख जगाकर अब बाकी महिलाओं की रोल मॉडल बन चुकी थी. किसान चाची जब 50 स्वयं सहायता समूह के आंकड़े पर पहुंची तो उनके साथ 250 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी थी, ये महिलाएं अचार-मुरब्बा तैयार करती और जैविक खेती से बनाये गए शुद्ध, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक प्रोडक्ट विदेशों तक भी निर्यात होने लगे.
बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नितिश कुमार खुद किसान चाची के घर आये और 2006 - 2007 में राजकुमारी देवी को बिहार सरकार द्वारा किसान श्री के राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया.
गुजरात में 2013 के वाइब्रेंट गुजरात के शिल्प मेले में किसान चाची तब वहां के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मिली तो नरेंद्र मोदी जी ने किसान चाची का फूड प्रोसेसिंग मॉडल सरकारी वेबसाइट पर प्रसारित किया.
मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो किसान चाची को भूले नहीं और 2019 भारत सरकार ने राजकुमारी देवी को पद्मश्री के लिए चुना और राष्ट्रपति द्वारा किसान चाची को पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
प्रसिद्ध टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में भी अमिताभ बच्चन ने किसान चाची को बुलाया था और सहयोग राशि भी प्रदान की.
यह होती है असली नारी शक्ति, वह खुद भूखी रह लेगी लेकिन जब बात अपने बच्चों पर आते देखती है तो उसकी शक्ति इतनी बढ़ जाती है कि वह अपने संघर्ष से पूरे समाज को बदल डालती है. तो किसान चाची जिद है एक ऐसी महिला की जिसने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी.