कार्तिक पूर्णिमा भारतवर्ष में मनाया जाने वाला बहुत बड़ा उत्सव है, यह त्यौहार हिन्दुओं, सिखों तथा जैनी तीनो धर्म के लोगो के द्वारा अपने अपने तरीके से मानाया जाता है. भगवान श्री हरी विष्णु जी ने इसी दिन अपना पहला अवतार लिया था, जो मत्स्य अवतार था.
माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देवता नदियों में अवतरित होते है, इसीलिए लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा के पवित्र जल में स्नान करते है और भगवान का आशीर्वाद लेते है. कार्तिक माह को हिंदी पंचांग का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, अतः इस माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है.
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि प्राचीन काल में त्रिपुरासुर नामक राक्षक हुआ था, जिसका राज तीनो लोको में चलता था. इस राक्षक को तरकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली तीन दैत्य भाइयों का संयोजन कहा जाता था. त्रिपुरासुर अत्यंत शक्तिशाली था, अतः सभी देवतागण त्रिपुरासुर से बहुत परेशान थे. आखिरकार उन्होंने भगवन शिव से अपनी रक्षा की प्रार्थना की.
तब भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया तथा उनके अत्याचारों से देवता गणो को मुक्ति दिलाई, अतः कार्तिक पूर्णिमा भगवान शिव की राक्षस त्रिपुरासर पर जीत का उत्सव भी है.
माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया गया पुण्य अक्षय हो जाता है, जो कभी नष्ट नहीं होता है. कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर कुछ लोग व्रत भी रखते है, इस व्रत को सत्यनारायण व्रत कहा जाता है और इसमें सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ी जाती है.
कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु प्रातः काल और सांय काल के समय पवित्र गंगा नदी में स्नान करते हैं. ऐसा माना जाता है कि यह कार्तिक पूर्णिमा का यह स्नान अत्यंत पवित्र होता है. अगर कोई तीर्थ स्थान पर नही जा सकता, तो इस दिन घर पर भी स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर जा सकता है.
स्नान आदि के बाद भगवान श्री हरि विष्णु जी के सामने घी या सरसों के तेल का दिया जलाकर विधिपूर्वक कार्तिक पूर्णिमा की पूजा की जाती है. भगवान जी की मूर्ति की पूजा फूल, अगरबत्ती और दीप आदि से की जाती है.
कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना भी बहुत शुभ होता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीप दान करना बहुत लाभकारी होता है, इस दिन वैदिक मंत्रों और भजनों का जाप करना भी अच्छा माना जाता है. इस दिन लोग अपने मर्तक परिजनों के उद्धार के लिए गंगा जी में दीप दान करते है.
भारत के अलग अलग भागो में कार्तिक पूर्णिमा का यह त्यौहार अलग अलग तरीको से मनाया जाता है. ओडिशा में इस त्यौहार को बोइता बंदना कहा जाता है, इसमें लोग जलाशयों में छोटी नावों को तैराते है, जो केले के तनो तथा नारियल की चडीयो से बनी होती है.
तमिलनाडु में कार्तिक पूर्णिमा के दिन कार्तिकई दीपम मनाया जाता है. जिसमे लोग अपने घरो के बहार लाइन में दिए जलाकर रखते है. आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में इस त्यौहार को कार्तिक मासालु कहा जाता है, जिसमे लोग दीपावली से कार्तिक पूर्णिमा तक रोज दिए जलाते है और अंत में कार्तिक पूर्णिमा के दिन 365 बातियो वाला तेल का दिया भगवन शिव के मंदिर में जलाया जाता है.
कार्तिक पूर्णिमा का दिन अलग अलग धर्मो में भी शुभ माना जाता है. जैन धर्म के भक्त लोग इस दिन से एक पवित्र यात्रा शुरू करते है जो पालिताना से शुरू होती है, इसमें भक्त 216 किलोमीटर की कठिन यात्रा करते है तथा भगवान आदिनाथ के मंदिर पहुंच कर पूजा करते है.
सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का यह दिन गुरु नानक जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिसमे गुरूद्वारे में श्रद्धालु भक्त भजन भेटें गाते है तथा लंगर आदि लगाकर उत्सव मनाते है.