हिंदी भाषा भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है. भारत देश के कई राज्य हिंदी भाषी राज्यों के नाम से जाने जाते है जहाँ पर अधिकांश लोग हिंदी भाषा बोलते लिखते है.
अगर दुनिया की बात की जाए तो, मंडेरिन, स्पेनिश और अंग्रेजी भाषा के बाद हिंदी विश्व में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. भारत के अलावा नेपाल, मॉरीशस, फिजी, पाकिस्तान, सिंगापुर, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, बांग्लादेश आदि देशों के लोग भी हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं.
हिंदी भाषा के महत्व को लोगों तक पहुंचाने और इसे बढ़ावा देने के लिए ही प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सुझाव पर की गयी और पहली बार सन 1953 में 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया गया.
14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने के दो मुख्य कारण है. पहला, जब सन 1949 में एक लंबी चर्चा के बाद देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत देश की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया तो इसके लिए 14 सितम्बर का चुनाव स्वयं देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था.
दूसरा कारण, 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाने के साथ एक मशहूर हिंदी कवि से जुडा है. दरसअल हिंदी दिवस मनाने की वजह हिंदी के महत्व को बढ़ावा देने के साथ ही, 14 सितम्बर को हिंदी भाषा के महान कवि राजेंद्र सिंह की जयंती होना भी है.
राजेंद्र सिंह एक भारतीय विद्वान, हिंदी-प्रतिष्ठित, संस्कृतिविद, और एक बड़े इतिहासकार थे. साथ ही उन्होंने हिंदी को एक आधिकारिक भाषा बनाने में भी प्रमुख योगदान दिया था.
हिंदी भाषा का नाम हिंदी कैसे पड़ा यह किसी भी सामान्य मानव के मस्तिष्क में आ सकता है, असल में हिंदी भाषा का नाम खुद एक दूसरी भाषा से लिया गया है, फारसी भाषा के शब्द हिंद से बने हिंदी नाम का अर्थ सिंधु नदी की भूमि होता है. 11वीं शताब्दी की शुरुआत में फारसी बोलने वाले लोगों ने सिंधु नदी के किनारे रहने वाले लोगो द्वारा बोली जाने वाली भाषा को हिंदी का नाम दिया था.