इल्या सुतस्केवर का जन्म सोवियत संघ रूस में हुआ था. लेकिन जब वह महज पांच साल के थे तब से वह यरूशलेम में रहे है जहां पर उनका पालन-पोषण हुआ. इल्या सुतस्केवर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रिसर्च स्टडीज के लिए टोरंटो यूनिवर्सिटी को चुना जहां पर ए आई के महान साइंटिस्ट हिंटन के संरक्षण में इन्होने इसका अध्ययन किया, हिंटन को कुछ लोग एआई का गॉडफादर भी कहते है.
सन 2024 की शुरुआत में, हिंटन ने गूगल को यह कहते हुए छोड़ दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां आक्रामक रूप से ओपन ए आई के चैट जी पी टी जैसे जेनरेटिव ए आई टूल बनाकर एक बड़े खतरे की ओर परिणाम की फ़िक्र किये बिना अंधी दौड़ लगा रही हैं. साथ ही हिंटन ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा था कि यह देखना काफी मुश्किल होता है कि आप गलत यूजर्स को गलत कामों के लिए इसका यूज करने से रोकने का कोई स्ट्रांग प्लान बनाये बिना इसको डेवेलप किये जा रहे हो.
हिंटन ने अपने दो ग्रेजुएट स्कॉलर्स, जिनमें से एक इल्या सुतस्केवर भी है के साथ सन 2021 में एक न्यूरल नेटवर्क डेवेलप किया था. इसकी सहायता से तस्वीरों में वस्तुओं की पहचान करने जैसी उच्च इंटेलीजेंस का कार्य आसानी से किया जा सकता था. एलेक्सनेट नामक इस प्रोजेक्ट से पता चला कि पैटर्न आइडेंटिफिकेशन में न्यूरल नेटवर्क सामान्य अनुमान से कहीं बेहतर परिणाम दे रहे थे.
हिंटन और इल्या सुतस्केवर की रिसर्च से प्रभावित होकर, गूगल ने हिंटन के स्पिन-ऑफ़ डी एन एन को खरीद लिया और इल्या सुतस्केवर को भी प्रोजेक्ट पर अप्पॉइंट किया. टेक रिसर्च में रहते हुए, इल्या सुतस्केवर ने यह दिखाने में हेल्प की कि इमेज के लिए एलेक्सनेट द्वारा दिखाए गए रिजल्ट्स उसी तरह के पैटर्न की पहचान शब्दों और वाक्यों के लिए भी कर सकती है.
इल्या सुतस्केवर इस रिसर्च के बाद बहुत जल्द आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च की दुनिया में एक और पावरफुल प्लेयर इलॉन मस्क की नजरों में आ गए. इलॉन मस्क बड़े टेक वैंचर टेस्ला के सीईओ और बड़े अरबपति है। इलॉन मस्क भी काफी पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मानवता के लिए उत्पन्न संभावित खतरों के बारे में चेतावनी दे चुके है. वर्षो पहले इलॉन मस्क इस बात से चिंतित हो गए थे कि गूगल के को फाउंडर लैरी पेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित खतरों से सुरक्षा की परवाह नहीं कर रहे हैं. इलॉन मस्क ने लेक्स फ्रिडमैन पॉडकास्ट पर भी बताया था कि 2014 में डीप माइंड का अधिग्रहण करने के बाद से गूगल में काम करने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च टीम की एकाग्रता से मेरे मन में इससे उत्पन्न होने वाले मानवता के खतरों के लिए विशेष चिंता है.