टीना डाबी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार थी. उन्हें कई किताबें तो मुँहजुबानी याद थी, यूपीएससी की तैयारी करते समय टीना ने खूब सारा इतिहास पढ़ा. सेकुलरिजम और सभी धर्मों को एक जैसा मानने वाली टीना डाबी को एक समय अपने भगवानों पर भरोसा नहीं रह गया था. उनको लगता था कि भगवान ने तो सबको एक जैसा ही इंसान बनाया है, फिर ये हिन्दू-मुस्लिम किसने किया?
टीना डाबी एक टॉपर थी इसलिये उन्हें लगता था कि उन्होंने सब कुछ जान लिया है. फिर जब उन्होंने आईएएस की परीक्षा में भी टॉप किया तो उनको लगने लगा कि उनसे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं है. इस समय उनका सेकुलरिज्म चरम पर था, अब टीना डाबी को भी मुस्लिम समाज वर्षों से उत्पीड़ित और राजनीति का शिकार लगने लगा था. साथ ही वह सोचती थी कि एक सच्चा मुसलमान कभी भरोसा नहीं तोड़ सकता.
कामयाबी, आत्म मुग्धता और अपने ज्ञान के घमंड पर सवार टीना डाबी ने एक बड़े समारोह का आयोजन करके अपने बैच के एक मुस्लिम आईएएस अधिकारी अतहर से निकाह कर लिया. इतना ही नहीं निकाह के बाद टीना डाबी ने अपने नाम के साथ गर्व से खान शब्द तक जोड़ लिया. टीना डाबी मानो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और एक कदम और बढ़ाते हुए उन्होंने अपने बायोडाटा में कश्मीरी मुस्लिम जोड़ दिया.
अपने ख्वाबों की दुनिया में ऊँची उड़ान के बाद, अब समय था आँखें खुलने का तो टीना डाबी की भी आँखें खुली जब निकाह के बाद उनके आगे बीफ बिरयानी परोस दी गयी. वह चौंक गयी जब ससुराल वालों ने कहा कि ये आईएएस वाईएएस रखो अपनी पिछली जेब में, और बुर्का पहनना शुरू करो. अब टीना डाबी का फेमिनिज़्म दहाड़ें मार-मारकर रोने लगा, मैं एक यूपीएससी टॉपर हूँ, बुर्का कैसे पहनूँगी?
फिर उनको पता चलता है कि उनके शौहर का अब्बू भी उन्हें गलत नज़रों से घूरता है, जब टीना अपने शौहर से इस बारे में बात करती है तो शौहर कहता है - मेरे अब्बू को खुश रखना तुम्हारी ज़िम्मेदारी है. एक दिन टीना अपनी सास को बताती है तो सास भी कहती है - घर का माल घर में ही यूज होना चाहिये. सुबह के समय जब उनका भजन सुनने का बहुत मन कर रहा था तो उन्होंने भजन चला दिया. भजन की आवाज सुनकर शौहर अतहर की नींद खुल गयी और उसने टीना के हाथ से मोबाइल छीनकर पटक दिया.
अब टीना ठहरी आईएएस अधिकारी, फॅमिली प्लानिंग और बच्चे सब कुछ समय पर और सोच समझ कर ही होगा, पर शौहर ने कह दिया, हमें तो जल्द बच्चे चाहिए और यह तो अल्लाह की रहमत हैं. टीना डाबी ने कहा - अपनी जॉब के साथ-साथ बच्चों की देखभाल करना आसान नहीं है. इस पर ससुर ने कहा - नौकरी छोड़ दो. इसी दौरान टीना को पता चला कि उनके शौहर किसी दूसरी लड़की से निकाह करने की प्लानिंग कर रहे हैं.
मानो टीना डाबी के होश ही उड़ गए, वह गयी शौहर से पूछने तो उसने कहा - दो क्या मैं तो चार-चार बार निकाह कर सकता हूँ यह मेरा धार्मिक अधिकार है और संवैधानिक स्वतंत्रता. अब टीना डाबी को कुछ-कुछ समझ आने लग गया कि ये सेक्युलरिज्म केवल तब तक ही जीवित था जब तक उसके नाम के पीछे कोई हिन्दू पहचान बनी थी. जैसे ही टीना डाबी के साथ खान शब्द जुड़ा सेक्युलरिज्म कब्रिस्तान पहुँच गया.
अब टीना डाबी अपने ख्वाबों ख्यालों, अपनी सपनो की दुनिया से बहार आ चुकी थी और अपने आईपीएस अधिकारी वाले असली हिन्दू अंदाज में आ गयी. एस डी एम आफिस में हवन का आयोजन किया गया. इंस्टाग्राम पर शौहर के रूप में कलंक अतहर को अनफॉलो कर दिया, और तलाक का नोटिस भिजवा दिया.
इतना सब होने के बाद टीना डाबी को अपना अस्तित्व याद आया और फिर से हनुमान जी की शरण में पहुंची साथ ही पोस्ट किया कि तुम रक्षक काहू को डरना...
तो यह था किस्सा आईएएस टीना डाबी की सेक्युलर मोहब्बत का....