हिंदू धर्म में होली के त्योहार का बहुत ही अधिक महत्व माना जाता है. हिंदी पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन यानि चैत्र माह की प्रतिपदा के दिन होली खेली जाती है.
होली से आठ दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाता हैं, जो फिर होलिका दहन के साथ समाप्त होता है. ऐसी मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है.
होलाष्टक के दिनों में नहीं करने चाहिए ये काम :
- होलाष्टक में कभी भी विवाह, मुंडन, नामकरण, सगाई सहित 16 संस्कारों में से कोई भी नहीं करना चाहिए.
- इस समय नए मकान, वाहन, प्लॉट या दूसरी प्रॉपर्टी की खरीदारी से बचना चाहिए.
- होलाष्टक के समय में कोई भी यज्ञ, हवन आदि कार्यक्रम नहीं करना चाहिए. यदि ये कार्य अति आवश्यक हो तो इन्हे होली के बाद करें या होलाष्टक से पहले ही कर लेना चाहिए.
- इस दौरान नौकरी में परिवर्तन से भी बचना चाहिए. यदि नई नौकरी ज्वाइन करनी है, तो उसे होलाष्टक के पहले या बाद में करें.
- यह भी कहा जाता है कि होलाष्टक के समय कोई भ