हेमंत बिस्वा सरमा के असम के मुख्य मंत्री बनने पर राजनीतिक पंडितों में मुख्य रूप से दो दृष्टिकोण बने.
पहला : हेमंत बिस्वा सरमा 1996 से 2015 तक कॉंग्रेस में थे, जिसके बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए, मूल रूप से भाजपा का ना होने के कारण, भाजपा का कार्यकर्ता वर्ग उनके मुख्यमंत्री बनने के निर्णय को स्वीकार नहीं करेगा, ये गलत किया भाजपा ने, भविष्य में ये गलत निर्णय सिद्ध होगा, पिछले मुख्यमंत्री सारबआनंद सोनेवाल और उनके समर्थक इस निर्णय को किस प्रकार लेंगे.
दूसरा : ये की हेमंत बिस्वा सरमा 2015 से भाजपा से जुड़ गए थे, यहां उन्होंने बहुत काम किया, ज़मीनी स्तर पर भाजपा को मज़बूत किया, खुद को साबित किया और आज उनकी मेहनत का परिणाम उनको इस तरह मिल भी रहा है, वैसे तो यह दोनों ही दृष्टिकोण अपने-अपने आप में सही है, किंतु यहां पर पहले दृष्टिकोण की विश्वसनीयता समय के साथ ही काम होती जाएगी.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि हमने 2023 के अंत तक राज्य से आफ्सपा को पूरी तरह से हटाने का लक्ष्य रखा है.