gukesh dommaraju the indian chess champion

गुकेश डोमराजू द इंडियन चेस चैंपियन

गुकेश डोमराजू एक मशहूर भारतीय शतरंज खिलाडी है, जिन्हे गुकेश डी के नाम से भी जाना जाता है. गुकेश डोमराजू महान भारतीय चेस खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के बाद विश्व चैंपियनशिप में खेलने वाले दूसरे भारतीय हैं. भारत में शतरंज की उभरती हुई युवा प्रतिभाओं में से एक गुकेश डोमराजू 12 दिसंबर 2024 को विश्व शतरंज प्रतियोगिता को जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाडी भी बने. 

चेन्नई से आने वाले गुकेश हालांकि उस क्षेत्र से आते है, जिसे भारत की शतरंज राजधानी माना जाता है और यहां से भारत के कई बड़े चेस प्लेयर्स निकले है. लेकिन गुकेश की पारिवारिक पृष्ठभूमि वैसी नहीं थी और उनके परिवार में शतरंज का कोई खिलाड़ी भी नहीं था, जो उन्हें इसके गुर बताता या फिर प्रेरित करता. गुकेश का ग्रैंडमास्टर से लेकर विश्व चैम्पियन तक का सफर उनके इस खेल के प्रति जूनून ने पूरा कराया है.

गुकेश डोमराजू के पिता डॉक्टर रजनीकांत ईएनटी सर्जन है और शतरंज में अपने बेटे की दिलचस्पी और लगन को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपना मेडिकल करियर भी छोड़ दिया था. गुकेश की मां डॉक्टर पद्माकुमारी मद्रास मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं. उनके पिता रजनीकांत ने खुद बताया था, कि बाहर से बेहद शांत दिखने वाले गुकेश असल में बहुत शरारती हैं, और घर में वो अक्सर हमें चकमा देते रहते हैं तथा कुछ ने कुछ शरारत करते रहते हैं.

जब गुकेश डोमराजू छोटे थे, तो उनके पिता अपने काम में व्यस्त रहते थे और गुकेश अक्सर उनका बेसब्री से इंतज़ार करते रहते थे. इसलिए गुकेश के पिता ने उन्हें व्यस्त रखने के लिए स्कूल के बाद शतरंज की प्रैक्टिस क्लासेज में भेजना शुरू किया. जहाँ पर जल्दी ही उनके कोच ने गुकेश की प्रतिभा को पहचान लिया और उनके माता-पिता को उनके लिए विशेष चेस ट्रेनिंग का प्रबंध करने के लिए प्रोत्साहित किया.

शतरंज के मैचों की तैयारियों के दौरान गुकेश अपने कोच के अलावा किसी से बात नहीं करते है. इस दौरान मैं भी उनके पास में बैठने की हिम्मत नहीं करता और न ही फोन इस्तेमाल करता हूँ. साथ ही रजनीकांत जी ने बताया कि मुझे शतरंज की मोटी मोटी बातें पता है, और शतरंज की बाजियों की पर विवेचना और रणनीति गुकेश और उनके कोच ही तय करते हैं. मेरी भूमिका उन्हें टूर्नामेंटों तक ले जाने और उनकी बाकी अन्य व्यावहारिक ज़रूरतें पूरी करने तक सीमित रहती है. 

गुकेश ने शतरंज की दुनिया में अपने सफर की शुरुआत घर में अनौपचारिक रूप से चेस खेलते हुए की थी. अपने घर में ही गुकेश डोमराजू ने चेस के बुनियादी गुर सीखे. बचपन में ही खेल के प्रति उनकी लगन और मेहनत से उनमे छिपे एक बेहतरीन शतरंज खिलाड़ी की प्रतिभा का पता चलने लगा था. स्कूल के दिनों में ही गुकेश डोमराजू ने ग्रैंडमास्टर का ख़िताब जीत लिया था. विश्वनाथन आनंद को अपना गुरु मानने वाले गुकेश डोमराजू ने उन्ही की शतरंज एकेडमी से ट्रेनिंग भी ली है.  

गुकेश को बचपन से ही अपने माता-पिता और स्कूल, दोनों का भरपूर सपोर्ट मिला और जल्दी ही वह स्थानीय टूर्नामेंट में जीत हासिल करने लगे. सन 2015 में गोवा में गुकेश डोमराजू ने पहली बार शतरंज की नेशनल स्कूल चैंपियनशिप जीती थी और फिर अगले दो साल तक वह इसे जीतते रहे. सन 2016 में गुकेश डोमराजू ने कॉमनवेल्थ चेस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था. इसके बाद उन्होंने स्पेन में आयोजित अंडर-12 वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप भी जीती थी. 

सन 2019 में गुकेश डोमराजू ग्रैंडमास्टर बन गए थे, तब वह सबसे कम उम्र के भारतीय ग्रैंडमास्टर बने थे और दुनिया में तब वो तीसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने थे.

सन 2021 उन्होंने तत्कालीन दिग्गज चेस प्लेयर मैगनस कार्लसन को हराकर यूरोपियन चेस क्लब कप जीता था, फिर इसी साल नॉर्वेजियन मास्टर्स भी जीता. सन 2022 में स्पेन में आयोजित मेनोर्का ओपन 2022 जीता तो फिर 2023 में नॉर्वे गेम्स का टाइटिल भी गुकेश डोमराजू ने जबरदस्त तरीके से जीता था.

अप्रैल 2024 में टोरंटो, कनाडा में पुरुष कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट करने वाले गुकेश डोमराजू यंगेस्ट प्लेयर बने थे. साथ ही 2024 में 17 वर्ष की उम्र में ग्रैंडमास्टर गुकेश डोमराजू ने अपनी जीत से 2024 की विश्व शतरंज चैंपियनशिप में नए रेकार्ड बनाने की और कदम रखा था. 

गुकेश डोमराजू द्वारा तत्कालीन पांच बार के अमेरिकी शतरंज चैंपियन और दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी हिकारू नाकामुरा, जो उनसे उम्र में भी दो गुने बड़े थे, के साथ एक आरामदायक ड्रॉ खेलकर अपना ये खिताब जीता था.  

गुकेश ने राउंड रॉबिन टूर्नामेंट में विनर बनने के बाद कहा था, मैं काफी इमोशनल था. लेकिन मैच के बाद मैं काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं. मै वास्तव में सबसे कम उम्र के होने और इन सभी रिकॉर्डों की ओर ध्यान नहीं देता हूँ, और पूरी तरह अपने गेम पर फोकस करता रहा हूँ. 

तब गुकेश जिस होटल में रुके थे उसके बाहर भारतीय फैंस की भीड़ उमड़ पड़ी थी, जो उनकी जीत को सेलिब्रेट करने आये थे. इस दौरान विश्व चैम्पियनशिप 2024 में खेलने के लिए गुकेश डोमराजू काफी एक्सइटेड थे, और पूरी लगन से तैयारियों में व्यस्त रहे थे. 

कैंडिडेट्स टूर्नामेंट को जीतकर सबसे कम उम्र के विजेता बनने वाले गुकेश डोमराजू ने 1984 में रूस के कास्पारोव का 20 वर्ष की उम्र में बनाया गया रेकार्ड तोडा था. गुकेश डोमराजू की जीत के बाद कई बार के विश्व चैंपियनशिप विनर गैरी कास्परोव ने भी गुकेश की प्रशंसा की थी और संयुक्त राज्य अमेरिका व ब्रिटेन जैसे देशों में एशिया और एशियाई प्रवासी समुदायों से आने वाली शतरंज प्रतिभाओं के कन्वेयर बेल्ट को भी सराहा था. गैरी कास्परोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसी विषय में ट्वीट भी किया था, कि टोरंटो में भारतीय भूकंप शतरंज की दुनिया में बदलती टेक्टोनिक प्लेटों की परिणति है.

भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर गुकेश डोमराजू की उल्लेखनीय उपलब्धि और असाधारण प्रतिभा व समर्पण की प्रशंसा की थी.

मशहूर भारतीय शतरंज खिलाडी और पूर्व वर्ल्ड चैम्पियन विश्वनाथन आनंद ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि मुझे व्यक्तिगत रूप से इस पर बहुत गर्व है कि गुकेश डोमराजू ने कठिन परिस्थितियों में कैसे खेला और खुद को संभाला. गुकेश इस पल का आनंद लें यह सभी के लिए गौरवशाली क्षण है. 

गुकेश डोमराजू जब चीनी स्टार डिंग लिरेन के साथ 2024 में विश्व चैम्पियनशिप में खेलें थे, तब डिंग लिरेन एक साल पहले ही 2023 में विश्व चैंपियन बने थे. 2023 में तब पांच बार के विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन ने उस टूर्नामेंट में खेलने से मना कर दिया था, इस प्रकार डिंग लिरेन विश्व चैंपियन बनने वाले पहले चीनी पुरुष खिलाड़ी बने थे. अप्रैल 2024 में दुनिया के पांचवें नंबर के खिलाड़ी ने अचानक शतरंज प्रतियोगिताओं से नौ महीने का ब्रेक ले लिया था जिसके बाद उन्हें वापसी के लिए भी काफी जूझना पड़ा.

भारत में युवा शतरंज प्रतिभाएं भरी पड़ी है, पुरुषों के कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में गुकेश के साथ शामिल होने वाले एक और भारतीय रमेश बाबू प्रज्ञानन्द भी थे, जिन्होंने 2022 में कार्लसन को हराकर शतरंज की दुनिया में तहलका मचा दिया था. 

रमेश बाबू प्रज्ञानन्द को उनके प्रशंसक प्रैग नाम से बुलाते है, वह महज 10 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय शतरंज मास्टर और 12 साल की उम्र में दुनिया के दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने थे. सन 2023 में रमेश बाबू प्रज्ञानन्द और उनकी बहन रमेशबाबू वैशाली, ग्रैंडमास्टर खिताब जीतने वाली पहली भाई और बहन की जोड़ी बनी थी.

गुकेश सितंबर 2023 में पांच बार के विश्व चैंपियन और लम्बे समय तक भारत के शीर्ष शतरंज खिलाड़ी रह चुके, विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़कर पहली बार भारत के शीर्ष रैंक वाले खिलाड़ी बने थे. यही नहीं अपने गुरु विश्वनाथन आनंद के नक़्शे कदम पर चलते हुए 2024 में गुकेश डोमराजू 10 साल बाद विश्व शतरंज प्रतियोगिता में भाग लेने वाले भारतीय भी बने थे. 2024 में गुकेश डोमराजू के विश्व चेस चैम्पियनशिप प्रतियोगिता में भाग लेने से 10 साल पहले विश्वनाथन आनंद ही इस इवेंट में जगह बना सके थे और भारत का नेतृत्व किया था.    

डिंग लिरेन और गुकेश डोमराजु के बीच 2024 विश्व शतरंज चैंपियनशिप सिंगापुर के रेसोर्ट वर्ल्ड सेंटोसा में खेली गयी, इस महा मुकाबले के लिए सभी लोग काफी एक्साइटेड थे, क्योंकि ये प्रतियोगिता जीतकर गुकेश ने न केवल भारत का नाम ऊँचा किया बल्कि सबसे कम उम्र में वर्ल्ड चैस चैम्पियन बनने का बड़ा कीर्तिमान भी स्थापित किया.  

वर्ल्ड चेस चैम्पियनशिप 2024 की प्राइज मनी 2.5 मिलियन डालर रखी गयी थी और रूल्स के मुताबिक 14 गेम में पूरी होने वाली इस प्रतियोगिता में जो खिलाडी पहले 7.5 गेम जीत लेता है, वही विनर होता है. हालांकि इस चैंपियनशिप में खेले गए 14 दौर की बाज़ियों में से 13वें दौर तक मुक़ाबला बराबरी पर चलता रहा था, जिससे पता चलता है दोनों खिलाडी कितने उच्च स्तर के थे और मुक़ाबला कितना कड़ा था. इस टूर्नामेंट का हर राउंड कई-कई घंटे तक चला और पूरी प्रतियोगिता में शतंरज प्रेमियों की दिलचस्पी बनी रही थी. 

वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप 2024 इसलिए भी विशेष और ऐतिहासिक रही क्योंकि इसके 138 साल के इतिहास में ख़िताबी जीत के लिए पहली बार दो एशियाई खिलाड़ी ही आमने-सामने थे. 

गुकेश डोमराजू ने विश्व शतरंज चैंपियनशिप 2024 में खराब फॉर्म से जूझ रहे डिंग लिरेन को हराकर, गैरी कास्परोव के 22 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन बनने के लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को तोड़ा था. गुकेश से पहले सबसे कम उम्र में वर्ल्ड चैंपियन बनने का रेकार्ड नॉर्वे के मैगनस कार्लसन के नाम था, जिन्होंने 22 साल की उम्र में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती थी. 

गुकेश के इतनी कम उम्र में बड़ी उपलब्धि की वजह इस बात से साफ़ हो जाती है कि जीतने के बाद उन्होंंने विनम्रता बनाये रखी और अपने प्रतिद्वंद्वी डिंग लिरेन की खुलकर तारीफ़ भी की.

गुकेश का चेस खेलने का अपना एक अलग ही स्टाइल है, जिसमे वह किसी भी मैच में अपनी पहली चाल चलने से पहले आंखें बंद कर ध्यान केंद्रित करते हैं और फिर खेल की शुरुआत करते हुए उसे आगे बढ़ाते हैं.

वर्ल्ड चेस यूट्यूब के साथ एक इंटरव्यू में गुकेश डोमराजू ने खुद बताया था, कि चेस एकाग्रता और मानसिक विवेचनाओं का खेल है इसलिए खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वो योगाभ्यास करते है. पहले मैं गुस्सा करता था और हार के बाद टूर्नामेंट में ठहर सा जाता था. लेकिन ध्यान, योग, प्राणायाम आदि के माध्यम से अब मैं मुक़ाबले में मिली शिकस्त के सदमे से तकरीबन आधे घंटे में ही उबर जाता हूँ. इस ट्रिक को सीखने के बाद मैं अब जल्दी से अगली बाज़ी के बारे में प्लानिंग करने लगता हूँ.

चेस टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के लिए गुकेश वैसे तो दुनिया के अलग-अलग कोनों में जा चुके है, लेकिन अब भी उनकी फेवरेट डिश दक्षिण भारतीय व्यंजन ही हैं, जिसमें डोसा और दही-चावल प्रमुख हैं. इसके अलावा वह हिंदी फ़िल्में देखना भी पसंद करते हैं. गुकेश की परंपरागत कुर्ता धोती में अपने घर में परिवार और दोस्तों के साथ साउथ स्टार रजनीकांत की फ़िल्म वेट्टैयन के गाने पर नाचते हुए एक वीडियो भी काफी पॉपुलर हुई थी.

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